क्या PM को अनसुना कर कोरोना के साये में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे योगी?

तेज बहादुर सिंह
ओप-एड Published On :


कोरोना वायरस के कारण पूरे विश्व में लॉकडाउन जैसी स्थिति है. लगभग सभी देश की सरकारों ने लोगों को अपने घरों में रहने की सलाह दी है. इसी क्रम में भारत में भी इस महामारी को फैलता देख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार रात 8 बजे देश को संबोधित किया. प्रधानमंत्री ने देश के लोगों से उनके अगले दो हफ्ते का समय मांगा है. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अपील करते हुए लोगों से कहा कि लोग ज्यादा से ज्यादा अपने घरों में रहें, बहुत जरूरी काम हो तभी घरों से बाहर निकलें. प्रधानमंत्री ने रविवार 22 मार्च को सुबह 7 बजे से लेकर रात 9 बजे तक ‘जनता कर्फ़्यू’ की बात भी की. उन्होंने कहा, “ये जनता का जनता के द्वारा खुद पर लगाया गया कर्फ़्यू होगा.” देश की राज्य सरकारों से भी उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री की ‘जनता कर्फ़्यू’ के अपील को अपने-अपने राज्यों में अमल में लाये.

इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ट्वीट कर कहा, “प्रधानमंत्री मोदी जी ने हम सब देशवासियों को 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात्रि 9 बजे तक ‘जनता कर्फ़्यू’ में सहयोग देने का आग्रह किया है. आइये, हम सब मिलकर इस आग्रह का सम्मान करते हुए पूरी निष्ठा व अनुशासन के साथ इसका पालन करें और कोरोना वायरस को मात दें.”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ट्वीट करते हुए शायद भूल गये कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में 25 मार्च से 2 अप्रैल तक रामनवमी के उपलक्ष्य में एक भव्य मेले का आयोजन किया जा रहा है. इसकी मंजूरी भी योगी सरकार ने ही दी है. वो भी तब जब अयोध्या के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सरकार से कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम को रद्द करने का अनुरोध किया था. मुख्य चिकित्सा अधिकारी घनश्याम सिंह ने मीडिया को बताया कि प्रशासन के पास इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जांच करने के लिए आवश्यक संसाधन भी नहीं हैं.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री 24 मार्च को अयोध्या पहुंचेंगे. उस दिन वे अयोध्या में किये जा रहे विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे. इसके बाद रात भर वे अयोध्या में ही रहेंगे. 25 मार्च को मुख्यमंत्री अस्थायी मंदिर में रामलला के विराजमान होने पर प्राण प्रतिष्ठा का पूजन करेंगे. इस अवसर पर अयोध्या के संत और केन्द्र सरकार द्वारा गठित अयोध्या ट्रस्ट के सभी प्रमुख पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे, हालांकि मुख्यमंत्री के अयोध्या जाने के इस कार्यक्रम का प्लान 22 या 23 मार्च को ही फाइनल होगा.

क्या दिशानिर्देशों को ताक पर रखकर करवाया जाएगा आयोजन?

जहां एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार ट्वीट कर खुद कहा है कि एक जगह पर बड़े समूह में एकत्र न हों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करें. साथ ही 2 अप्रैल तक सारे शिक्षण संस्थान और 31 मार्च तक सभी पर्यटन स्थल बंद रखने के निर्देश हैं. वहीं दूसरी ओर अयोध्या में इतने बड़े आयोजन की अनुमति कैसे दे दी गयी? ये बात समझ से परे है.

इस मेले में लाखों लोगों के आने की आशंका जतायी जा रही है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि मेले में आने वालों की स्वास्थ्य सुरक्षा का क्या? क्या योगी सरकार प्रधानमंत्री की बात को गंभीरता से ले रही है? एक ओर जहां उ.प्र. सरकार प्रदेश के स्कूलों और पर्यटन स्थलों को कर स्थल बंद करने के निर्देश दे चुकी है और लखनऊ के कुछ हिस्सों को भी आंशिक रूप में बंद करने का आदेश दे दिया गया है, ऐसे में योगी सरकार क्या इस कार्यक्रम को मंजूरी देकर खुद के निर्देशों का उल्लंघन नहीं कर रही है?

जहां एक ओर भारत सहित विश्व भर में कोरोना वायरस के कारण सभी बड़े कार्यक्रमों को रोक दिया गया है. कई शहरों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. ऐसे समय में एक धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अपील और खुद के दिशानिर्देशों को ताक पर रख कर योगी सरकार के लिए ऐसा आयोजन करवाना कितना ठीक होगा? उत्तर प्रदेश कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों के मामले में भारत में तीसरे स्थान पर है. अब तक प्रदेश में कुल 23 लोग इस वायरस से संक्रमित पाये जा चुके हैं. इस आयोजन से प्रदेश में यदि महामारी बढ़ गयी तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

इस समय में पूरा विश्व कोरोना वायरस से लड़ रहा है. चीन के वुहान शहर से शुरू हुए इस वायरस ने धीरे-धीरे पूरे विश्व को अपने चपेट में ले लिया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार कोरोना वायरस पर नजर बनाये हुए है. डब्लूएचओ के मुताबिक इस महामारी ने अब तक विश्व के 169 देशों को प्रभावित किया है. कुल 2,09,839 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं जबकि 8,778 लोगों की इस महामारी से मौत हो चुकी है. वहीं भारत में अब तक कोरोना वायरस के कुल 223 मामले सामने आ चुके हैं. इससे 5 लोगों की मौत भी हो चुकी है. मरने वाले लोग कर्नाटक, दिल्ली, महाराष्ट्र और पंजाब के थे.

इस बीच मुख्यमंत्री की ओर से आगामी 2 अप्रैल तक राज्य में सभी धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रम स्थगित करने की अपील की गयी है. इस अपील में रामनवमी आयोजन के बारे में कुछ नहीं कहा गया है.

 


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