‘आज़ादी के अमृत महोत्सव’ से ब्राह्मणवाद के ख़िलाफ़ लड़ने वाले ‘अस्पृश्य नायक’ गायब?

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भाकपा-माले के बिहार राज्य सचिव काॅ. कुणाल ने ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के तहत पटना के प्रतिष्ठित एएनसिन्हा इंस्टीच्यूट में आगामी 14 मई को ‘First Untouchable Revolutionary Hero Who Challenged Brahminical Order in Ancient India‘ विषय पर आयोजित सेमिनार को एकबारगी रद्द कर दिए जाने की घटना को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताते हुए गहरी चिंता प्रकट की है। कहा कि यह राज्य में भाजपाकरण की बढ़ती मुहिम का एक और उदाहरण है। दिलचस्प बात ये है कि ये कार्यक्रम, उस जातिवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के इतिहास को लेकर था – जिसके अगुआ डॉ. आंबेडकर को केंद्र सरकार और राज्य सरकार अपना आदर्श बताते नहीं थकती। ये ही नहीं, ये प्रधानमंत्री के ड्रीम ईवेंट ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ के तहत होना था।
इस कार्यक्रम में प्रख्यात इतिहासकार ओपी जायसवाल सहित बिहार के कई गणमान्य बु़द्धिजीवियों को शामिल होना था। लेकिन बिहार सरकार की ओर से यह कहकर कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया कि ऐसे विषय से सामाजिक माहौल खराब होने की संभावना है।

रद्द कर दिए गए कार्यक्रम का आधिकारिक आमंत्रण

माले राज्य सचिव ने कहा कि आज एक तरफ भाजपा ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ की आड़ में पूरे इतिहास का मिथ्याकरण कर रही है, आरएसएस के लोगों को जबरदस्ती स्वतंत्रता सेनानी बताया जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर ब्राह्मणवादी व्यवस्था को चुनौती देने वाले अंटचेबल नायकों पर आयोजित सेमिनार को सामाजिक माहौल खराब करने वाला बता रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा देश में ब्राह्मणवादी व्यवस्था को बनाए रखना और इस व्यवस्था को बनाए रखने वाले लोगों को ही महज स्थापित करना चाहती है। उसका दलित विरोधी चेहरा एक बार फिर से बेनकाब हुआ है।
माले राज्य सचिव कुणाल ने इस घटना पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश से पूछा, “आखिर वे कब तक भाजपा के आगे सरेंडर करते रहेंगे। सरकार के मुखिया नीतीश कुमार हैं, लेकिन आज राज्य में पूरा प्रोजेक्ट भाजपा का चल रहा है. नीतीश कुमार सामाजिक न्याय व धर्मनिरपेक्षता का नाम लेते नहीं अघाते, लेकिन आज उनके शासन में एक ऐसे सेमिनार को रद्द किया जा रहा है जिसमें ब्राह्मणवादी व्यवस्थ्या को चुनौती देने वाले पहले अछूत नायकों की चर्चा की जानी थी। हम उनसे पूछना चाहते हैं कि इससे कौन सा सामाजिक माहौल बिगड़ने वाला था? यह अकादमिक जगत की स्वायत्तता पर हमला नहीं है?”

ए एन सिन्हा संस्थान, पटना – फाइल चित्र

भाकपा माले की ओर से कॉ. कुणाल ने कहा, “मुख्यमंत्री से हमारी मांग है कि वे इस विषय पर अपने स्तर से संझान लें। उन अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करें जो अकादमिक स्वायत्तता को नष्ट कर रहे हैं। भाजपाई एजेंडों के सामने आत्मसमर्पण करना बंद करें। अकादमिक जगत का भाजपाकरण बिहार की जनता कभी मंजूर नहीं करेगी।

(भाकपा-माले, बिहार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित ख़बर)


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