पहला पन्ना: चिताएँ जल रही थीं, मोदी रैली कर रहे थे- यह शीर्षक सिर्फ टेलीग्राफ़ में है!


धुंआधार प्रचार और श्रेय लेने के तमाम उपायों के बाद अब देश में टीकों की कमी पर कोई चर्चा नहीं है। यहां तक कि राहुल गांधी ने दूसरे टीकों को मंजूरी देने में तेजी लाने की सलाह दी तो केंद्रीय मंत्री ने उन्हें विदेशी दवा कंपनियों के लिए काम करने वाला बता दिया। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने कुछ ही दिन बाद इन दवाइयों को मंजूरी दे दी। द टेलीग्राफ ने तब भी इसपर खबर की ही थी। आज भिन्न देशों में टीकों की उपलब्धता की तारीख और मात्रा के साथ बताया है कि हम कैसे पीछे रह गए। हमने विदेशी टीकों के लिए समय पर ऑर्डर नहीं दिया और भारतीय टीके पैसों की कमी के कारण मिलने बंद हो गए या कम हो गए। यह खबर दूसरे अखबारों में भी होनी चाहिए। क्या आपके अखबार में है। 


संजय कुमार सिंह संजय कुमार सिंह
काॅलम Published On :


 ‘द टेलीग्राफ’ आज भी सबसे अलग है। मुख्य शीर्षक है, “जब चिताएँ जल रही थीं, मोदी रैली कर रहे थे। इसके साथ तस्वीर और उसके विवरण में बताया गया है कि बंगाल में दो रैलियों को संबोधित करने केमहत्वपूर्णकाम केबादमोदी ने कोविड संकट पर मीटिंग की। शनिवार को कोविड से मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा (1620) थी। अखबार ने बताया है कि 18 मार्च को जब देश में कोविड के दूसरे दौर की शुरुआत हुई तबसे लेकर 18 अप्रैल तक 10 दिनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी तक 16 रैलियां कर चुके हैं जबकि कोविड के मद्देनजर इस दौरान इमरजेंसी कार्रवाई होनी चाहिए थी। अखबार ने इस खबर के साथ ही बताया है कि ममता बनर्जी और राहुल गांधी ने रैलियां कम की और नहीं कीं। आप जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी की सुविधा के लिए एक महीने से ज्यादा समय और आठ चरणों में चुनाव करवाए जा रहे हैं और सत्तारूढ़ पार्टी ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री समेत कई नेताओं को चुनाव प्रचार में झोंक दिया है। 

दूसरी तरफ, कोविड-19 के बढ़ते प्रभाव के कारण दोनों नेताओं ने मतदाताओं की भीड़ जुटाने का निर्णय किया है। राहुल गांधी ने तो कल ही सोशल मीडिया पर घोषणा कर दी थी। आज टाइम्स ऑफ इंडिया और टेलीग्राफ से पता चला कि ममता बनर्जी ने भी अपनी रैलियां कम कीं। इस तरह, चुनाव लड़ने वाले तीन में से दो प्रमुख दलों को रैली का नुकसान समझ में रहा है जबकि रैलियों के दम पर ही चुनाव जीतने की उम्मीद करने वाली पार्टी अभी तक ऐसा कोई एलान नहीं कर पाई है। बहुत संभावना है कि भारतीय जनता पार्टी और उसकी ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और दूसरे नेता रैली करते रहेंगे। मेरे ख्याल से यह भी आज की बड़ी खबर है लेकिन छिटपुट ही छपी है। हिन्दू में राहुल गांधी की फोटो के साथ डबल कॉलम में है। ऐसे में अगर सिर्फ भाजपा की रैली होगी तो हास्यास्पद होगी और अगर देखादेखी रद्द कर दी जाए तो मतदान के दिन रैली करके वोट बटोरने की पूरी कोशिश धाराशायी हो जाएगी। यह एक दिलचस्प स्थिति है लेकिन अखबारों में इस पर, आठ चरणों में चुनाव करवाने का फायदा नहीं उठा पाई सरकारजैसा कुछ नहीं है। 

टेलीग्राफ ने कल बताया था कि प्रधानमंत्री ने आसनसोल के अपने भाषण में 2018 की हिंसा को याद किया था लेकिन गुजरात दंगे को भूल गए थे। आज अखबार ने उस खबर का फॉलो अप छापा है। अखबार ने तीन साल पहले दंगे में मरने वाले किशोर के पिता मौलाना रशीदी को ढूंढ़ निकाला और उनकी अपील छापी है जो उन्होंने बगैर किसी नाराजगी के जारी की है उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री को हमें अपने जख्मों को ठीक करने में सहायता करनी चाहिए कि उन्हें फिर से कुरेदना चाहिए। अखबार ने ट्वीटर पर चले जनरल वीके सिंह के विवाद और ऑक्सीजन सप्लाई से संबंधित सरकारी आदेश की भी खबर छापी है। यही नहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को अक्षम और अकुशल कहते हुए कहा है कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। अखबार ने ममता बनर्जी की इस चिट्ठी के साथ मनमोहन सिह की भी चिट्ठी छापी है। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया है कि इस मुश्किल समय में क्या कैसे करना चाहिए।

देश भर में चल रही कोविड-19 की दूसरी लहर में कल यानी इतवार को एक दिन में 1620 मौतें हुईं, 2.75 लाख नए मामले सामने आए। कोविड से संक्रमितों की कुल संख्या 1.5 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है और अब जांच के लिए आने वाले नमूने भी ज्यादा संक्रमित पाए जा रहे हैं और यह सिर्फ 12 दिन में 8 प्रतिशत से बढ़कर दूने से भी ज्यादा 16.7% हो गया है। अकेले दिल्ली में 25.5 हजार मामले सामने आए और दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कह दिया कि दिल्ली में 100 से भी कम आईसीयू बेड बची हुई हैं। कल हुई मौतों में कम से कम छह मौतें मध्य प्रदेश के डबल इंजन वाले सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन कम होने से हुई है। इसी तरह, गुजरात में मौतें सरकारी आंकड़ों से बहुत ज्यादा हैं। लेकिन इन सारी बातों को एक खबर में लीड के रूप में बताने की बजाय टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड है, सरकार ने उद्योग को ऑक्सीजन सप्लाई सीमित की, कोविड से लड़ने के लिए इसे मेडिकल इस्तेमाल के लिए भेजा। बचपन में हमलोग इसे आग लगने पर कुंआ खोदना कहते थे। टेलीग्राफ ने कुछ दिनों पहले यही शीर्षक लगाया था लेकिन राजा का बाजा बजाने वाले अब भी बाजा बजा रहे हैं। अकेले, हिन्दू में यह खबर लीड है। 

इंडियन एक्सप्रेस की लीड है, ऑक्सीजन की कमी राज्यों में भी पहुंची, दिल्ली ने केंद्र सरकार को एसओएस भेजा : इमरजेंसी। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुकाबले यह पुरानी खबर लगती है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के हवाले से यह सूचना इंट्रो के रूप में है जो टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड है। इससे आप समझ सकते हैं कि 56 ईंची सीना कैसे बना होगा। हिन्दुस्तान टाइम्स ने मुख्यमंत्री की अपील को लीड बनाया है और इसके साथ राजकोट के एक अस्पताल के बाहर खड़े एम्बुलेंस की तस्वीर छापी है। इसकी जगह या इसके साथ जनरल वीके सिंह के ट्वीट की खबर छप जाती तो लोगों को देश की राजधानी की स्थिति का सही अंदाजा हो जाता लेकिन …. इसी तरह हिन्दुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने पर तीन कॉलम की खबर से बताया है कि कुम्भ से लौटने वालों को क्वारंटीन किया जाएगा। निश्चित रूप से यह खबर राहुल गांधी ने बंगाल में अपनी रैली कैंसिल की, से ज्यादा महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी की खबर यहां सिंगल कॉलम में है। 

कोविड-19 के कारण देश भर में मचे हाहाकार की इस स्थिति में पहले पन्ने से बहुत सारी खबरें गायब हैं। अस्पताल में जगह से लेकर दवाइयों, टीकों के साथ श्मशान में भी जगह कम पड़ गई है लेकिन खबरें बहुत संभल कर दी जा रही हैं। मामला सरकार की छवि का है और उसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। यही नहीं, विपक्ष और खासकर राहुल गांधी के काम की तारीफ भी नहीं होती है। सबसे पहले  कोविड-19 के इलाज में काम आने वाली दवा रेमडेसिविर की कमी और भाजपा नेताओं के पास मिलने का मामला। इसकी शुरुआत गुजरात से हुई थी पर अभी तक साफ नहीं है कि गुजरात भाजपा नेता के पास इस दुर्लभ दवा का स्टॉक पहुंचा कैसे। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर दवा बनाने वाली कंपनी महाराष्ट्र को इसकी आपूर्ति नहीं कर रही है। पर मामले की जांच करवाने और कुछ संतोषजनक जवाब देने की बजाय अखबारों ने आज छापा है कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस इस मामले में गिरफ्तार फार्मा कंपनी के अधिकारी के बचाव में पहुंच गये। आज एक खबर यह भी है कि ममता बनर्जी ने टीके की कमी पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। अखबारों के पहले पन्ने पर इस मामले में संपूर्ण जानकारी देने वाली कोई खबर नहीं है। आपके अखबार में है क्या? या आप वास्तविकता समझ पाए क्या

इसी तरह, टीकों का मामला है। धुंआधार प्रचार और श्रेय लेने के तमाम उपायों के बाद अब देश में टीकों की कमी पर कोई चर्चा नहीं है। यहां तक कि राहुल गांधी ने दूसरे टीकों को मंजूरी देने में तेजी लाने की सलाह दी तो केंद्रीय मंत्री ने उन्हें विदेशी दवा कंपनियों के लिए काम करने वाला बता दिया। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने कुछ ही दिन बाद इन दवाइयों को मंजूरी दे दी। टेलीग्राफ ने तब भी इसपर खबर की ही थी। आज भिन्न देशों में टीकों की उपलब्धता की तारीख और मात्रा के साथ बताया है कि हम कैसे पीछे रह गए। हमने विदेशी टीकों के लिए समय पर ऑर्डर नहीं दिया और भारतीय टीके पैसों की कमी के कारण मिलने बंद हो गए या कम हो गए। यह खबर दूसरे अखबारों में भी होनी चाहिए। क्या आपके अखबार में है। 

 

कोविड के कारण जो स्थिति है उसमें गाजियाबाद के सांसद, पूर्व सेना प्रमुख और केंद्र सरकार के मंत्री वीके सिंह ने अपने किसी बड़े भाई को अस्पताल में बेड दिलाने के लिए ट्वीट किया। ट्वीट तो यही था कि उनके बड़े भाई के लिए बिस्तर की जरूरत है पर लोगों ने इसपर आश्चर्य जताया कि केंद्रीय मंत्री को भाई के लिए बिस्तर नहीं मिल रहा है तो उन्होंने उसे किसी और का ट्वीट बता दिया और डिलीट भी कर दिया। यह सब इतना अविश्वसनीय था कि लोगों ने मान लिया कि उनपर ट्वीट डिलीट करने और झूठ बोलकर सरकार की छवि ठीक करने के लिए दबाव होगा। बाद में उन्होंने यह सब किया भी और जो किया उससे इन आशंकाओं को बल भी मिला। निश्चित रूप से यह बड़ा मामला है। लेकिन आज सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया में है। 

इसी तरह, राहुल गांधी ने कल पश्चिम बंगाल चुनाव से संबंधित अपनी सारी रैली रद्द करने की घोषणा की। यह खबर आज सिर्फ दि हिन्दू में पहले पन्ने पर है। उल्टे हिन्दुस्तान टाइम्स में अमित शाह का निराधार दावा है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 122 सीटें जीत रही है। आप जानते हैं कि आठ चरणों में महीने भर से ज्यादा चलने वाले चुनाव में मतदाता बोर हो जाता है और संभावना है कि जीतने वाली पार्टी को वोट दे। वैसे भी, पैसे के दम पर जान लगाती दिखने वाली पार्टी केंद्र में सत्तारूढ़ होने के कारण कई मायने में  मजबूत भी है और इन सबका लाभ उठाकर झूठसच के दम पर चुनान जीतने की हर संभव कोशिश कर रही है। हिन्दुस्तान टाइम्स जैसे अखबार ऐसी खबरें पहले पन्ने पर छापकर पार्टी के दुष्प्रचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध अनुवादक हैं।


मीडिया विजिल जनता के दम पर चलने वाली वेबसाइट है। आज़ाद पत्रकारिता दमदार हो सके, इसलिए दिल खोलकर मदद कीजिए। अपनी पसंद की राशि पर क्लिक करके मीडिया विजिल ट्रस्ट के अकाउंट में सीधे आर्थिक मदद भेजें।

मीडिया विजिल से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।