छत्तीसगढ़ : चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने के आरोप में अमित जोगी गिरफ्तार

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छत्‍तीसगढ़ Published On :


छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर पुलिस ने चुनाव के दौरान अपने जन्म स्थान के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में अमित जोगी को गिरफ्तार किया है. अमित जोगी की गिरफ़्तारी बीजेपी नेता समीरा पैकरा की शिकायत पर हुई है.

समीरा पैकरा ने साल 2013 में मरवाही विधानसभा से भाजपा की टिकट पर अमित जोगी के खिलाफ चुनाव लड़ा था.चुनाव में हारने के बाद समीरा ने नामांकन में गलत जन्म स्थान बताने को लेकर थाने में श‍िकायत दर्ज कराई थी.

समीरा पैकरा ने अपनी शिकायत में कहा है कि अमित जोगी ने चुनाव के दौरान दिए गए शपथपत्र में अपना जन्म वर्ष 1978 में ग्राम सारबहरा गौरेला में होना बताया है,जबकि उनका जन्म वर्ष 1977 में अमेरिका में टैक्सास के डगलास में हुआ था. पैकरा ने आरोप लगाया कि जोगी ने गलत तरीके से सारबहरा गांव में जन्म होने का प्रमाण पत्र प्राप्त किया.

बिलासपुर एसपी (ग्रामीण) संजय कुमार ध्रुव  ने कहा है कि आदेशानुसार अमित जोगी को अदालत में में पेश किया जायेगा, कार्यवाही की जाएगी.

बिलासपुर जिले के पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल के अनुसार पुलिस ने मंगलवार को शहर के मरवाही सदन से अमित जोगी को गिरफ्तार किया है. अग्रवाल ने बताया कि अमित जोगी पर आरोप है कि उन्होंने साल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को अपने जन्म स्थान के बारे में गलत जानकारी दी थी.

साल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद मरवाही विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी की प्रत्याशी रही समीरा पैकरा ने जोगी की जाति और उनके जन्म स्थान के संबंध में हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी. हाई कोर्ट ने इस साल जनवरी में छत्तीसगढ़ की तत्कालीन विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने का हवाला देते हुए याचिका खारिज दी थी.बीते सोमवार को समीरा और मरवाही के लोगों ने बिलासपुर पुलिस अधीक्षक के कार्यालय के सामने जोगी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था.

गौरतलब है कि जाति प्रमाण पत्र के मामले में अमित जोगी ही नहीं उनके पिता भी आरोपों और जांच की जद में हैं. पूर्व की रमन सिंह सरकार ने इस बारे में छानबीन समिति गठित की थी. इसने जोगी को जारी कंवर अनुसूचित जनजाति से संबंधित जाति प्रमाण पत्रों को विधि संगत नहीं पाया था. साल 2017 में जोगी के जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त भी कर दिया गया, जिसके खिलाफ जोगी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.


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