मोदी के सामने सरकारी कार्यक्रम में ‘राजनीति’ का मुँहतोड़ जवाब दिया ममता ने 

संजय कुमार सिंह संजय कुमार सिंह
काॅलम Published On :


कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में ”जय श्री राम” के नारे लगाने की राजनीति का ममता बनर्जी ने मुंहतोड़ जवाब दिया। संबोधित करने के लिए बुलाए जाने पर ममता ने अपमान का जवाब देने के अलावा कुछ नहीं कहा। ममता बनर्जी ने कहा, ”यह राजनीतिक नहीं सरकारी समारोह है। इसमें मर्यादा का ख्याल रखना चाहिये। यह कार्यक्रम किसी को आमंत्रित कर अपमानित करने का नहीं है …. जय बांग्ला, जय हिंद।”

एंटायर पॉलिटिकल साइंस के लिए भले ही एक घटना हो, सरकारी कार्यक्रमों की मर्यादा के लिहाज से यह एक बड़ी खबर है और अंग्रेजी के मेरे पांचों अखबारों में पहले पन्ने पर है। लेकिन खबर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दब गया है और यह गोदी मीडिया का स्वनियमन है जो आम लोगों के मामले में नहीं हो रहा है।

मेरी दिलचस्पी यह जानने में थी कि ‘मौनमोहन’ सिंह के मुकाबले प्रधानमंत्री पद के लिए  चुने गए हमारे बोलने वाले प्रधानमंत्री ने इस घटना पर क्या कहा। टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी खबर में लिखा है कि नरेन्द्र मोदी ने इसका कोई संदर्भ नहीं लिया। द हिन्दू ने पहले पन्ने पर प्रकाशित संबंधित खबर के शीर्षक में ना तो नारे लगाने का जिक्र किया है और ना ही ममता बनर्जी के विरोध का। हालांकि, हिन्दू में मुख्य खबर के साथ सिंगल कॉलम की खबर है, देश में चार राजधानी क्यों न हों। मेरे ख्याल से ममता बनर्जी ने अच्छी राजनीति की है और यह एक रोड शो में भाग लेने के बाद कहा। इसे दूसरे अखबारों में प्रमुखता नहीं मिली है।  

प्रधानमंत्री की मौजूदगी में ममता बनर्जी को बोलने के लिए बुलाए जाने पर श्रोताओं के एक वर्ग की ओर से ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाना अगर राजनीति है तो ममता बनर्जी ने ना सिर्फ उसका मुंहतोड़ जवाब दिया बल्कि बंगाल के विधासभा चुनाव के मद्देनजर अगर मामले को राजनीतिक बनाने की कोशिश की तो ममता बनर्जी ने देस की चार राजधानी बनाने का बड़ा मुद्दा छेड़ दिया है। यह अलग बात है कि गोदी मीडिया राष्ट्रीय स्तर पर इसे तवज्जो न दे पर बंगाल चुनाव के लिहाज से ममता बनर्जी ने अपनी चाल चल दी है। और यह खबर तो है ही। 

जहां तक सरकारी कार्यक्रम में राजनीतिक नारे का सवाल है, सामान्यतौर पर इसे भले नजरअंदाज कर दिया जाए लेकिन कोई मुख्यमंत्री उसपर एतराज करे, भाषण ही न दे और कहे कि बेइज्जती नहीं करनी चाहिए तो यह खबर है। खासकर इसलिए भी कि प्रधानमंत्री वहां मौजूद थे और उन्होंने इसपर कुछ नहीं कहा। मेरा मानना है कि अगर उनकी राय में यह सही है तो भी कहना चाहिए था और गलत है तब तो जरूर करना चाहिए था। इससे कार्यकर्ताओं को भी समझ में आ जाता कि उन्हें क्या करना है क्या नहीं। लेकिन प्रधानमंत्री चुनाव के समय में श्मशान-कब्रिस्तान और आग लगाने वाले कपड़ों से पहचाने जाते हैं जैसी राजनीति के लिए याद किए जाएंगे। 

बात इतनी ही नहीं है। जैसा कि मैंने कहा, यह बड़ी खबर है। अंग्रेजी के जो पांच अखबार मैं देखता हूं उनमें ‘द हिन्दू’ को छोड़कर चारो अखबारों ने इसे प्रमुखता दी है। मेरा मानना है कि इतनी ही प्रमुखता इस बात को भी मिलनी चाहिए थी कि प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने जरूर शीर्षक में बताया है कि यह सब प्रधानमंत्री की मौजूदगी में हुआ। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में भी यह सूचना है लेकिन छोटे फौन्ट में। चूंकि मामला कोलकाता का है तो इसे कोलकाता के ‘द टेलीग्राफ’ में अच्छी तरह से छपना ही था। हमेशा की तरह ‘द टेलीग्राफ’ का पन्ना पढ़ने के साथ-साथ देखने लायक भी है। इसमें प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा, यह भी प्रमुखता से है। कुछ लोग इसे प्रधानमंत्री का विरोध कह सकते हैं पर प्रधानमंत्री ने जो किया वह उनका स्वभाव (राजनीति) है उनकी प्रतिक्रिया नहीं आना खबर है। 

ओ’ब्रायन ने उस वाकये का एक मिनट का वीडियो टैग करते हुए ट्वीट किया, ”मर्यादा। आप असभ्य लोगों को मर्यादा नहीं सिखा सकते। कार्यक्रम में असल में क्या हुआ, उसका एक मिनट का वीडियो ये रहा। वीडियो में यह भी दिखा कि ममता बनर्जी ने किस तरह मर्यादा में रहकर अपनी प्रतिक्रिया दी।” नारा लगाने वालों की ओर इशारा करते हुए कहा कि मान-मर्यादा सिखाई नहीं जाती। विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में एक वर्ग ने ”जय श्रीराम” के नारे लगाए गए, जिससे नाराज बनर्जी ने कार्यक्रम को संबोधित करने से इनकार कर दिया और कहा कि इस तरह का ”अपमान” अस्वीकार्य है।

 

 

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध अनुवादक हैं।

 

 


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