पहला पन्ना: क्रिकेट अरीना हुआ नरेन्द्र मोदी स्टेडियम-और इंडियन एक्सप्रेस ने चार कॉलम में तान दिया!

संजय कुमार सिंह संजय कुमार सिंह
ओप-एड Published On :


आज के सभी अखबारों में कोरोना के टीके की खबर लीड है। टेलीग्राफ में यह खबर लीड नहीं है लेकिन पहले पन्ने पर है। द टेलीग्राफ की लीड का शीर्षक है, “इस मोदी को रिलायंस और अडानी से अलग नहीं किया जा सकता है”। यह सही है कि दूसरे अखबारों से ऐसे शीर्षक की उम्मीद नहीं रह गई है। लेकिन चुनाव से पहले जिस आदमी ने यह दावा किया कि उसका कोई नहीं है (शादी नहीं हुई है, परिवार नहीं है आदि आदि) इसलिए वह भ्रष्टाचार नहीं करेगा उसके बारे में तथ्य होने पर भी ऐसा शीर्षक क्यों नहीं लगना चाहिए? दिलचस्प यह है कि इंडियन एक्सप्रेस ने इस खबर को फोटो के साथ पहले पन्ने पर छापा है लेकिन उसका शीर्षक अलग ही कहानी बताता है। हिन्दुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है जबकि द हिन्दू में फोटो कैप्शन के साथ स्टेडियम का नाम बदलने की सूचना दी गई है। वैसे भी किसी स्टेडियम का नाम बदला जाना कितनी बड़ी खबर हो सकती है?

इंडियन एक्सप्रेस और द टेलीग्राफ ने इसे पहले पन्ने पर छापा है तो आइए, आपको बताऊं दोनों क्या जानकारी देते हैं। चार कॉलम की फोटो के साथ चार कॉलम में दो लाइन के शीर्षक के साथ छपी इंडियन एक्सप्रेस की खबर का शीर्षक है, “नए चेहरे के बाद दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट अरीना (स्टेडियम नहीं) को नया नाम मिला : नरेन्द्र मोदी स्टेडियम”। हमलोग जब अखबार बनाते थे तो शीर्षक लगाना मुश्किल काम हुआ करता था और खबर लिखने का जो तरीका हमें सिखाया गया था उसके अनुसार खबर की सारी खास बातें पहले पैरे में आ जाएं और शीर्षक में वही बात दोहराई नहीं जाए, बल्कि खबर का भाव उभर कर शीर्षक में आए। यह शीर्षक इस खबर का सबसे घटिया न भी कहूं तो सबसे आसान शीर्षक जरूर है। कल से हर जगह चर्चा इसी खबर की थी और अब इस शीर्षक के बाद इस खबर को पढ़ने की उत्सुकता किसे होगी? अगर इसे सरकारी खबर ही बनाना था तो बहुत आसान शीर्षक हो सकता था और कुछ नया भी लगता, “राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के नाम पर स्टेडियम का उद्घाटन किया”।

मेरे हिसाब से स्टेडियम का नाम बदलना – पहले पन्ने का शीर्षक तभी होता जब कहा जाता कि सरदार पटेल स्टेडियम (अरीना) का नाम नरेन्द्र मोदी स्टेडियम कर दिया गया। यह पहले पन्ने की खबर नहीं है इसका पता इस बात से भी लगता है कि किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है। द हिन्दू ने खाली दिख रहे स्टेडियम की जीवंत तस्वीर लगाई है। इसका कैप्शन है, नए सिरे से सजाए गए अहमदाबाद के सरदार पटेल स्टेडियम, जिसका नाम अब नरेन्द्र मोदी स्टेडियम है, में बुधवार को तीसरा भारत इंग्लैंड टेस्ट चल रहा है। दुनिया के इस सबसे बड़े क्रिकेट अरीना में एक लाख 10 हजार दर्शक बैठ सकते हैं..(खबर पेज 15 पर)। पेज 15 खेल की खबरों का पन्ना है। कहने की जरूरत नहीं है कि नाम बदलने के विवाद में नहीं जाना हो तो ‘खबर’ इतनी ही है।  इसीलिए मैंने अनुवाद करते समय वाक्य को आसान नहीं बनाया तोड़ा नहीं और क्रिकेट मैच से संबंधित हिस्से का अनुवाद नहीं किया है।

इंडियन एक्सप्रेस ने इस स्टेडियम की क्षमता एक लाख 30 हजार बताई है। पहले पन्ने की इस खबर में बताया गया है कि एक लाख 30 हजार सीट वाला यह अरीना नरेन्द्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम के नाम से जाना जाएगा और यह सरदार बल्लभ भाई पटेल स्पोर्ट्स एनक्लेव का भाग होगा। अखबार ने लिखा है कि भारी पुनर्विकास से पहले इसे मोटेरा स्टेडियम या सरदार पटेल स्टेडियम के नाम से जाना जाता था। अखबार ने लिखा है कि नए नाम का खुलासा तब हुआ जब  राष्ट्रपति कोविड ने डिजिटल नाम पट्टी का उद्घाटन किया। इसमें कहा गया था कि नरेन्द्र मोदी स्टेडियम का उद्घाटन हुआ है। इससे यह पता नहीं चलता है कि राष्ट्रपति को पता था कि नहीं?

अखबार ने आगे लिखा है, प्रधानमंत्री के नाम पर यह देश की पहली ऐसी सरकारी संरचना है। गुजरात सरकार ने बाद में इस बात की पुष्टि की कि स्टेडियम का नाम नरेन्द्र मोदी स्टेडियम होगा। अब इसकी क्या जरूरत थी यह मैं नहीं समझ पाया। अखबार ने जब पहले बताया है कि नाम एक तरह से राज था और उद्घाटन के बाद पता चला तो राज्य सरकार को बाद में पुष्टि करने की जरूरत क्यों पड़ी। और अगर राज्य सरकार को भी पहले से पता नहीं था या नाम बदलने की कोई औपचारिकता रह गई थी जो राज्य सरकार ने बाद में बताकर किया तो उसे वैसे ही लिखा जाना चाहिए। पूरी खबर लंबी है और मैं विस्तार में नहीं जाउंगा पर इसी बात को द टेलीग्राफ ने कैसे बताया है उसे समझ लीजिए तो आप जान जाएंगे कि इंडियन एक्सप्रेस जर्नलिज्म ऑफ करेज के नाम पर क्या कर रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर मैंने पूरी नहीं पढ़ी लेकिन जो लिखा है वह शुरू से है और भले ही खबर के शुरुआती अंश छोड़ दिया है पर जहां तक पढ़ा वहां तक की खबर में अखबार ने वह नहीं बताया है जो द टेलीग्राफ ने शीर्षक में बताया है।

बाईलाइन, डेटलाइन के बाद द टेलीग्राफ की खबर ऐसे शुरू होती है, पुनरुद्धार के लिए 2015 से बंद सरदार पटेल स्टेडियम, मोटेरा का उद्घाटन बुधवार को दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम के रूप में हुआ पर एक नए नाम, नरेन्द्र मोदी स्टेडियम के तहत। नाम बदलने की कार्रवाई गोपनीय रही और इसे इतनी अच्छी तरह छिपा कर रखा गया था कि समाचार एजेंसी पीटीआई ने दिन में 1.18 बजे जो न्यूज अलर्ट जारी किया उसमें कहा गया था, राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम – ‘रीवैम्प्ड’  सरदार पटेल स्टेडियम का अहमदाबाद में उद्घाटन किया। 12 मिनट बाद एक और अलर्ट आया, अहमदाबाद स्थित ‘रीफर्बिश्ड’ सरदार पटेल स्टेडियम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर नरेन्द्र मोदी स्टेडियम किया गया। अखबार ने बताया है कि इस मामले में अकेले पीटीआई अंधेरे में नहीं था। एनएनआई ने कुछ घंटे पहले ट्वीट किया था, राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द सरदार पटेल स्टेडियम मोतेरा का औपचारिक  उद्घाटन करेंगे जहां भारत और इंग्लैंड के बीच पिंक बॉल टेस्ट मैच आज शुरू होगा।

अखबार ने इसके बाद लिखा है, महत्वपूर्ण जगहों के नाम नेहरू-गांधी परिवार के लोगों के नाम पर रखे जाने के लिए मोदी ने अक्सर कांग्रेस का मजाक उड़ाया है और आरोप लगाया है कि अन्य सभी दिग्गज नेताओं की उपेक्षा की गई है। खासकर सरदार पटेल की। अब मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं जिसके पद पर रहते हुए स्टेडियम का नाम उनके नाम पर कर दिया गया। अखबार ने और भी बहुत सारी बातें याद दिलाई हैं और बताया है कि पिछले कुछ वर्षों से लगातार चल रहे हेडलाइन मैनेजमेंट से यह सुनिश्चित हुआ है कि परसेप्शन (मीडिया के जरिए बनाई गई समझ) अन्य सभी चीजों के ऊपर छा जाता है। बुधवार दोपहर तक सोशल मीडिया साइट्स पर उन तस्वीरों से हंगामा मचा हुआ था जिसमें दिखाया गया था कि नरेन्द्र मोदी स्टेडियम एक तरफ रिलायंस एंड और दूसरी तरफ अंबानी एंड के बीच में है। अखबार ने लिखा है कि इसमें कुछ गलत नहीं है और दोंनों को इसका हक है। लेकिन जब समझदारी परंपराओं की खबर ले तो संयोग का अपना महत्व था। खासकर तब जब हजारों किसान सड़क पर हैं और कह रहे हैं कि कृषि कानूनों को जबरन पास कराने और उस पर अड़े रहने का कारण दोनों कॉरपोरेट समूहों तथा मोदी सरकार के बीच संबंध है।

हेडलाइन मैनेजमेंट पर मेरी ऐसी कई रिपोर्ट दो किताब के रूप में छपने के लिए तैयार है। अगर कोई प्रकाशित करना चाहे।


लेखक वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध अनुवादक हैं।


मीडिया विजिल जनता के दम पर चलने वाली वेबसाइट है। आज़ाद पत्रकारिता दमदार हो सके, इसलिए दिल खोलकर मदद कीजिए। अपनी पसंद की राशि पर क्लिक करके मीडिया विजिल ट्रस्ट के अकाउंट में सीधे आर्थिक मदद भेजें।

मीडिया विजिल से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।