चुनाव चर्चा: कोविड क़हर के बीच चुनावी बहार के मायने!

चन्‍द्रप्रकाश झा चन्‍द्रप्रकाश झा
काॅलम Published On :


भारत में बरस भर से कोरोना-कोविड महामारी का कहर हरिद्वार कुम्भ मेला में अनुमानित करीब एक करोड़ लोगों के गंगा स्नान के धार्मिक पुण्य से नहीं थमा बल्कि पूरे देश में बेतहासा बढ ही गया है. निर्वाचन आयोग इस से बेखबर नहीं है, इसके मद्देनजर आयोग ने बंगाल विधान सभा चुनाव के 8 चरण में मतदान के 22 , 26 और 29 अप्रैल को शेष दौर के पहले सभी संसदीय सियासी दलो की बैठक भी बुलाई लेकिन उसने शेष तीनो चरण की वोटिंग एक ही साथ कराने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद मोदी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सिवा लगभग सभी दलो का सांझा सुझाव नामंजूर कर दिया. आयोग ने भाजपा के सुर में सुर मिलाकर असम, केरल, तमिलनाडु और पुडीचेरी के साथ ही बंगाल के जारी चुनाव का पूर्व घोषित कार्यक्रम ही यथावत रखने का निर्णय किया.

 

अरोड़ा जी

निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोडा ने इस पद से रिटायर होने के पहले आंध्र प्रदेश की तिरुपति (अनुसूचित जाति) और कर्नाटक के बेलगाम की रिक्त दो लोकसभा सीट और विभिन्न राज्यो की 14 विधान सभा सीटो पर उपचुनाव कराने का कार्यक्रम 16 मार्च को ही घोषित कर दिया था. उनके रिटायर हो जाने के बाद इन सभी सीटो पर वोटिंग 17 अपैल को हो चुकी है. पर काउंटिंग उपरोक्त पाँच विधान सभा के चुनाव के लिये पहले से घोषित तारीख दो मई को ही होगी.

असम की 126 सीट की मौजूदा विधान सभा का कार्य काल 31 मई को खत्म होगा. अन्य विधान सभाओ में से 294 सीट के बंगाल का 30 मई को, 140 सीट के केरल का एक जून को, 234 सीट के तमिलनाडु का 24 मई को समाप्त होगा. केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की नौ जून 2016 को निर्वाचित 30 सीट की पिछली विधान सभा का कर्य काल इस बरस 8 जून तक था. उसे पहले ही भंग कर पुडुचेरी में राष्ट्रपति शासन लागु किया जा चुका है.

 

उपचुनाव

विधानसभा उपचुनाव में गुजरात की मोर्वा हदफ(अनुसूचित जनजाति ), झारखंड की मधुपूर, कर्नाटक की बस्वा कल्याण और मस्की सीट (अनुसूचित जनजाति), मध्य प्रदेश की दमोह, महाराष्ट्र की पंढरपुर, मिजोरम की सरछिप, नगालैंड की नोकसेन, उडीसा की पिपली , उत्तराखंड की सैत, तेलंगाना की नागार्जुन सागर तथा राजस्थान की सहारा, सुजानगढ (अनुसूचित जाति) और राजसमंद की तीन सीटे भी शामिल हैं।

 

2022 के चुनाव

संकेत है कि अरोडा जी ने रिटायर होने से पहले गोआ, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड और भारत के सब से बडे राज्य उत्तर प्रदेश समेत पाँच और राज्यों के 2021 में निर्धारित चुनाव के समय का कैलेंडर नये मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा की टेबल पर छोड दिया है, गोआ की 40 सीट की मौजूदा विधान सभा 16 मार्च 2017 को गठित हुई थी. उसका कार्यकाल 15 मार्च को खतम होगा. अन्य विधान सभाओ में से 60 सीटो की मणिपुर का 19 मार्च को, 117 सीट के पंजाब का 27 मार्च को, 70 सीट के उत्तराखंड का 23 मार्च को और 403 सीट के उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 14 मई तक है.

 

केरल में चुनाव आयोग और मोदी सरकार का ‘गड़बड़झाला’

निर्वाचन आयोग और मोदी सरकार के विधि एवम न्याय मंत्रालय को केरल से राज्यसभा की तीन सीटों पर मनमर्जी से द्विवार्षिक चुनाव कराने के ‘खेल’ में केरल हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के कारण मुँह की खानी पडी है. दरअसल आयोग ने इन सीट पर 14 अप्रैल को चुनाव कराने के लिये 17 मार्च को ही कार्यक्रम घोषित कर दिया था. लेकिन विधि एवम न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद के अफसरो ने ‘ चुनावी चाणक्यगीरी ‘ में माहिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर आयोग को इनके चुनाव का घोषित कार्यक्रम रद्द करने कह दिया.

ये चुनाव इस कुतर्क पर टालने कहा गया कि केरल विधान सभा चुनाव प्रगति पर हैं. उसके परिणाम दो मई को आ जायेंगे. इसलिये राज्यसभा की इन तीन सीटों के लिये मौजूदा विधान सभा के विधायको के बीच चुनाव कराने की जरुरत नहीं है. आयोग ने वही किया जो बिहार में ‘नथुनाफुलाऊ’ एडवोकेट कहे जाने वाले इन मंत्री जी ने फरमाया. चुनाव अधिसूचना जारी होने के एक दिन पहले उसे रोक दिया गया..

चुनाव आयोग ने 17 मार्च को एलान किया था कि केरल की तीन विधानसभा सीटों के लिए 14 अप्रैल को चुनाव होगा. इसकी अधिसूचना 24 मार्च को जारी कर दी जायेगी. ये चुनाव केरल से राज्यसभा के तीन सदस्यों, वायलार रवि (कांग्रेस) , के.के.रागेश ( कम्युनिस्ट पार्टी ओफ इंडिया मार्क्सिस्ट ) और अब्दुल वहाब (इंदियन युनियन मुस्लिम लीग) की सदस्यता का मौजूदा का कार्यकाल 21 अप्रैल को समाप्त होने के मद्देनजर रिक्ति भरने के लिये होने हैं. आम तौर पर किसी राज्य सभा या विधान परिषद सदस्य का कार्यकाल पूरा होने के कुछ समय पहले ही उस सीट पर चुनाव करा लिया जाता है बशर्ते कि निर्वाचक निकाय अस्तित्व में हो. केरल विधानसभा अभी कायम है और उसका कार्यकाल शेष है.

राज्य में कम्युनिस्ट पार्टी ओफ इंडिया मार्क्सिस्ट ( सीपीएम ) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ वाम मोर्चा ने निर्वाचन आयोग के फैसले को केरल हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट के निर्देश पर निर्वाचन आयोग ने ये चुनाव 30 अप्रैल को कराने की घोषणा कर दी है.

जाहिर है अब ये चुनाव नई विधान सभा के चुनाव के परिणाम निकलने के दो दिन पहले ही करा लिये जायेंगे. भाजपा की चुनावी चाणक्यगीरी का खेल यही थी कि केरल से राज्य सभा की तीन सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव दो मई से पहले नहीं कराये जाये. लेकिन केरल हाई कोर्ट ने इस चुनावी चाणक्यगरि पर लगाम लगा दी.

बहरहाल , देखना यह है कि कोरोना-कोविड महामारी का कहर दो मई तक कितना बढता या घटता है. लेकिन ये निष्कर्ष तो निकाला ही जा सकता है कि कोविड महामारी के कहर के बीच कोई चुनाब स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त नहीं हो सकता जिसे भारत के संविधान के तह्त सुनिश्चित करने का सांविधानिक दायित्व निर्वाचन आयोग पर है. इन चुनाव में कोइ भी जीते , हार भारत के लोकतंत्र की ही होगी. कोई शक ?

 

*मीडिया हल्कों में सीपी के नाम से मशहूर चंद्र प्रकाश झा 40 बरस से पत्रकारिता में हैं और 12 राज्यों से चुनावी खबरें, रिपोर्ट, विश्लेषण के साथ-साथ महत्वपूर्ण तस्वीरें भी जनता के सामने लाने का अनुभव रखते हैं। 


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