सीपी कमेंट्री: ‘थर्ड जेंडर’ बिहारी हैं फ़र्स्ट क्लास वोटर !

चन्‍द्रप्रकाश झा चन्‍द्रप्रकाश झा
काॅलम Published On :


 

युनीक आईडेंटिटी अथॉरिटी ओफ इंडिया (आधा) के 31 मई 2020 को जारी डेटा के अनुसार तब बिहार की आबादी 12.4  करोड थी. निर्वाचन आयोग ने 25 सितम्बर को बिहार विधान सभा के नये चुनाव की घोषणा करने के साथ ही कुछ डेटा भी दिये. आयोग ने बिहार में थर्ड जेंडर (उभयलिंगी या ट्रांसजेंडर ) वोटर के बारे में कुछ ब्योरा दिया है. लेकिन इसमें संदेह है कि राज्य में सभी थर्ड जेंडर मतदाता वोटर लिस्ट में पंजीकृत कर लिये गये हैं. 

मान लिया जाना चहिये कि बिहार में थर्ड जेंडर अन्य राज्य से बहुत कम नहीं होंगे. ये बात जरुर है कि थर्ड जेंडर की गिनती अर्से से विद्यमान सामाजिक दबाव के कारण कभी सही नही की जा सकी हैं. ज्यादातर लोग अपने परिवार में जैविक विसंगति से पैदा हुए थर्ड जेंडर संतान की लैंगिग पहचान छुपाये रखते हैं. कहा जाता है कि नगरीय परिवेश में झुंड में गुजर-बसर करने वाले थर्ड जेंडर लोग किसी भी घर में नवजात थर्ड जेंडर संतान को सहमति से या बलपूर्वक अपने  पारम्परिक ‘गुरु’ के पास ले जाकर, रात में किसी श्मशान भूमि अथवा निर्जन स्थल पर सामूहिक नृत्य-गान के साथ उभयलिंगी संस्कार’ करते हैं. लेकिन ग्रामीण परिवेश में ऐसा कुछ भी नहीं होता है.

देश की नई जनगणना 2021 में होने पर ही बिहार की आबादी और उसमें थर्ड जेंडर लोगो की नवीकृत प्रामाणिक डेटा मिल सकेंगे. थर्ड जेंडर में वृद्धि की दर क्या है, ये अभी स्पष्ट नहीं है. बिहार के जनगणना निदेशक कुमार सेंथिल के अनुसार 2001 की जनगणना की तुलना में पिछले एक दशक में राज्य में आबादी वृद्धि दर में 3.35 प्रतिशत की गिरावट आई जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है. बिहार जनसंख्या के मामले में देश में उत्तर प्रदेश के बाद आता है.1991-2001 के दशक में बिहार में जनसंख्या वृद्धि दर 28.62 प्रतिशत थी. थर्ड जेंडर के अधिकृत डेटा सन 2014 के बाद के ही हैं. 

 

पंजीकृत थर्ड जेंडर वोटर 

बिहार के वोटर लिस्ट में मताधिकार प्राप्त पंजीकृत थर्ड जेंडर की संख्या 2,344 है. ये 2019 के लोकसभा चुनाव की वोटर लिस्ट से 62 कम है. थर्ड जेंडर के संगठन दोस्ताना सफर की पटना विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर शिक्षा हासिल कर चुकी संस्थापक और खुद ट्रांसजेंडर, रेश्मा प्रसाद के मुताबिक राज्य में 40 हजार वयस्क उभयलिंगी हैं. इनमें से 2406 को ही पिछले लोकसभा चुनाव की वोटर लिस्ट में दर्ज किया गया था और शेष को पुरुष या महिला लिख दिया गया था.

निर्वाचन आयोग ने 1994 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में थर्ड जेंडर को वोटर लिस्ट में शामिल करना शुरु किया था.  इसे 2014 के लोक सभा चुनाव में और बल दिया गया. फिर वे चुनाव में प्रत्याशी भी बनने लगे. उनमें से कुछ जीते भी हैं. मध्य प्रदेश की शबनम बानो (शबनम मौसी) देश की पहली निर्वाचित विधायक बनी. वह 1998 से 2003 तक शहडोल–अनूपपुर जिला की सोहगपुर सीट से विधान सभा सदस्य रही थी. गौरतलब है कि वह बडे पुलिस अफसर रहे ब्राह्मण पिता की संतान हैं जिन्हे मर्दाना नाम देकर बाद में थर्ड जेंडर लोगो के हवाले कर दिया गया. उनकी ही प्रेरणा से मध्य प्रदेश के थर्ड जेंडर वोटरो ने 2003 में ‘जीती जिताई पोलिटिक्स’ नाम से राजनीतिक दल भी बनाया.  

 

बिहार में थर्ड जेंडर वोट डालने में आगे 

सन 2011 की जनगणना के मुताबिक देश भर में 4,87,203 थर्ड जेंडर नागरिक थे. खुद निर्वाचन आयोग ने माना है कि 2019 के लोक सभा चुनाव में थर्ड जेंडर की कुल आबादी के केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही पंजीकृत वोटर थे. आयोग ने थर्ड जेंडर का मताधिकार सुनिश्चित करने  के वास्ते जन जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मॉडल, बिशेष हुईरम की भी मदद ली है. उन्होने 2016 में थाईलैंड मे मिस इंटरनेशनल क्वीन स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व  किया था.

बिहार में वोट डालने वाले थर्ड जेंडर के मतदाता का औसत कई राज्यो से बहुत अधिक, करीब 70 प्रतिशत है. तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में ये औसत 17 प्रतिशत से कम है. 

 

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट

निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार के नये चुनाव की घोषणा करने के समय दिये गये डेटा के मुताबिक राज्य में वयस्क मताधिकार प्राप्त कुल 7.79 करोड़ वोटर हैं. इनमें 3.39 करोड़ महिला वोटर भी शामिल हैं. बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रो से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य की नवीकृत ‘ड्राफ्ट वोटर लिस्ट’ में 15.35 लाख नये वोटर जोड़े गये हैं. ड्राफ्ट लिस्ट सालाना रुटीन जोड़-घटाव के बाद 7 फरवरी 2020 को जारी की गई थी. वोटर उम्र के डेटा के अनुसार 18-19 बरस के 7,14,988 मतदाता हैं और 80 बरस से ज्यादा के 13,03,543 वोटर हैं. पोस्टल बैलट से वोट डालने की सुविधा प्राप्त, भारतीय सेना के 1,58,094 सर्विस वोटर और 72 अनिवासी समुद्रपारीय वोटर हैं. ड्राफ्ट लिस्ट से डुप्लिकेट, तबादला और निधन के कारण 2,94,969 मतदाताओं के नाम निकाले गये. 

बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एच. आर. श्रीनिवास के अनुसार निर्वाचक–आबादी अनुपात (ईपी) 0.495 से बढ कर  0.504 हो गया है. आबादी जेंडर में भी कुछ सुधार हुआ है. अब हर एक हजार पुरुष वोटर पर महिला वोटर की संख्या 892 से बढ 894 हो गई है. ड्राफ्ट लिस्ट में 7,18,22,450 वोटर है. इनमें 3,79,12,127 पुरुष हैं , 3,39,07,979 महिला और 2,344 थर्ड जेंडर वोटर हैं.

बहरहाल , सवाल ये है कि राज्य में थर्ड जेंडर के वोटर उनकी अधिकृत रूप से की गई गणना से कम क्यों है. सवाल ये भी है कि अन्य राज्य में थर्ड जेंडर चुनाव लड़ते और जीतते भी हैं, बिहार में ये कब शुरु होगा.

* तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं।



सीपी नाम से चर्चित लेखक  चंद्रप्रकाश  झा, युनाइटेड न्यूज औफ इंडिया के मुम्बई ब्यूरो के विशेष संवाददाता पद से रिटायर होने के बाद तीन बरस से बिहार स्थित अपने गांव में खेती-बाड़ी करने और स्कूल चलाने के साथ ही स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन भी कर रहे हैं. उन्होने भारत की आज़ादी, चुनावअर्थनीति, यूएनआई का इतिहास आदि विषय पर कई किताबे लिखी हैं. वह मीडिया विजिल के अलहदा ‘चुनाव चर्चा’ के स्तम्भकार हैं. वह क्रांतिकारी कामरेड शिव वर्मा मीडिया पुरस्कार की संस्थापक कम्पनी पीपुल्स मिशन के अवैतनिक प्रबंध निदेशक भी हैं, जिसकी कोरोना- कोविड 19 पर अंग्रेजी–हिंदी में पांच किताबो का सेट शीघ्र प्रकाश्य है.



 


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