पहला पन्ना: मुफ़्त टीके पर प्रचार एक्सप्रेस, जबकि राहुल गाँधी ने बीते अगस्त में ये रास्ता सुझाया था!

संजय कुमार सिंह संजय कुमार सिंह
काॅलम Published On :


आज हेडलाइन मैनेजमेंट का असर देखने का दिन है। खबर तो सबको मालूम ही थी और इस लिहाज से के अखबारों की लीड तय थी। बात प्रस्तुति की है और किसी ने निराश नहीं किया। सब अपने रंग में हैं। एक तरफ इंडियन एक्सप्रेस और दूसरी तरफ द टेलीग्राफ। आज वही देखता-बताता हूं। 

1.हिन्दुस्तान टाइम्स  ने चार कॉलम में दो लाइन का शीर्षक लगाया है, “राज्यों को टीके के लिए भुगतान नहीं करना होगा।” बीच में प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधन शीर्षक से भाषण की खास बातें हैं। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में देश की 80 करोड़ जनता को दीवाली तक मुफ्त राशन देने की घोषणा की। 80 मिलयन का मतलब हुआ, देश की आधा आबादी से ज्यादा। और यह पुराना कार्यक्रम है। कल उसके जारी रहने की घोषणा की गई। मुझे लगता है कि यह संख्या बहुत ज्यादा है और इतने लोगों को मुफ्त राशन मिलेगा तो नजर आएगा। पर नजर नहीं आया। टीके अभी बहुत कम लगे हैं लेकिन फेंक दिए जाने, गाड़ दिए गाने और जलाने की खबरें छप चुकी हैं। दूसरी ओर, इतने लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है पर कोई टकरा नहीं रहा है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने आज संख्या को अंग्रेजी करके 800 मिलियन छापा है। और इसपर एक अलग दो कॉलम की खबर मुख्य शीर्षक के साथ है। 

2.टाइम्स ऑफ इंडिया में भी यह खबर चार कॉलम, दो लाइन के शीर्षक, बीच में खास बातों के साथ है। इसमें एक इंट्रो भी है, नई नीति 21 जून से लागू होगी। यह राष्ट्रीय योग दिवस है। और भाषण में याद दिलाया गया कि इसमें अभी दो सप्ताह का समय है और वह राष्ट्रीय योग दिवस का मौका होगा। इस लिहाज से यह इंट्रो महत्वपूर्ण है। शीर्षक है, 18 पार वालों को मुफ्त टीका, केंद्र राज्यों के लिए टीके खरीदेगा : प्रधानमंत्री। कल की घोषणा में प्राइवेट अस्पतालों के लिए 25 प्रतिशत खुराक रखने की घोषणा पैसे वालों को विशेष सुविधा देने और निजी अस्पतालों को कमाने का मौका देना है। कायदे से सरकार को पैसे वालों के लिए अलग से विशेष व्यवस्था करने की कोई जरूरत नहीं है और वह भी 25 प्रतिशत। लेकिन सरकार को इससे कोई परहेज नहीं है। यह रेखांकित करने वाली बात है और टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे अपने अंदाज में लाल रंग से छापा है। कितना रेखांकित हुआ वह आप तय कीजिए।

3.इंडियन एक्सप्रेस में यह, “नीति पलटने पर प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधन” – फ्लैग शीर्षक से छह कॉलम में है। बाकी अखबारों में चार यहां छह, लगभग डेढ़ गुना। पता नहीं छह कॉलम का दो लाइन का शीर्षक बनाने के लिए या किसी और कारण से इसमें यह जोड़ दिया गया है कि प्रतिकूल प्रतिक्रिया के बाद खुराक में बदलाव। यह घोषणा प्रधानमंत्री ने शायद नहीं की है पर उनकी घोषणाओं के साथ मिलाया गया है। बाकी का शीर्षक है, सबके लिए मुफ्त कोविड टीका, सिर्फ केंद्र प्राप्त करेगा। इंट्रो में शुल्क की अधिकत्तम सीमा तय और मोदी ने अनाज योजना का विस्तार नवंबर तक किया जैसे प्रचार भी हैं। 

4.द हिन्दू में भी यह खबर चार कॉलम में है। शीर्षक है, सरकार फिर से केंद्र स्तर पर टीके प्राप्त करना शुरू करेगी : मोदी। इसके साथ भारत का नक्शा है जिसका शीर्षक है, लांग रोड अहेड  यानी आगे लंबा रास्ता है। इसमें बताया गया है कि सात जून की स्थिति के अनुसार सिर्फ 3.3 प्रतिशत आबादी का पूरा टीकाकरण हो चुका है। पूरी तरह टीकाकरण करवा चुके लोगों का हिस्सा दिल्ली में 10 प्रतिशत से ज्यादा है लेकिन तमिलनाडु में यह 4 प्रतिशत से कम है। कल जब प्रधानमंत्री अपनी तारीफ खुद कर रहे थे और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आलोचना होने तथा सुप्रीम कोर्ट की खिचाई के बाद जागे थे तो जो तथ्य दिए उनके अलावा जो नहीं बताया उसे बताना भी अखबारों का ही काम है। और हिन्दू ने बताया है कि किस राज्य में टीकाकरण की क्या स्थिति है।

5.द टेलीग्राफ में यह खबर पांच कॉलम में है। शीर्षक है, कोवैक्स कुम्भकरण के 297 दिन। इस शीर्षक से ऊपर अखबार ने राहुल गांधी, ममता बनर्जी और हेमंत सोरेन की तस्वीर के साथ बताया है कि इन लोगों ने टीके पर कब क्या कहा था। राहुल गांधी ने 14 अगस्त 2020 को ही कहा था, भारत को स्पष्ट रूप से पारिभाषित, समावेशी और न्यायासंगत टीकों तक पहुंच की रणनीति चाहिए जिससे उपलब्धता, सामर्थ्य और वाजिब वितरण सुनिश्चित हो। भारत सरकार को ऐसा अभी करना चाहिए। मतलब साफ है कि जो जरूरत राहुल गांधी 14 अगस्त 2020 को समझ रहे थे वह नरेन्द्र मोदी को सबके कहने, सुप्रीम कोर्ट की डांट और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की आलोचना के बाद समझ में आई। और ऐसी मांग पूरी करने का अंदाज आपने टेलीविजन पर देखा ही होगा। इंडियन एक्सप्रेस का प्रचार भी।

अखबारों के पक्षपात को और स्पष्ट करने के लिए मैं पांचों अखबारों के इस खबर का पहला वाक्य भी लिख देता हूं। अब शुरुआत इस तरफ से करता हूं और सबसे पहले द टेलीग्राफ। जेपी यादव की लिखी खबर का पहला पैराग्राफ है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को केंद्रीयकृत टीका नीति की घोषणा की। सुधार की दिशा में उठाया गया यह कदम एक देशव्यापी हंगामा और सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद है कि सरकार की नीति मनमानी और बेतुकी है।  

द हिन्दू में विशेष संवाददाता की खबर है और बाइलाइन नहीं है। इसके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को एलान किया कि भारत कोविड-19 टीकों का केंद्रीयकृत प्रापण की पुरानी व्यवस्था पर वापस जाएगा, 18-44 आयुवर्ग के लिए भी मुफ्त टीके मुहैया कराए जाएंगे और 25 प्रतिशत प्रापण निजी क्षेत्र के लिए खुला रखा जाएगा। यह व्यवस्था 21 जून से लागू होगी। 

इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर हरिकिशन शर्मा की बाईलाइन से है। इसका पहला पैरा इस प्रकार है, “टीका नीति केंद्र को अपने हाथों में ले लेना चाहिए जैसे राज्यों के कोरस और सुप्रीम कोर्ट के जांच करने वाले सवालों के बीच अपनी सरकार की कोविड-19 टीका नीति को पलटते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को एलान किया कि केंद्र 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को 21 जून से टीका लगाने के लिए निशुल्क टीका मुहैया कराएगा। 

टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर टाइम्स न्यूज नेटवर्क की है और कोई बाईलाइन नहीं है। खबर इस प्रकार है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को 18 पार लोगों के लिए 21 जून से निशुल्क कोविड-19 टीकाकरण की घोषणा की और कहा कि केंद्र राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को वितरण के लिए टीके प्राप्त करने की शुरुआत करेगा जबकि देसी उत्पादन का 25 प्रतिशत निजी अस्पतालों के लिए उपलब्ध रहेगा जहां प्रति टीका अधिकतम 150 रुपए लेने की सीमा रहेगी। 

कहने की जरूरत नहीं है कि कल का पूरा मामला केंद्र सरकार और नरेन्द्र मोदी का डैमेज कंट्रोल एक्सरसाइज था। द टेलीग्राफ की मानें तो कुम्भकरण की नीन्द 300 दिन बाद खुली और राहुल गांधी ने इसकी जरूरत 14 अगस्त को ही बता दी थी। इसमें 25 प्रतिशत पैसे वालों और निजी अस्पतालों के लिए आरक्षित करने की कोई जरूरत नहीं थी उसके बावजूद इंडियन एक्सप्रेस की खबर पढ़िए लगता है राज्य सरकारों के दबाव में प्रधानमंत्री पर भारी मजबूरी आ गई जबकि वह देश की जरूरत है, देश के खर्चे पर देश का काम है। अकेले नरेन्द्र मोदी के कारण यह घोषणा कोई 10 महीने लेट हो गई पर प्रस्तुति ऐसी है जैसे कोई अहसान किया गया हो। 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध अनुवादक हैं।


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