बिहार चुनाव: दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक बने माले परचम के तीन तारे !

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डॉ. सुनील यादव

बिहार के चुनावी बिगुल के बीच महागठबंधन में शामिल भाकपा माले ने न सिर्फ जमीनी बल्कि जनता से जुड़े प्रत्याशी उतारकर एक मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है। माले का कैडर जनसरोकारी संघर्ष के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि इसके सभी प्रत्याशी जन आंदोलनों से निकलकर आए हैं। अक्सर वामपंथी पार्टियों के लिए सवाल उठते रहे हैं कि ‘इसका नेतृत्व सवर्ण के हाथों में रहता है, दलित-पिछड़े सिर्फ झंडा ढोने व दरी बिछाने का काम करते हैं’। पर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भाकपा माले ने बिहार चुनाव में महागठबंधन में मिलीं अपनी 19 सीटों में एक भी सवर्ण को टिकट नहीं दिया है। हलांकि बिहार के पिछले चुनावों में भी भाकपा-माले का टिकट पाने और जीतने वालों में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय की बहुलता रही है।

महागठबंधन में भाकपा माले को जो 19 सीटें मिली हैं उसका जातिवार विवरण देखें तो कुछ इस प्रकार है-

  1.  पालीगंज : संदीप सौरभ – (यादव, पिछड़ा)
  2.  आरा : कयामुद्दीन अंसारी – (मुस्लिम)
  3.  अंगिआव:  मनोज मंजिल – (रविदास, दलित)
  4.  तरारी: सुदामा प्रसाद – (वैश्य, अति पिछड़ा)
  5.  डुमरांव: अजित कुमार सिंह – (कुशवाहा, पिछड़ा)
  6.  काराकाट : अरुण सिंह – (कुशवाहा, पिछड़ा)
  7.  अरवल : महानंद प्रसाद – (कुशवाहा, पिछड़ा)
  8.  घोषी : रामबली सिंह यादव – (यादव, पिछड़ा)
  9.  भोरे: जितेंद्र पासवान – (पासवान, दलित)
  10.  जीरादेई : अमरजीत कुशवाहा – (कुशवाहा, पिछड़ा)
  11.  दरौली : सत्यदेव राम – (रविदास, दलित)
  12.  दरौंदा : अमरनाथ यादव – (यादव, पिछड़ा)
  13.  दीघा : शशि यादव – (यादव, पिछड़ा)
  14.  फुलवारी : गोपाल रविदास – (रविदास, दलित)
  15.  सिकटा : वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता – (वैश्य, अति पिछड़ा)
  16.  औराई : आफताब आलम – (मुस्लिम)
  17.  बलरामपुर : महबूब आलम – (मुस्लिम)
  18.  कल्याणपुर : रंजीत राम – (रविदास, दलित)
  19.  वारिसनगर : फूलबाबू सिंह – (कुशवाहा, पिछड़ा)

इस तरह से देखें तो भाकपा-माले ने दलित, पिछड़ा और अल्पसख्यकों को ही उम्मीदवार बनाया है।

निवर्तमान विधायक- महबूब आलम, सुदामा प्रसाद, सत्यदेव राम

भाकपा माले के घोषित उम्मीदवारों की सूची देखें तो उसने अपने तीनों निवर्तमान विधायकों महबूब आलम, सुदामा प्रसाद और सत्येदव राम को फिर से उम्मीदवार बनाया गया है। महबूब आलम निवर्तमान विधानसभा में भाकपा-माले विधायक दल के नेता रहे हैं। वे बलरामपुर से पार्टी के उम्मीदवार होंगे। सुदामा प्रसाद अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं तथा सत्यदेव राम अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के बिहार प्रदेश के अध्यक्ष हैं।

भाकपा माले विधायक सत्यदेव राम, महबूब आलम और सुदामा प्रसाद

जैसा कि बता चुका हूँ कि भाकपा माले के सभी उम्मीदवार जनआंदोलनों से निकलकर आएं हैं। लोकतांत्रिक अधिकार आंदोलन की अगुआई करनेवाले, छात्र आंदोलनों से लेकर किसान मजदूर, स्कीम वर्कर्स के संघर्षों में शामिल रहे लोग इस बार प्रत्याशी बनाए गए हैं।

संदीप सौरभ

पालीगंज से आइसा के वर्तमान महासचिव व जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व महासचिव संदीप सौरभ को उम्मीदवार बनाया गया है। ध्यान रहे कि पालीगंज विधानसभा सीट पर पिछली बार राजद के जयवर्धन यादव उर्फ़ बच्चा बाबू ने भाजपा उम्मीदवार राम जनम शर्मा को हरा कर जीत ली थी। फिलहाल जयवर्धन भले ही जदयू में शामिल हो गए हों पर यह सीट राजद के हिस्से ही थी जिसे महागठबंधन में भाकपा माले को मिली है।

इस सीट पर इस बार संदीप सौरव की स्थिति मजबूत मानी जा रही  है। इस सीट की रोचकता बढती जा रही है क्योंकि राजद छोड़ जदयू में शामिल जयवर्धन यादव एनडीए के उम्मीदवार होंगे, वहीँ 2010 में बिजेपी से विधायक रहीं डॉ. उषा विद्यार्थी लोजपा के टिकट पर मैदान में आ गयीं हैं। संदीप की पहचान बेहतरीन संगठनकर्ता व जनता के लिए समर्पण को लेकर है। इसको इसी से समझा जा सकता है कि संदीप ने जनता के बीच बने रहने तथा उनके संघर्षों को जिंदा रखने के लिए सहायक प्रोफेसर की नौकरी तक छोड़ दी।

पालीगंज से गठबंधन समर्थित भाकपा माले उम्मीदवार संदीप सौरभ

अमरजीत कुशवाहा

सिवान के जिरादेई से इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरजीत कुशवाहा को माले ने उम्मीदवार बनाया है। 2010 के विधानसभा चुनाव में अमरजीत कुशवाहा दूसरे स्थान पर रहे थे। पिछली बार राजद-जदयू गठबंधन के बीच रमेश कुशवाहा ने जीत हासिल किया था। रमेश कुशवाहा लम्बे समय तक माले से जुड़े रहे हैं जिसका फायदा उन्हें जदयू में जाने के बाद मिला था। लेकिन रमेश कुशवाहा का टिकट कट जाने से पर इस बार अमरजीत कुशवाहा की यहाँ स्थिति और मजबूत हो गई है।

अमरजीत कुशवाहा, पिछले 5 साल से सीवान जेल में बंद हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भी वह जीरादेई से उम्मीदवार थे और नामांकन के दिन ही गिरफ्तार किए गए थे। जेल में रहते हुए ही उन्होंने पिछला चुनाव लड़ा था और कड़ी टक्कर में हारे थे। अमरजीत लोकप्रिय युवा नेता रहे और लगातार सीवान में जनता के जरूरी सवालों पर जूझारू संघर्ष खड़ा करते रहे। जिसकी कीमत उनको पिछले 5 साल से जेल में रह कर चुकानी पड़ रही है। भाजपा नेताओं ने उनको झूठे मुकदमों में फंसा कर जेल भेजने की साजिश रची और बिडम्बना है कि 5 साल से न तो उनको बेल मिली और न ही कोई सजा ही हुई।

सिवान के जिरादेई से प्रत्याशी अमरजीत कुशवाहा

युवा आंदोलन में सक्रियता और इलाके में जनांदोलन की मिसाल पेश करते हुए अमरजीत कुशवाहा इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए ही 5 साल पहले जेल गए। इसीलिए उनको सम्मान देते हुए RYA ने अपने राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्हें अपना सम्मानित राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया।

मनोज मंजिल

भोजपुर के अगिआंव (सु.) से इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भोजपुर में शिक्षा आंदोलन के नेता मनोज मंजिल जो पिछले चुनाव में 31572 प्राप्त कर तीसरा स्थान हासिल किया था। इस बार फिर से मैदान में हैं। इस सीट पर राजद के साथ आने से माले इस बार काफी मजबूत दिख रही है। नामांकन के तुरंत बाद जिस तरह मनोज मंजिल को गिरफ्तार किया गया उससे जनता के बीच उनकी लोकप्रियता और बढ़ गयी है।

मनोज मंजिल भाकपा माले की केंद्रीय कमेटी के सदस्य और युवा संगठन इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। कम्युनिस्ट पार्टी और युवा संगठन में केंद्रीय भूमिका में रहते हुए मनोज मंजिल ने आरा को अपनी राजनैतिक-वैचारिक सोच की प्रयोग स्थली बना रखा है। भोजपुर और अगियांव विधानसभा क्षेत्र को उन्होंने दलितों गरीबों खेत मजदूरों की जन दावेदारी के मॉडल के रूप में विकसित किया है।

भोजपुर के अगिआंव से माले प्रत्याशी मनोज मंजिल

दो साल पहले मनोज मंजिल ने एक विलक्षण आंदोलन को आकार दिया- सड़क पर स्कूल। बिहार की प्राथमिक शिक्षा की दुर्दशा को बेनकाब करते हुए स्कूलों की जर्जर इमारत, स्कूल की जमीन पर दबंगो के कब्ज़े व शिक्षकों के खाली पड़े पदों का सवाल उठाते हुए पूरे भोजपुर में स्कूल के बच्चों को लेकर सड़क पर ही पाठशाला शुरू कर दी। मुख्य सड़कों और राजमार्गों पर स्कूली बच्चों का हुजूम बैठ कर पढाई करने लगा। इन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक मनोज के साथी ही होते थे। यह आंदोलन भी पूरे बिहार का मुद्दा बना। और नितीश सरकार को स्कूली शिक्षा को लेकर कई घोषणाएं करनी पड़ी।

अजीत कुमार सिंह

डुमरांव से इनौस के राज्य अध्यक्ष अजीत कुमार सिंह प्रत्याशी हैं पिछले चुनाव की बात करें तो यहाँ से राजद जदयू गठबंधन से जदयू के ददन पहलवान विधायक थे। इस बार ददन पहलवान यहाँ से निर्दल चुनाव लड़ने की कयास है क्योंकि जदयू ने ददन पहलवान का टिकट काटकर अंजुम आरा को चुनावी समर में उतार दिया है। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की सरजमी तथा 87.13 प्रतिशत ग्रामीण मतदाताओं वाली सीट डुमरांव पर इस बार महागठबंधन मजबूत दिख रहा है।

डुमरांव से गठबंधन समर्थित माले प्रत्याशी अजीत कुमार सिंह

शशि यादव

पटना के दीघा विधानसभा क्षेत्र से माले ने ऐपवा की राज्य सचिव, आशा कार्यकर्ता संघ (गोपगुट) की प्रदेश अध्यक्ष व स्कीम वर्करों के फेडरेशन की राष्ट्रीय संयोजक शशि यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है। शशि यादव छात्र आंदोलन से निकली नेता है, वो आइसा की स्थापना के समय से छात्र आंदोलन में सक्रिय रही हैं। इस समय बिहार में वो आशा कार्यकर्ता और स्कीम वर्करों के आंदोलन का प्रमुख चेहरा हैं। यह सीट फिलहाल बीजेपी की सिटिंग सीट है जिस पर महागठबंधन को काफी मेहनत करने की जरूरत है।

पटना के दीघा विधानसभा से भाकपा माले प्रत्याशी शशि यादव

आफताब आलम

मुजफ्फरपुर जिले के औराई सीट की घोषणा ने सबको चौंका दिया क्योंकि राजद ने यहाँ से अपने सिटिंग विधायक डाक्टर सुरेन्द्र राय का टिकट काटकर माले को दे दिया है जबकि यह रोचक तथ्य है कि जातीय समीकरण के अनुसार यहाँ से कोई यादव प्रत्याशी ही जीत हासिल करता रहा है भले ही वह किसी पार्टी का हो। इसके बावजूद यहाँ से इंसाफ मंच के राज्य उपाध्यक्ष आफताब आलम को उम्मीदवार बनाकर मजबूत दाव खेल के माले ने मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। क्योंकि आफताब इस क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं।

मुजफ्फरपुर के औराई से माले प्रत्याशी आफताब आलम

अमरनाथ यादव

दुरौंदा से सीवान में काफी लोकप्रिय और कई जुझारू संघर्षों से तपकर निकले किसान नेता अमरनाथ यादव को माले ने प्रत्याशी बनाया है। अमरनाथ यादव विधायक भी रह चुके हैं। सीवान संसदीय सीट से माले प्रत्याशी के बतौर लोकसभा चुनाव में 2 लाख से ऊपर वोट भी पा चुके हैं। दुरौंदा सीट पर पूर्व में निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले इंजीनियर शैलेन्द्र यादव राजद से दावेदारी ठोकने के मूड में थे लेकिन माले के हिस्से में इस सीट के आने बाद शैलेन्द्र का रूख भी इस सीट को प्रभावित करेगा कि वे गठबंधन में रहते हैं या निर्दल फिर से चुनाव लड़ते हैं।

सीवान के दुरौंदा से गठबंधन समर्थित माले प्रत्याशी अमरनाथ यादव

कयामुद्दीन अंसारी

हालाँकि आरा सीट माले के खाते में जा चुकी है पर महागठबंधन में आरा सीट को लेकर अभी भी घमासान चल रहा है। आरा के विधायक राजद के डॉ अनवर आलम का टिकट कटने से नाराज चल रहे हैं। फ़िलहाल वे बीमार हो गए हैं और हास्पिटल में भर्ती हैं। पिछले चुनाव में वे एक हजार से भी कम वोट से विजयी हुए थे। महागठबंधन के सामने यह चुनौती होगी कि वह किस तरह डॉ अनवर आलम को समझा पाता है। हालाँकि आरा शहरी क्षेत्र में जनता का रूख वर्तमान विधायक अनवर आलम के खिलाफ है। यहाँ से से इंसाफ मंच के राज्य सचिव कयामुद्दीन अंसारी को माले ने उतारा है।

आरा से महागठबंधन समर्थित माले प्रत्याशी कयामुद्दीन अंसारी

अरुण सिंह

काराकाट विधानसभा की बात करें तो यहाँ भी राजद के वर्तमान विधायक संजय यादव सीट के प्रबल दावेदार थे, लेकिन यह सीट माले के खाते में जाने से उनका टिकट कट गया। उनके समर्थकों में मायूसी है और संजय यादव फ़िलहाल चुप्पी साध रखे हैं। इस सीट पर भी महागठबंधन को एकता बनाए रखने के लिए मैराथन प्रयास करने होंगे। यहाँ से माले की तरफ से पूर्व विधायक व अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरूण सिंह गठबंधन के उम्मीदवार है।

पूर्व विधायक व काराकाट से माले प्रत्याशी अरुण सिंह

महानंद प्रसाद

अरवल विधानसभा की बात करें तो जहानाबाद-अरवल के लोकप्रिय जननेता महानंद प्रसाद को माले ने यहाँ से उम्मीदवार बनाया है। यह सीट भी राजद की सिटिंग सीट थी। छोटे किसान परिवार से आने वाले महानंद प्रसाद 90 के दशक में छात्र संगठन आइसा और जन संस्कृति मंच में सक्रिय थे। इसके बाद वो जहानाबाद में भाकपा माले का काम करने लगे। वो 97 से माले राज्य कमेटी के सदस्य हैं और जबसे अरवल जिला बना है तब से वो वहां के माले सचिव हैं। महानंद प्रसाद जन आंदोलनों के लोकप्रिय नेता हैं।

अरवल विधानसभा से गठबंधन समर्थित माले प्रत्याशी महानंद प्रसाद

गोपाल रविदास

फुलवारी शरीफ (सु.) सीट की कहानी बहुत ही रोचक है। पिछली बार इस सीट पर जदयू से श्याम रजक जीते थे, मंत्री भी बने, लेकिन अभी तीन महीने पहले ही वे जदयू छोडकर राजद में शामिल हुए थे। यहाँ से इनको टिकट न मिलने पर काफी उहाफोह की स्थिति बनी हुई है। यहाँ से खेग्रामस के बिहार राज्य सचिव गोपाल रविदास को माले ने अपना प्रत्याशी बनाया है। गोपाल रविदास भाकपा-माले की केंद्रीय कमेटी के सदस्य भी हैं। अगर सबकुछ ठीक रहा तो इस सीट पर भी मुकाबला कड़ा होगा।

फुलवारी शरीफ (सु.) सीट से माले प्रत्याशी गोपाल रविदास

रामबलि सिंह यादव

जहानाबाद जिला की घोषी सीट जदयू की सिटिंग सीट है यहाँ से ऐक्टू के राज्य उपाध्यक्ष रामबलि सिंह यादव प्रत्याशी बनाए गए हैं। यह सीट ग्रामीण मतदाताओं की सीट मानी जाती है इसलिए यहाँ माले की स्थिति मजबूत है। छोटे किसान परिवार में जन्मे रामबलि यादव मगध विश्वविद्यालय से एमए किया है। वो 1995 में भाकपा माले में शामिल हुए। उन्होंने कई जिलों में किसान, खेत मजदूर और स्कीम वर्कर के आंदोलनों को चेहरा रहे हैं। रामबलि सिंह यादव भाकपा माले राज्य कमेटी के सदस्य हैं।

घोषी से गठबंधन समर्थित माले प्रत्याशी राजबली यादव

वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता

पश्चिम चंपारण के सिकटा विधानसभा से खेग्रामस के बिहार राज्य अध्यक्ष वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता माले के प्रत्याशी हैं। यह सीट वर्तमान में जदयू के पास है। वीरेंद्र गुप्ता भाकपा माले की केंद्रीय कमेटी के सदस्य हैं। 80 के दशक से ही पार्टी से जुड़ गए थे। वो पश्चिमी चंपारण में लगातार राजघरानों और सामंती ताकतों से टकराते रहे हैं। कई बार उन पर सामंतों ने हमले किये हैं। आंदोलन के चलते कई झूठे मुकदमे झेल रहे वीरेंद्र गुप्ता कई बार जेल जा चुके हैं।

पश्चिम चंपारण के सिकटा माले प्रत्याशी वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता

जितेंद्र पासवान

भोरे (सु.) सीट से माले के जितेन्द्र पासवान चुनाव लड़ेंगे। भोरे (सु) सीट से कांग्रेस विधायक अनिल कुमार बेटिकट हो गये हैं, जिसकी वजह से गठबंधन में हलचल मची हुई है। जितेंद्र पासवान लोकप्रिय युवा नेता है। इस समय वे इंकलाबी नौजवान सभा के बैनर तले युवाओं को संगठित कर रहे हैं। आंदोलनों के चलते कई बार जेल जा चुके हैं और कई झूठे मुकदमे भी झेल रहे हैं। जितेंद्र भोरे में काफी लोकप्रिय हैं।

भोरे सीट से गठबंधन समर्थित माले प्रत्याशी जितेन्द्र पासवान

रंजीत राम

समस्तीपुर के कल्याणपुर (सु.) से माले ने युवा चेहरा रंजीत राम को उतारा है। पिछली बार यह सीट जदयू ने जीत ली थी। इस बार अभी तक स्थिति साफ़ नहीं है। रंजीत राम छात्र संगठन आइसा से जुड़कर राजनीति में दाखिल हुए हैं। 16 अगस्त 2003 में दरभंगा में उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी  को कला झंडा दिखाया था जिसके बाद उन पर देशद्रोह का मुकदमा भी दायर हुआ था। हलांकि लोगों के विरोध के चलते उन पर लगाया गया देशद्रोह का मुकदमा सरकार को वापस लेना पड़ा था। रंजीत इस समय इंकलाबी नौजवान सभा और खेत मजदूरों के आंदोलन से जुड़े हैं और अपने इलाके में काफी लोकप्रिय हैं।

कल्याणपुर से भाकपा माले प्रत्याशी रंजीत राम

फूलबाबू सिंह

वारिसनगर से भाकपा माले ने फूलबाबू सिंह को उम्मीदवार बनाया है। लगातार दो बार से जदयू के कब्जे में रहने वाली इस सीट पर एनडीए की किले बंदी  को भेद पाने की चुनौती होगी। लोजपा के अलग लड़ने से सीट को लेकर महागठबंधन आशान्वित हो सकता है। फूलबाबू भाकपा माले के युवा नेता हैं। छात्र संगठन आइसा से राजनीति शुरू करने वाले फूलबाबू फिलहाल इंकलाबी नौजवान सभा के बैनर तले युवाओं को संगठित कर रहे हैं।

वारिसनगर से भाकपा माले प्रत्याशी फूलबाबू सिंह

लेखक सुनील यादव, राजनीतिक टिप्पणीकार हैं।


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