पूर्वोत्तर: अमित शाह के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, CAB लागू हुआ तो UN से करेंगे हस्तक्षेप की मांग

मीडिया विजिल मीडिया विजिल
उत्‍तर-पूर्व Published On :


नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) संसद में लाने की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की घोषणा के दो दिन बाद गुरुवार को मणिपुर, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में इसके खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ. गौरतलब है कि गृह मंत्री ने कहा था कि सरकार यह विधेयक संसद में लाएगी. जिसके बाद इंफाल घाटी में बड़ी संख्या में सिविल सोसायटी के सदस्यों और विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्रों ने  प्रदर्शन किए.

छह प्रमुख छात्रों के संगठनों ने भी इस विरोध का समर्थन किया. ऑल मणिपुर स्टूडेंट्स यूनियन (AMSU), डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स अलायंस ऑफ मणिपुर (DESAM), कंगलिपक स्टूडेंट्स एसोसिएशन (KSA), स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ कंगलिपक (SUK) और अपुनबा हिस्पनिपक माहेइरो सिंगपंगलुप (AIMS) इसमें मुख्य रूप से शामिल थे.

शिलांग में प्रदर्शन का आयोजन करने वाले एनईएफआइपी ने आरोप लगाया है कि नागरिकता संशोधन विधेयक क्षेत्र से मूल आदिवासियों को खदेड़ने वाला होगा.संगठन ने कहा कि केंद्र ने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से विस्थापित होने वालों को वैध नागरिकता प्रदान करने के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक लागू किया तो वह संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग करेगा.

जेसीपीआई ने पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से एकजुट होकर इस विधेयक का विरोध करने का आह्वान किया.
जेसीपीआई ने कहा, ‘मौजूदा समय में दीमापुर में तीन से चार लाख शरणार्थी रह रहे हैं, असम में 31 अगस्त को एनआरसी का अंतिम मसौदा जारी हुआ था. यह आगे और बढ़ने वाला है. नागरिकता संशोधन विधेयक लागू होने पर इन शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिल जाएगी और नगालैंड पहले जैसा नहीं रहेगा.’

इम्फाल में इस विधेयक के विरोध में हजारों की संख्या में महिलाएं और छात्र सड़कों पर उतरे. इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले मणिपुर पीपुल अगेंस्ट सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल (एमएएनपीएसी) का कहना है कि यह नागरिकता संशोधन विधेयक असम समझौता को अप्रभावी कर देगा.

नगालैंड की राजधानी कोहिमा में भी विभिन्न नगा जनजातियों के हजारों प्रतिनिधियों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में ‘ज्वाइंट कमिटी ऑन प्रोटेक्शन ऑफ इंडिजनस पीपुल (जेसीपीआई), नगालैंड एंड नॉर्थ ईस्ट फोरम ऑफ इंडिजनस पीपुल (एनईएफआईपी) के आह्वान पर विरोध मार्च निकाला और मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो को ज्ञापन सौंपा.

ज्ञापन में कहा गया कि नागरिकता संशोधन विधेयक पूर्वोत्तर क्षेत्र की जनजातियों के सिर पर लटक रही खतरे की तलवार है. शिलांग में आयोजित रैली में एनईएफआईपी ने आरोप लगाया कि नागरिकता संशोधन विधेयक क्षेत्र से मूल जनजातियों के खात्मे की कोशिश है.

 


मीडिया विजिल जनता के दम पर चलने वाली वेबसाइट है। आज़ाद पत्रकारिता दमदार हो सके, इसलिए दिल खोलकर मदद कीजिए। अपनी पसंद की राशि पर क्लिक करके मीडिया विजिल ट्रस्ट के अकाउंट में सीधे आर्थिक मदद भेजें।

मीडिया विजिल से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।