22 को संसद पर प्रदर्शन, हर संगठन से पाँच किसान होंगे शामिल

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संयुक्त किसान मोर्चा ने 22 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान विरोध प्रदर्शन करने की योजना की घोषणा पहले ही कर दी थी, जिसकी पुष्टि आज मोर्चा के पंजाब संगठनों के घटकों ने भी की। किसानों के अधिकारों के लिए संसद में आवाज उठाने के लिए, संयुक्त किसान मोर्चा 17 जुलाई तक विपक्षी दलों को चेतावनी पत्र भेजेगा। फिर, 22 जुलाई से लेकर सत्र के अंत तक, संसद के मानसून सत्र के दौरान, प्रत्येक किसान संगठन के पांच सदस्य, कुल मिलाकर कम से कम 200 किसान, संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

भाजपा नेताओं के खिलाफ पूरे पंजाब में विरोध प्रदर्शन जारी है। बरनाला जिले के धनोला में आज भाजपा नेता हरजीत गरेवाल के खिलाफ रैली का आयोजन किया गया। धनोला की दाना मंडी में इकट्ठा होने के बाद, प्रदर्शनकारी काले कृषि कानूनों को निरस्त करने और एमएसपी की गारंटी के कानून को लागू करने के नारे लगाते हुए धनोला बाजार पहुंचे। हजारों प्रदर्शनकारियों ने शहर भर में विरोध मार्च निकाला। किसानों को गुंडा कहने और उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने के खिलाफ किसान नेताओं ने भाजपा के हरजीत ग्रेवाल की कड़ी आलोचना की और कहा कि जनता के गुस्से में कट्टरपंथियों के अहंकार को तोड़ने की ताकत है। संयुक्त किसान मोर्चा किसानों के खिलाफ मोदी सरकार की हर साजिश का करारा जवाब देगा। तीनों किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने और एमएसपी की गारंटी के कानून लागू करने के बाद ही किसानों का विरोध खत्म होगा। किसान नेताओं ने कहा कि कांके कलां गांव के 45 वर्षीय सोहन सिंह, जो सिंघू बार्डर पर शहीद हो गए थे और जिनके के परिवार को औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद सरकारी मुआवजा चेक नहीं मिला है, के लिए कल जीटी रोड जाम कर दिया जाएगा।

पंजाब के किसान संगठनों ने टोल प्लाजा, रिलायंस पंप, कॉरपोरेट मॉल, रेलवे पार्क, अदानी के ड्राई पोर्ट, और भाजपा नेताओं के घरों सहित 108 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दिल्ली सीमा पर शहीद हुए किसानों और मजदूरों के लिए मोदी सरकार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि, व्यापारियों के स्टॉक को सीमित करने की मोदी सरकार की घोषणा किसानों के संघर्ष की जीत है। क्योंकि एक प्रभावी आवश्यक वस्तु अधिनियम की आवश्यकता को स्वीकार किया गया है और मोदी शासन द्वारा इसे कमजोर करने का प्रयास गलत और लोक-विरोधी साबित हुए हैं।

पंजाब के किसान संगठनों ने बताया की कि किसानों का काफिला जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं, पंजाब से दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं। लुधियाना, संगरूर, मानसा, बठिंडा, बरनाला, रोपड़, फाजिल्का और फरीदकोट सहित विभिन्न जिलों से दर्जनों किसानों का काफिला सिंघू और टिकरी बॉर्डर के लिए रवाना हो चुका है।

हरियाणा के सिरसा में विरोध प्रदर्शन के लिए हिरासत में लिए गए किसानों को, किसानों के अथक विरोध और नाकेबंदी के कारण रिहा कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन की मनमानी विफल साबित हुई है और पुलिस यह समझ गई है कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे किसानों को गिरफ्तार करने से किसानों का संकल्प नहीं टूटेगा।

जारीकर्ता – बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चारुनी, हन्नान मोल्ला, जगजीत सिंह दल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहन, शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव

संयुक्त किसान मोर्चा
9417269294, samyuktkisanmorcha@gmail.com

संयुक्त किसान मोर्चा प्रेस विज्ञप्ति
228वां दिन, 12 जुलाई 2021


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