कटाई के बाद बॉर्डर पर लौटने लगे किसान, SKM ने मज़दूरों के पलायन पर चिंता जतायी

मीडिया विजिल
आंदोलन Published On :


सयुंक्त किसान मोर्चा प्रेस नोट

 

आज किसान संत धन्ना भगत जी की जयंती टीकरी बॉर्डर धरने पर मनायी गई। धन्ना भगत जी के मूल गाँव से मिट्टी लायी गयी व उनकी याद में आज कार्यक्रम हुए। धन्ना भगत न सिर्फ किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है, उन्होंने अन्य सामाजिक मुद्दों जैसे शिक्षा, दहेज प्रथा, लैंगिक समानता व अन्य मुद्दों पर जागरूकता भी फैलाई।

इस सत्र में, जब से गेहूं की खरीद शुरू हुई है, केंद्र सरकार द्वारा लगातार नव उदारवादी नीतियों को थोपने का प्रयास किया जा रहा है। पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के कई हिस्सों में बाजार में समय से बारदाना (बड़े बैग) नहीं पहुँच रहे है जिससे कई दिन तक किसान को मंडी में रहना पड़ रहा है व हतोत्साहित होकर निजी व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है। सरकार खुद मंडी व्यवस्था को कमज़ोर कर रही है व फिर इनके खराब होने का हवाला देकर खत्म करने के दावे करती है। जबर्दस्ती सीधी अदायगी व भूमि रिकॉर्ड मांगना भी इसी दिशा में कदम है जिनका किसान डटकर विरोध करेंगे।

सयुंक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों मजदूरों का वापस दिल्ली आना प्रारंभ हो गया है। आज टीकरी बॉर्डर पर किसानों ने भारी संख्या में हाज़री लगायी। सिंघू मोर्चे पर भी वे किसान पहुचने लग गए है जिनकी फसल की कटाई व बिकाई हो गई है।

कोरोना महामारी व इसके प्रभाव में लगाये जा रहे लोकडाउन से सयुंक्त किसान मोर्चा चिंतित है। सामान्य जनतक सुविधाओं को तो नुकसान हो ही रहा है, यह लोकडाउन किसानों के लिए भी इस समय बहुत नुकसान दायक है। इस समय फसलों की कटाई हो रही है। इस प्रक्रिया में लगें अनेक वाहन व यंत्र कभी खराब हो रहे है। उन वर्कशॉप व उपकरण की दुकानों तक भी किसान की पहुँच न होना निश्चित तौर पर किसान की फसल व भविष्य का नुकसान है।

दिल्ली के आसपास प्रवासी मजदूरों के वापस घर जाने को लगी होड़ पर सयुंक्त किसान मोर्चा गहरी चिंता व्यक्त करता है। किसान पनेताओ ने प्रवासी मजदूरों से अपील की है कि वे अपने जीवन को खतरे में न डाले व जब तक किसानो का धरना चल रहा है, तब तक प्रवासी मजदुर भी यहां शामिल हो सकते है। किसान व अन्य सामाजिक कल्याण के संगठन यहां पर सभी प्रवासी मजदूरों के रहने व खाने का इंतज़ाम कर रहे है। किसान नेताओ ने सांझा संघर्ष लड़ने की भी अपील की।

आज गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसान संगठनों ने खाने के पैकेट तैयार किये जो दिल्ली के विभिन्न बस अड्डो व रेलवे स्टेशनों पर बांटे जाएंगे जहां प्रवासी मजदूर जान जोखिम में डाल कर अपने घर जा रहे है। हज़ारो की संख्या में ये पैकेट आंनद विहार बस स्टैंड पर आज बांटे गए।

‘आन्दोलनों के दौरान हुए सम्पत्ति के नुकसान की वसूली विधेयक, हरियाणा’ को रद्द करने के की मांग के साथ भारत के राष्ट्रपति के नाम किसान संगठनों द्वारा सोनीपत व अन्य जगहों पर आज साझा ज्ञापन दिया गया और विरोध प्रदर्शन किया गया।

सयुंक्त किसान मोर्चा, एक जन अधिकार संगठन के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रहा है जो सयुंक्त राष्ट्र में किसानों के अधिकारों की घोषणा से संबंधित है। भारत सरकार ने इन घोषणाओं पर हस्ताक्षर किए हुए है व पिछले साल लाये गए तीन कानून इन घोषणाओं की उल्लंघन करते है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को इस लिंक से देखा जा सकता है

 

https://zoom.us/j/98695709979?pwd=Zm80OGs1SGt3M3RlcDZwb25jWVYwZz09

 

– डॉ दर्शन पाल
सयुंक्त किसान मोर्चा

(145 वां दिन, 20 अप्रैल 2021)


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