पुलिस की गोली से घायल छात्र का SBDBA की मदद से हुआ ऑपरेशन

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19 दिसंबर 2019 को लखनऊ में हुए एंटी CAA आंदोलन के दौरान 2 छात्र पुलिस की गोलियों का शिकार हो गए थे उसमें से एक छात्र जिलानी जो 16 वर्ष के है उसके पीठ के पीछे से गोली निकलकर पेट से बाहर आ गई थी और उसकी आंते बाहर लटक रही थी। शुरू में पुलिस ने किसी को मिलने नहीं दिया जहा KGMC लखनऊ से अधूरा इलाज के बाद दहशत में वहां से आना पड़ा, जिलानी के पिता ने अज्ञात नाम से FIR कराई जिसपर पुलिस ने झूठे मुकदमे में फसाने की धमकी दी और लखनऊ पूरा शांत था!

लॉकडाउन के चलते कोई भी हॉस्पिटल उसे लेने को तैयार नहीं था। जिलानी के पिता ट्रैक्टर चलाते थे जो उनकी मात्र रोज़ी रोटी और बेटे के इलाज का संसाधन था, कई महीने बैंक कि किश्त नहीं चुका पाने की वजह से बैंक ने उनका ट्रैक्टर जप्त कर लिया, दूसरी तरफ लटकती आंट, बढ़ते इंफेक्शन से जूझते हुए जब डॉक्टर ने सवा लाख ऑपरेशन का खर्च बताया जिसे सुनकर जिलानी के परिवार के होश उड़ गए!

एंटी CAA आंदोलन के बाद पूरे लखनऊ में और पूरे उत्तर प्रदेश में इस आंदोलन के नेताओं से और प्रमुख चेहरों से जब अच्छे अच्छे लोगों ने वास्ता तोड़ लिया हो, उस मुखालिफ हवा के बावजूद खौफ और पुलिसिया जुल्म की धमकी के बावजूद, पुलिस की गोलियों का शिकार जिलानी के ऑपरेशन के लिए दोबारा संविधान बचाओ अभियान की लीगल कन्वीनर अशमा इज्जत सामने आईं, जो लखनऊ हाई कोर्ट में वकील है और एंटी CAA आंदोलन में निर्दोष लोगो के केस देख रही है। संविधान बचाओ, देश बचाओ अभियान (SBDBA) ने मुहिम के संरक्षक मंडल की मदद से जिलानी के ऑपरेशन को मुमकिन बनाया और ऑपरेशन कामयाब हुआ है!

कल अस्पताल में कामयाब आपरेशन के बाद SBDBA के कन्वीनर अमीक जामेई और अभियान के सीनियर मेंबर दिनेश चन्द्र (रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन वायु सेना) जिलानी को देखने अस्पताल गए। आपरेशन कामयाब हुआ है, जिलानी के पिता की आंखो में चमक थी। पीड़ित छात्र जिलानी ने बताया कि वह दोबारा से पढ़ना चाहता है, लेकिन उसे मालूम है कि रीढ़ की हड्डियों में गोली लगने की वजह से वह दोबारा से खड़ा नहीं हो पाएगा। उसकी आंखों नम थी उसकी आंखो में सपना है, वह अपने पिता को पढ़ लिख कर गरीबी बाहर निकालना चाहता है। यह सब तब हो रहा है जब पूरा समाज जिलानी से उसके पिता से किनारा कर चुका है। ऐसे में जिलानी पुलिस की गोलियों का शिकार हुए ऐसे अन्य लोग आंदोलन में फर्जी तौर पर जेलों में डाले गए, दोबारा बेल होने के बाद योगी सरकार नए तरीके से गैंगस्टर आगजनी की नई धाराएं लगाकर दुबारा पुलिस सर्वाइवर को तलाश रही है!

संविधान बचाओ देश बचाओ अभियान के लीगल टीम की कन्वीनर इज्जत ने बताया कि हम गैंग्स्टर के खिलाफ एफआईआर के क्वेष करने के लिए उच्च न्यायालय में रिट दाखिल कर रहे है जिसमें हमे कामयाबी मिल रही है!

संविधान बचाओ देश बचाओ अभियान के कन्वीनर और सपा के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई जो नागरिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के सवाल पर एक मुखर आवाज़ है। उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा है सिर्फ अगर लखनऊ की बात कर ले 20 ऐसे निर्दोष सर्वाइवर हैं, जो जेल से निकलने के बाद, जिनकी रोजी-रोटी खत्म हो चुकी है, जिनके लिए समाज को खड़े होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि इन सभी प्रताड़ित बेरोजगार जिनके परिवारों का कोई सहारा नहीं है, समाज उन्हें खड़ा करने में मदद दे और सामने आए।

गौरतलब है कि संविधान बचाओ देश बचाओ अभियान ने 19 दिसंबर 2019 को उत्तर प्रदेश में एंटी CAA आंदोलन की बुनियाद रखी। जिसे उनके नेता समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का समर्थन हासिल था। अभियान ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को आंदोलन से लेकर अदालत तक, हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले में पीआईएल रिट के जरिए सरकार द्वारा बनाए प्रॉपर्टी अध्यादेश के खिलाफ कोर्ट तक ललकारा है। जामेई ने कहा है यह अलग बात है सरकार CAA NRC NPR पर अभी खामोश है लेकिन भविष्य में अगर ऐसे गैर संविधानिक कानून को लाने की कोशिश हुई तो सूबे का एक-एक नौजवान सड़क पर होगा और अपने नागरिक संविधानिक अधिकार के लिए वह जेल से लेकर संसद तक शांति और जम्हूरियत के दायरे में अपनी लड़ाई को लड़ेगा!


 


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