AIKSCC ने मेधा पाटकर के नेतृत्व में बनायी महिला सुरक्षा समिति, बॉर्डर पर बढ़े किसान

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अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति, एआईकेएससीसी

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति, एआईकेएससीसी, की राष्ट्रीय वर्किंग ग्रुप ने टिकरी बार्डर की घटना, जो एक युवा कार्यकर्ती के साथ हुए यौन उत्पीड़न, उसकी बीमारी तथा मृत्यु से संबंधित थी, व उससे जुड़े अन्य बिन्दुओं गहराई से चर्चा की। एआईकेएससीसी ने इस सारी घटना की निन्दा की और कहा है कि वह सभी महिला कार्यकर्ताओं व आंदोलन में भागीदारों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह से गम्भीर व समर्पित है और वह यौन उत्पीड़न के प्रश्न पर कोई लापरवाही नहीं होने देगा।

एआईकेएससीसी ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया है कि इस मामले में एक एफआईआर दाखिल की जा चुकी है। लड़की के दुख से ग्रसित पिता ने इस शिकायत में कहा है कि उनकी बेटी के साथ बलात्कार करने के अलावा, उसको जबरदस्ती बन्धक बनाया गया, उसका अपहरण किया गया, उसे दबाया गया, उसको धमकियां दी गयीं और उसे ब्लेकमेल किया गया। एआईकेएससीसी मांग करती हे कि एफआईआर के आधार पर, संबंधित अधिकारी द्वारा उसके सारे पहलुओं की जांच करके और दोषी व्यक्तियों को सख्त सजा दे।

एआईकेएससीसी ने एक महिला सुरक्षा समिति का गठन किया है जो यौन उत्पीड़न से संबंधित सभी मामलों की जांच करेगी और वर्तमान किसान आंदोलन समेत, उसके सभी काम काज में तथा सभाओं में महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मामलों की देख रेख करेगी। ये टिकरी के मामले के सभी पहलुओं पर भी जांच करेगी। समिति इसके अतिरिक्त ऐसे कदम उठाएगी जिससे आगे चलकर ऐसी घटनाएं नही हों और धरनास्थलों पर महिला भागीदारों की सुरक्षा, हिफाजत तथा सम्मान सुनिश्चित किया जा सके। समिति की सभी संस्तुतियों केा तुरन्त अमल किया जाएगा। समिकत संयुक्त किसान मार्चाे द्वारा ऐसे किसी मंच के गठन की स्थिति में यह कमेटी उसके साथ मिलकर काम करेगी।

इस महिला सुरक्षा समिति के सदस्य हैं:

1. मेधा पाटकर, अध्यक्ष
2. प्रतिभा शिन्दे
3. वृंदा  करात
4. अमरजीत कौर
5. कविता कृष्णन
6. ऋतु कौशिक
7. पूनम कौशिक
8. ऐनी राजा

एआईकेएससीसी की समझ से संयुक्त किसान मोर्चा को इस मामले से जुड़े सभी मामलों की पूरी जांच कराने के पूरे प्रयास करने चाहिये। एआईकेएससीसी खुद ऐसे कदम उठाएगी जिससे भाग ले रहे लोगों, विशेषकर महिलाओं के कोविड समेत सभी स्वास्थ्य संबंधित मामलों का उपचार किया जा सके।

दिल्ली के किसान आंदोलन पर पिछले छः महीनों से लोखों महिलाएं भाग ले रही हैं। उन्होंने एक बहादुराना भूमिका इस आंदोलन में निभाई है और वे इन 3 कानूनों की वापसी कराने में और सभी फसलों की एमएसपी की कानून गारंटी दिलाने में सबसे महत्वपूर्ण स्थम्भ साबित होंगी। उन्होंने दमन का सामना किया है, मीडिया में दुष्प्रचार का सामना किया है, पितृसत्तात्मक बाधाओं को पार किया है ताकि आंदोलन में वे अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें। एआईकेएससीसी के लिए इस वर्तमान मामले म सम्पूर्ण व त्वरित न्याय मिलना, ऐसी व्यवस्था का होना ताकि ऐसा दुबारा नही हो, सबसे महत्वपूर्ण बात है।

एआईकेएससीसी विनम्रता के साथ कहन चाहता है कि महिलाओं के साथ दुराचार और यौन हिंसा के मामले हमारे समाज का हिस्सा हैं और वे हमारे आंदोलन में भी प्रवेश कर सकते हैं। अतः एआईकेएससीसी अपने को यौन उत्पीड़़न व भेदभाव के विरुद्ध संवेदना पैदा करने के काम के लिए और संगठन तथा आंदोलन के भीतर यौन उत्पीड़न समाप्त करने के लिए समर्पित करती है। महिलाओं को किसान आंदोलन में भारी संख्या में भाग लेने और उसका नेतृत्व करने में सुवधा दी जानी चाहिये और एआईकेएससीसी इसके लिए समर्पित है।

एआईकेएससीसी उन सभी ताकतों के षडयंत्रों के प्रति सजग रहेगी जो इस घटना का लाभ उठाकर किसान आंदोलन, एआईकेएससीसी तथा एसकेएम को बदनाम करने की कोशिश कर सकते हैं।

एआईकेएससीसी एक युवा महिला यो़द्धा, जो आंदोलन के प्रति प्रतिबद्ध थी, भावुक थी, जोश के साथ काम कर रहीं थी, जिसने इतना अन्याया व परेशानियों का सामना किया, के इस तरह से चले जाने से बेहद दुखी है और उसके प्रति अपनी भाव भीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती है। हम उसके परिवार के साथ हमेशा खड़े रहेंगे।

एआईकेएससीसी हरियाणा सरकार से अनुरोध करती है कि वह त्वरित गति से इस मामले की जांच कराए और केस चलाकर न्याय दिलाए।

 

जारीकर्ता: अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की राष्ट्रीय वर्किंग ग्रुप द्वारा जारी।

सयुंक्त किसान मोर्चा प्रेस नोट

 

गाजीपुर बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा ने 1857 के शहीदों को याद करते हुए शहीद मंगल पाण्डेय के तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। आज के हालात से इसकी तुलना करते हुए वक्ताओं ने बताया कि जो तीन कानून सरकार लाई है और जो एमएसपी की गारंटी सरकार नहीं देना चाहती, इससे पूरी खेती बर्बाद हो जाएगी और बड़े कारपोरेट तथा विदेशी कंपनियों के हाथों में चली जाएगी। आज बड़ी कंपनियों के माल की बिक्री और छोटे व्यापारियों व कारीगरों के काम पर कॉरपोरेट का हमला भी व्यापारियों की बर्बादी का बड़ा कारण बन रहा है। इसीलिए अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति का हमारे आंदोलन के लिए एक विशेष महत्व है. वक्ताओं में गाजीपुर बॉर्डर के नेता डॉ आशीष मित्तल, डीपी सिंह, धर्मपाल सिंह, बलजिंदर सिंह मान, बिंदु आमिनी, महादेव चतुर्वेदी, आदि शामिल थे। संचालन ओमपाल मलिक ने किया।

किसान आंदोलन को चंद दिन का चंद लोगों का आंदोलन कहकर बदनाम करने वालो पर किसानों ने करारा जवाब दिया है। आज फिर से सेंकडो की संख्या में वाहन दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचे। अलग अलग किसान संगठनो ने किसान एकता का परिचय देते हुए ; किसान मजदूर एकता ज़िंदाबाद की गूंज में सिंघु व टिकरी बॉर्डर पर प्रवेश किया।

भाजपा, केंद्र सरकार व हरियाणा सरकार किसानों की मांगो को मानने की बजाय उन्हें बदनाम ही करती रही हैं। इसका खामियाजा भाजपा को राज्यो के चुनावों में भुगतना पड़ा है। यहां तक कि भाजपा के खुद के नेता व कार्यकर्ता नए कृषि कानूनो व किसान आंदोलन पर सरकार के रवैये से नाखुश पर फिर भी कॉरपोरेट के दबाव में मोदी सरकार किसानों की मांगे नहीं मान रही।

किसान नेताओं का कहना है कि सरकार चाहे जितनी ही बेरहम क्यों न हो जाये, किसान अपना आंदोलन केवल मांगे पूरी होने पर ही खत्म करेंगे। किसान पहले से भी बहुत पीड़ित है, नए कृषि कानून किसान का ओर भी शोषण करेंगे। कोरोना महामारी में करोड़ो की संख्या में गरीब लोग भुखमरी में समय बिता रहे है। अगर PDS जन वितरण प्रणाली बंद होगी तो देश की गरीब जनता निश्चित तौर पर भुखमरी से मरेगी। इस आंदोलन के माध्यम से किसानों ने देश को यह बात समझायी है व देश के नागरिक अब पूरी ताकत से लड़ेंगे। यही कारण है कि महामारी के समय मे भी आज दिल्ली के आस पास लगे धरनों में इतनी बड़ी संख्या में किसान मौजूद है।

ऐसे समय मे जब हमारी सरकारें हमें स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं देने में पूरी तरह से फेल साबित हो चुकी है, लोग ही एक दूसरे की मदद करने में जुटे है। किसानों के धरनों में किसी भी तरह की मेडिकल जरूरत होने की दशा में पहले से ही कई हॉस्पिटल व डॉक्टर्स किसानों की सेवा में पहले दिन से हाज़िर है। सयुंक्त किसान मोर्चा सभी मेडिकल स्टाफ का हार्दिक धन्यवाद करता है। किसान मजदूर एकता हॉस्पिटल में सयुंक्त किसान मोर्चा ने लोगों से सहयोग से ऑक्सिजन कंसन्ट्रेटर व अन्य जरूरी सामान मुहैया करवाया है। किसानों की सेहत का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। हालांकि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रदान में असफल है व साथ ही किसानों को 5 महीनों से मजबूरन दिल्ली की सीमाओं पर बैठा कर रखा है। सरकार किसानों की मांगें तुरंत माने, इसी में सरकार व किसान दोनों की भलाई है।

जारीकर्ता – अभिमन्यु कोहाड़, बलवीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हनन मौला, जगजीत सिंह डल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उग्राहां, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव

 

सयुंक्त किसान मोर्चा
9417269294
samyuktkisanmorcha@gmail.com

(167 वां दिन, 12 मई 2021)

 

 


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