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लॉकडाउन में पुलिस की पिटाई के बाद दलित युवक द्वारा आत्महत्या की जांच हो : माले

31 मार्च को घर में राशन की व्यवस्था के लिए जाते हुए बीच रास्ते एक पुलिसकर्मी ने उसे रोका और यह जानकर कि वह क्वारन्टीन होम से निकल आया है, उसे मार-मार कर लहूलुहान कर दिया

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प्रतीकात्मक चित्र

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) की राज्य इकाई ने लखीमपुर खीरी जिले में गुड़गांव से लौटे एक दलित युवक द्वारा पुलिस की बर्बर पिटाई के बाद आत्महत्या कर लेने की घटना की उच्च स्तरीय जांच और दोषी पुलिसकर्मी को कठोर सजा देने की मांग की है।

पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि लॉकडाउन के नाम पर पुलिस निरंकुशता अस्वीकार्य है। उन्होंने बताया कि प्राप्त जानकारी के अनुसार खीरी जिले के मैगलगंज थानाक्षेत्र का निवासी दलित युवक रोशनलाल लॉकडाउन में कारोबार बंद होने से गुड़गांव से अपने घर 29 मार्च को लौट आया था। वह प्रशासन द्वारा बाहर से आये लोगों को क्वारन्टीन में रखने के लिए तय जगह (स्कूल) में स्वेच्छा से रहने चला गया था।

मार्च 31 को घर में राशन की व्यवस्था के लिए जाते हुए बीच रास्ते एक पुलिसकर्मी ने उसे रोका और यह जानकर कि वह क्वारन्टीन होम से निकल आया है, उसे मार-मार कर लहूलुहान कर दिया। पुलिस की बर्बर पिटाई के बाद दलित युवक ने गांव में पेड़ से लटक कर आत्महत्या ली। मृत्यु पूर्व युवक ने संबंधित पुलिसकर्मी का नाम लेकर साक्ष्य छोड़े हैं और घटना की एफआईआर दर्ज करने के लिए परिजनों ने मैगलगंज थाने में तहरीर भी दी है।

माले राज्य सचिव ने कहा कि दलित युवक की बर्बर पिटाई करने वाले पुलिसकर्मी को अविलंब गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि युवक दलित न होता तो शायद उसके साथ इस तरह से अमानवीय सलूक न किया गया होता। यदि उसने क्वारन्टीन तोड़ने का अपराध किया था तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाता न कि आत्महत्या के लिए विवश कर देने वाली बेरहम पिटाई। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और एससी आयोग से भी घटना का स्वतः संज्ञान लेकर मृतक को त्वरित न्याय दिलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन लागू करने के नाम पर पुलिस निरंकुश हो गई है।


विज्ञप्ति: माले राज्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी 

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