Home अख़बार अख़बारनामा: पीजी लड़कियों की जासूसी की ख़बरों को अहमियत क्यों नहीं ?

अख़बारनामा: पीजी लड़कियों की जासूसी की ख़बरों को अहमियत क्यों नहीं ?

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संजय कुमार सिंह

आज एक ऐसी खबर जो अखबारों में उतनी प्रमुखता से नहीं है जितनी प्रमुखता से होनी चाहिए। यह खबर आपके जानने लायक है पर गोदी मीडिया ना सिर्फ राजनीतिक खबरों में खेल करता है बल्कि जरूरी खबरें देने की जिम्मेदारी भी नहीं निभाता। दूसरी ओर, आप समझते हैं कि अखबार पढ़ लिया तो सब जान गए। आज के टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने पर एक खबर है जो तकनीकी रूप से संभव है ये तो सब को पता है पर कोई ऐसा करेगा इसकी कल्पना इस खबर को पढ़ने से पहले मैंने नहीं की थी। आज जब इस खबर को मैंने गूगल किया तो यह टाइम्स समूह के ही नवभारत टाइम्स और इंडिया टाइम्स में तो मिली पर और कहीं नहीं है। दिलचस्प यह है कि ऐसी ही एक खबर बीबीसी ने इसी महीने चेन्नई से की थी। इसका मतलब यह है कि ऐसा और भी जगह हो रहा है। अगर हम सतर्क हो जाएं तो अपराधी ऐसा करना छोड़ देंगे या पकड़े जाएंगे।

अनुवाद के बचने के लिए मैं नेट पर उपलब्ध हिन्दी की खबर का संपादित रूप पेश कर रहा हूं। नवभारत टाइम्स में आज पहले पेज पर खूब विज्ञापन है और खबरें हैं उसमें टाइम्स ऑफ इंडिया की यह खबर नहीं है। इसे पढ़िए और सतर्क रहिए। बेटियों को बताइए, बेटे यह सब नहीं करें यह भी सुनिश्चित कीजिए। ऐसा अपराधियों से बचना आसान नहीं है। पर सतर्क रहकर आप भी अपने बेटे को ऐसा कुछ करने से रोक सकते हैं और बाद की मुश्किलों से बच सकते हैं। इसलिए भी, यह जिम्मेदारी आप की ही है। खबर यह है कि एक व्यक्ति ने पेइंग गेस्‍ट (पीजी) लड़कियों के कमरे में खुफिया कैमरा लगा रखा था। पकड़ा गया। मामला जमानती है इसलिए उसे जमानत मिल गई। आरोपी ने कमरे में लगे इलेक्ट्रिक एडॉप्‍टर में कैमरा फिट कर रखा था। इसकी मदद से वह लड़कियों की गतिविधियों को रेकॉर्ड कर अपने मोबाइल फोन में देखता रहता था। वह उनकी बातचीत भी रिकॉर्ड करता था।

अगर आप मुंबई में या कहीं भी पेइंग गेस्‍ट के रूप में रहती हैं या आपकी बेटी रहती है तो सावधान हो जाइए। हो सकता है कि आपके कमरे में छुपा हुआ कैमरा लगा हो जो आपके क्रियाकलापों को रिकॉर्ड कर रहा हो। ऐसे कैमरे इलेक्ट्रिक प्‍लग, फैन रेग्‍युलेटर, मेज घड़ी, बल्‍ब और यहां तक कि मोबाइल चार्जर में भी छुपाकर लगाए जा सकते हैं। दक्षिणी मुंबई में ऐसा ही मामला सामने आया है जहां 47 साल का एक व्यक्ति जो अविवाहित है और अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहता है। अपने उसी घर में पेइंग गेस्‍ट के रूप में रहने वाली तीन लड़कियों की गतिविधियां खुफिया कैमरे में रिकार्ड करता था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है लेकिन अपराध जमानती है। और उसे 22 दिसंबर को जमानत मिल गई।

घटना 19 दिसंबर की है। डीबी मार्ग पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईटी ऐक्‍ट और महिला की निजता के हनन से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने उस खुफिया कैमरे को बरामद कर लिया है जिसे आरोपी ने अपने मोबाइल फोन से कनेक्‍ट किया हुआ था। आरोपी मकान मालिक चार कमरों के फ्लैट में अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहता है। उसकी शादी नहीं हुई है। एक कमरा उसने तीन लड़कियों को किराये पर रहने के लिए दिया हुआ था। एक दिन मकान मालिक से बातचीत के दौरान लड़कियों को शक हुआ कि वह उनकी उन बातों को हूबहू दोहरा रहा है जो उन लोगों ने कमरे में की थीं। कहीं ऐसा तो नहीं कि वह हमारी बातें रिकॉर्ड कर रहा हो। छानबीन के दौरान एक लड़की को कमरे में इलेक्ट्रिक अडॉप्‍टर लगा हुआ मिला। शंका जाहिर करते हुए उसने इसे कपड़े से ढंक दिया।

इसके तत्‍काल बाद आरोपी उनके कमरे में आया और इस बाबत सवाल करने लगा। उसने लड़कियों को बताया कि यह अडॉप्‍टर वास्‍तव में उसकी टीवी का एंटीना बूस्‍टर है। इस पर लड़कियों ने अडॉप्‍टर का फोटो खींच इंटरनेट पर इसके बारे में सर्च किया। पता चला कि यह ऑनलाइन बिकने वाला खुफिया कैमरा था। उन्‍होंने तत्‍काल इस बारे में पुलिस को सूचना दी और मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस जांच कर रही है कि आरोपी मकान मालिक ने इन लड़कियों के बनाए वीडियो किसी और के साथ तो नहीं शेयर किए हैं। बताया जा रहा है कि कैमरे के जो फुटेज मिले हैं वे करीब डेढ़ साल पुराने हैं। एक वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी का कहना है, ‘हम यह सुनिश्चित करेंगे कि लड़कियों की पहचान न उजागर हो।’

आइए, अब आपको चेन्नई की पुरानी खबर बताऊं। चेन्नई के एक मकान में किराए पर रही रही लड़कियों के कमरे में कैमरा होने की जानकारी इत्तेफ़ाक से सामने आई। असल में एक लड़की ने हेयरड्रायर इस्तेमाल करने के लिए प्लग सॉकेट में लगाया और प्लग टूट गया और उन्हें वहां पहले से छिपाकर लगाया गया कैमरा नज़र आ गया। बात किराए पर रहने वाली दूसरी लड़कियों तक भी पहुंची और मामले की रिपोर्ट पुलिस से की गई। पुलिस ने 45 साल के मकान मालिक संपत कुमार उर्फ़ संजय को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया। मामले की जाँच चल रही है।

संपत के अपार्टमेंट में कई कामकाजी महिलाएं रहती हैं. शिकायत पर पहुंची पुलिस ने घर की तलाशी ली तो उस परिसर में कुछ और ख़ुफिया कैमरे मिले। इस बारे में स्थानीय इंस्पेक्टर मुरली ने बताया, “एक लड़की ने हेयरड्रायर इस्तेमाल करने की कोशिश की। उसे लगाते वक्त प्लग टूट गया। इस तरह से उन्हें अंदर एक कैमरा मिला। इसके बाद जब उन्होंने दूसरा स्विच बॉक्स देखा वहां भी एक कैमरा था। तब उन्होंने हमें मदद के लिए बुलाया।” पुलिस ने उस घर से छह कैमरे बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, “ये विशालकाय घर बीते 15 दिन से ही इस्तेमाल किया जा रहा था। मकान मालिक ने बहुमंज़िला अपार्टमेंट के एक हिस्से को किराए पर दिया था।”

दोनों घटनाएं पुरानी हैं। मुझे नहीं पता ऐसा कोई मामला इससे पहले हुआ है कि नहीं है। अगर हुआ हो तो वह और नहीं तो यह या ऐसी किसी घटना की सूचना आपको है? आपके अखबार ने कभी आपको सतर्क किया? नहीं किया तो सोचिए कि क्यों नहीं? और उसपर आपको कितना भरोसा करना है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। जनसत्ता में रहते हुए लंबे समय तक सबकी ख़बर लेते रहे और सबको ख़बर देते रहे। )

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