लखनऊ रैली, संसद तक ट्रैक्टर मार्च समेत सभी कार्यक्रम निर्धारित तिथि पर ही होंगे! जानिए अब सरकार से क्या चाहते हैं किसान…

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कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा किसानों का प्रदर्शन अभी चलता रहेगा। यह बात प्रधानमंत्री के एलान के बाद ही किसान संगठनों ने स्पष्ट कर दी थी। लेकिन अब सवाल यह था कि आंदोलन को एक साल पूरा होने को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से होने वाली रैलियां मार्च होंगे या रद्द कर दिए जाएंगे? इसका जवाब संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. दर्शन पाल ने कोर कमेटी की बैठक के बाद दिया है। उन्होंने कहा है कि पहले से जिन रैलियों और मार्च के आयोजन की तिथि निश्चित है वह अब भी वैसे ही आयोजित होंगे। उन्होंने कहा कि हमारा आंदोलन सिर्फ कृषि कानून के नाम पर ही नहीं बल्कि एमएसपी के लिए अलग बनाने के साथ और भी मांगों पर हैं।

कार्यक्रम पहले की तरह ही होंगे…

दर्शन पाल ने बताया कि शनिवार को कोर कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया है कि शीतकालीन सत्र के दौरान संसद तक ट्रैक्टर मार्च करने का निर्णय यथावत रहेगा। हालांकि, आंदोलन की आगे की रणनीति क्या होगी, इस पर रविवार को बैठक होगी। उन्होंने बताया कि हमारे 22, 26 और 29 नवंबर को होने वाले कार्यक्रम पहले की तरह ही होंगे।

  •  22 नवंबर को लखनऊ रैली होगी।
  • 26 नवंबर को जब आंदोलन का एक साल हो जाएगा तो इसे पूरे देश में मनाया जाएगा।
  • 29 नवंबर को संसद तक ट्रैक्टर मार्च होगा।

अब क्या चाहते है किसान…

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि वे तब तक इंतजार करेंगे जब तक संसदीय प्रणाली के साथ प्रधानमंत्री कानून वापसी न कर लें। साथ ही एमएसपी कानून और विद्युत विधेयक की वापसी के लिए आंदोलन जारी रहेगा। मोर्चे के नेता डॉ. पाल ने कहा, हमारा मुद्दा कृषि कानूनों के अलावा विशेष रूप से एमएसपी के लिए अलग कानून बनाने का है। उन्होंने कहा कि किसानों के खिलाफ सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। विद्युत विधेयक 2020 को वापस लें, वायु गुणवत्ता अध्यादेश लाएं और आंदोलन के दौरान शहीद हुए हमारे साथियों के लिए एक स्मारक बनाने के लिए जगह दें। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए एक बैठक बुलाएगी हमे उम्मीद है।


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