योगी राज में आवाज़ उठाना गुनाह- किसी को नज़रबंद किया, किसी को दी धमकी!

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उत्तर प्रदेश के योगी राज में जनता की आवाज उठाना सबसे बड़ा गुनाह हो गया है। राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं पर की गिरफ्तारी, एफआईआर और पुलिसिया धमकियां आम बात हो गई हैं। इसी क्रम में 10 मई को 69 हजार शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में ज्ञापन देने जा रहे न्याय मोर्चा के संयोजक सुनील मौर्य को पुलिस ने उनके संगठन के कार्यालय में ही नजरबंद कर दिया गया। वहीं सोनभद्र में बीजेपी के राज्यसभा सांसद राम सकल ने आदिवासी रामसुंदर गोंड की हत्या के खिलाफ आवाज उठा रहे विपक्षी दलों को ही धमकी दी कि वो सरकार की छवि खराब करने से बाज आएं।

दरअसल 69000 शिक्षक भर्ती न्याय मोर्चा के आह्वान पर प्रदेश व्यापी विरोध प्रदर्शन के तहत कई जिलों में प्रतिवाद दर्ज हुआ। उसी संदर्भ में इलाहाबाद में भी जिला मुख्यालय पर जाकर ज्ञापन देने की योजना बनी थी, लेकिन सुबह ही कार्यक्रम से पहले स्वराज भवन के सामने न्याय मोर्चा के संयोजक सुनील मौर्य को नजरबंद कर दिया गया। बाद में प्रशासन ने वहीं पर ज्ञापन लिया।

न्याय मोर्चा के संयोजक सुनील मौर्य ने कहा कि कार्यक्रम से पूर्व ही सीईओ कर्नलगंज ने आकर धमकाते हुए यह कहा कि यदि आप बाहर निकलते हैं तो आपको महामारी एक्ट में जेल भेज दिया जाएगा और उन्होंने हिदायत दिया कि यहां पर पुलिस प्रशासन की व्यवस्था किया जाए और ज्ञापन देने के लिए बाहर ना निकलने दिया जाए। जिसके बाद पुलिस विभाग के कई लोग वहां पर आ गए और तब तक रहे, जब तक उनको भरोसा नहीं हो गया कि अब कोई कार्यक्रम नहीं होगा।

 

सुनील मौर्य ने कहा कि हम 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़े छात्र परीक्षा में हुए व्यापक भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच कराने और भर्ती परीक्षा को रद्द कर पुनः परीक्षा कराने की मांग सरकार से कर रहे हैं, ताकि भ्रष्टाचार में लिप्त नकल माफियाओं को सबक मिल सके और भविष्य में किसी भी भर्ती परीक्षा का पेपर आउट ना करा सके। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों पर ध्यान देने के बजाय दमन पर उतारू है और छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को भी दबाने की कोशिश कर रही है।

इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय महासचिव नीरज कुमार ने कहा कि आज जब पूरे देश में बेरोजगारी चरम पर है नौजवानों को रोजगार नहीं मिल रहा है उस दौरान 69000 शिक्षक भर्ती उत्तर प्रदेश में होने जा रही है। लेकिन सरकार ने खुद ही गलत तरीके से नियम कानून लागू कर इस पूरी भर्ती को कोर्ट में ले जाने के लिए रास्ता खोल दिया। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ साल पूरा होने जा रहा है, लेकिन सरकार एक भर्ती पूरी नहीं कर सकी। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार नौजवानों को रोजगार देने के बजाय आपस में लड़ाने का काम कर रही है। उन्होंने न्याय मोर्चा के संयोजक को धमकाने की कड़ी निंदा की।

न्याय मोर्चा से जुड़े राहुल गौड़ व सुमित गौतम ने कहा कि हम बेरोजगार नौजवान सरकार के दमन से डरने वाले नहीं हैं यदि हमारी मांगे पूरी नहीं होती है तो हम सड़क पर फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि न्याय मोर्चा कभी भी शांति व्यवस्था को भंग करने की कोशिश नहीं करेगा, लेकिन अपनी बात कहने से भी पीछे नहीं हटेगा। ज्ञापन देने के दौरान न्याय मोर्चा के संयोजक सुनील मौर्य, सुमित गौतम, राहुल गौड़, सूर्य प्रताप, शैलेश पासवान, प्रदीप ओबामा, ए कुमार, दिग्विजय सिंह मौजूद रहे।

 

आदिवासी की हत्या की आवाज उठा रहे विपक्षी नेताओं को बीजेपी सांसद की धमकी

सोनभद्र में बीजेपी सांसद राम सकल ने आदिवासी रामसुंदर गोंड की हत्या के खिलाफ आवाज उठा रहे विपक्षी दलों को ही धमकी दी कि वो सरकार की छवि खराब करने से बाज आएं। बीजेपी सांसद राम सकल ने कहा कि जनपद को राजनीतिक प्रयोग स्थली नहीं बनने देने और सरकार की छवि धूमिल करने वाले विपक्षी दलों के नेताओ के मंसूबो को सफल ध्वस्त करेंगें।

बीजेपी सांसद के बयान का सोनभद्र के विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया है। पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड़, स्वराज अभियान के नेता दिनकर कपूर, समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष श्याम बिहारी यादव, राहुल प्रियंका कांग्रेस सेना के प्रदेश महामंत्री राजेश द्वेदी, सपा के पूर्व जिला महासचिव जुबेर आलम, सीपीएम के जिला सचिव नंदलाल आर्य, सीपीआई के जिला सचिव डा. आरके शर्मा, मजदूर किसान मंच के नेता कृपाशंकर पनिका और कांता कोल ने ऑनलाइन आयोजित बैठक के बाद प्रेस को इस आशय का बयान जारी किया।

विपक्षी दलों के नेताओं ने अपने बयान में कहा कि भाजपा सांसद को आदिवासी रामसुन्दर गोंड की हत्या में लिप्त अवैध बालू खनन माफिया भाजपा नेता के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए ना कि इस सवाल पर जनता की मदद करने वाले राजनीतिक नेताओं को धमकी देनी चाहिए। सासंद के बतौर उनका काम राजधर्म का पालन करना है ना कि धमकी देना।

नेताओं ने कहा की यदि भाजपा की सरकार और जिला प्रशासन मृतक रामसुंदर गोंड़ की हत्या की एफआईआर दर्ज कर लेता और प्रधान, नाबालिग बच्चो समेत ग्रामीणों को फर्जी मुकदमे में फंसा कर उत्पीड़न न करता तो इस सवाल को राजनीतिक सवाल बनाने की आवश्यकता ही न पड़ती। जिन प्रशासनिक अधिकारिओ ने खनन माफियाओं से गठजोड़ कायम कर इस हत्याकांड को अंजाम दिया भाजपा सांसद उनके विरुद्ध कार्यवाही कराने की जगह उल्टा जनता की मदद करने वाले विपक्षी दलों पर हमले कर रहे हैं। अभी भी ग्रामीणों ने बताया है कि मृतक रामसुंदर गोंड़ के पुत्र लाल बहादुर को विंडमगंज थाना अध्यक्ष द्वारा मुकदमा वापस लेने के लिए लगातार धमकी की जा रही है।

नेताओं ने कहा कि हत्यारों के विरुद्ध दायर मुकदमें में एससी एसटी एक्ट की धाराएं भी नहीं लगाई गई है, अभी तक नामजद अभियुक्तों की गिरफ़्तारी नहीं की गयी और इतना ही नहीं न्यायोचित और निष्पक्ष जांच के लिए सीओ दुद्धी को उनके पद से हटाने की न्यूनतम मांग को भी नहीं माना गया। सरकार चलाने के नाते भाजपा नेताओं का दायित्व था कि वह इस हत्याकांड और उत्पीड़न के लिए पकरी की जनता से माफी मांगते और जनता की न्यायोचित मांगों को पूरा कराते।

विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि अभी भी इस बात की जांच कराने की जरूरत है कि नगवा गांव में मिले हुए खनन पट्टे पर खननकर्ताओं द्वारा पकरी गांव में जेसीबी लगाकर खनन आखिर किसके आदेश पर कराया गया और क्या मौके पर पहुंची हुई पुलिस को यह बात नहीं दिखाई दी थी। जबकि रामसुंदर की लाश मिलने के ही दिन से सभी ग्रामीण इसे खनन माफियाओ द्वारा की गयी हत्या मान रहे हैं।

नेताओं ने कहा कि राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता का यह कर्तव्य है कि वह जनसमस्याओं से शासन प्रशासन को अवगत कराएं ताकि न्याय मिल सके। पकरी के ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इसके विरूद्ध भी पकरी गए भाजपा सांसद व ओबरा के भाजपा के विधायक कह रहे थे कि डीएम व एसपी से मिलने क्यों गए थे। इसलिए विपक्षी दलों के नेताओं ने मांग की है कि खनन माफिया द्वारा अंजाम दी गयी हत्या की इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, हत्यारों को तत्काल गिरफ्तार किया जाये, दोषियों को दण्डित किया जाये।

नेताओं ने भाजपा सांसद से कहा कि दमन और उत्पीड़न की कार्रवाई से पुलिस और प्रशासन को पीछे हटना चाहिए अन्यथा अगर यही स्थिति रही तो विपक्षी दल लोकतंत्र की रक्षा और आदिवासियों समेत आम नागरिको की सुरक्षा के लिए संयुक्त रूप से आंदोलन करने को बाध्य होंगे।


विज्ञप्ति पर आधारित


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