निर्मला का राहुल पर हमला: उल्टा चोर कोतवाल पर निशाना साधे! 


अखबार ने लिखा है कि वित्त मंत्री यह कहती लग रही थीं कि सरकार की कथित गलतियों की आलोचना करना देश को अपमानित करने की तरह है। इस देश के लोग नागरिक हैं, रियाया नहीं और उन्हें किसी की भी आलोचना करने का अधिकार है। इसकी तुलना देश को बदनाम करने से नहीं की जा सकती है। सरकार देश के नागरिकों से बनती है न कि नागरिक सरकार से बनते हैं। विपक्ष का सांसद क्या भारत के लिए डूम्सडे मैन है या वे अपना काम कर रहे थे जब यह बता रहे ते कि सरकार अपना काम नहीं कर रही है।


संजय कुमार सिंह संजय कुमार सिंह
काॅलम Published On :


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने शनिवार को कहा कि राहुल गांधी संभवतः भारत के लिए ‘डूम्सडे मैन’ बन रहे हैं। वेबस्टर डिक्सनरी के अनुसार डूम्सडे का मतलब होता है,  “जबरदस्त विध्वंस और मौत का दिन।” भारत में कयामत या बर्बादी के ऐसे दिन के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि जो हो रहा है वह सबके सामने है और दुनिया की नजर भी इस पर है। भले आप आंतरिक मामला मानिए और कहिए कि दुनिया इसपर प्रतिक्रिया नहीं कर सकती है। बेशक, बर्बादी का कारण पहले का या भविष्य में लिया जाने वाला सरकारी निर्णय हो सकता है। अगर किसी प्राकृतिक आपदा के कारण ऐसा हो भविष्यणावी न होने से लेकर बचाव और सुरक्षा के उपाय नहीं कर पाने के कारण ही आएगा या आ सकता है। 

देश में विपक्ष का नेता इस स्थिति में कभी हो ही नहीं सकता है। पर प्रचारकों की सरकार जो न साबित करने की कोशिश करे। अगर याद दिलाने भर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी मान लें तो राहुल गांधी यह काम भी बखूबी कर रहे हैं। सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने और मीडिया द्वारा नहीं के बराबर रिपोर्ट किए जाने के बावजूद। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने अब तक जो सब किया है उनमें बहुत से काम इस श्रेणी में आएंगे। इसीलिए मैंने ‘उल्टा चोर कोतवाल पर निशाना साधे’ शीर्षक लगाया है। द टेलीग्राफ का शीर्षक है, “डूम्स डे मैन वह होता है जो सवालों से भागता है।” अखबार ने उपशीर्षक लगाया है, “विपक्ष को अपना काम करने दीजिए।” 

आगे अखबार ने लिखा है कि वित्त मंत्री यह कहती लग रही थीं कि सरकार की कथित गलतियों की आलोचना करना देश को अपमानित करने की तरह है। इस देश के लोग नागरिक हैं, रियाया नहीं और उन्हें किसी की भी आलोचना करने का अधिकार है। इसकी तुलना देश को बदनाम करने से नहीं की जा सकती है। सरकार देश के नागरिकों से बनती है न कि नागरिक सरकार से बनते हैं। विपक्ष का सांसद क्या भारत के लिए डूम्सडे मैन है या वे अपना काम कर रहे थे जब यह बता रहे ते कि सरकार अपना काम नहीं कर रही है। राहुल गांधी ने जो मुद्दे उठाए उनका जिक्र करते हुए अखबार ने बताया है कि असल में इनसे भारत की अर्थव्यवस्था खराब हुई है। और कहने की जरूरत नहीं है कि इसकी शुरुआत नोटबंदी से होती है। 

इसके अलावा राहुल गांधी ने कोविड महामारी का जिक्र किया था और अखबार ने बताया है कि राहुल गांधी ने 12 फरवरी 2020 को ही चेतावनी दे दी थी। इसके बावजूद 24 परवरी को नमस्ते ट्रम्प का आयोजन किया गया था। तीन नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। दूसरी ओर, राहुल गांधी चेतावनी पर चेतावनी देते रहे। अखबार के अनुसार राहुल गांधी ने जो तीसरा मुद्दा उठाया था वह है, प्रवासी मजदूरों का संकट। अखबार ने लिखा है कि राहुल गांधी ने लॉकडाउन शुरू होने के बाद कुछ ही दिन में संकट को महसूस कर लिया था। यह एक ऐसा विषय है जिसे मुख्यधारा की मीडिया के एक वर्ग ने नजरअंदाज किया। 

अखबार ने लिखा है कि शनिवार को बजट पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने सीमा के मुद्दे को उठाया और कहा, जब सीमा पर संकट था तो वे हमसे बात करने की बजाय दूतावास से बात कर रहे ते और सीमा के बारे में जानकारी ले रहे थे। संभवतः वे चीन के साथ डोकलाम विवाद की चर्चा कर रही थीं। अखबार ने लिखा है कि इसके बाद से लद्दाख सीमा की घाटियों में काफी पानी बह चुका है और भारत सरकार के कई नेता चीन का नाम लेने में भी डरते हैं। दूसरी ओर, राहुल के बारे में अखबार ने लिखा है कि वे लगातार इस विषय पर बोलते रहे हैं और निडर रहे हैं। वैसे ही जैसे विपक्ष के एक सांसद को होना चाहिए। अखबार ने तारीख-वार चीन पर राहुल के बयानों का उल्लेख किया है। 

राहुल का अंतिम मुद्दा किसान आंदोलन था। अखबार ने लिखा है तो विपक्ष के सांसद ने सबसे पहले किसानों की गहरी नाराजगी समझ ली थी। सरकार ने तब ध्यान नहीं दिया और अब यह मामला इतना बड़ा हो चुका है जिसका सामना नरेन्द्र मोदी ने पहले कभी नहीं किया है। अंतर में अखबार ने पूछा है, डूम्सडे मैन? सुनने में तो लगता है कि विपक्ष का सांसद अपना काम करने की कोशिश कर रहा है। अखबार ने अंदर के पन्ने पर एक और खबर छापी है। शीर्षक है, “निर्मला ने ‘डूम्सडे’ का का निशाना साधा, राहुल बेपरवाह।”

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध अनुवादक हैं।

 


मीडिया विजिल जनता के दम पर चलने वाली वेबसाइट है। आज़ाद पत्रकारिता दमदार हो सके, इसलिए दिल खोलकर मदद कीजिए। अपनी पसंद की राशि पर क्लिक करके मीडिया विजिल ट्रस्ट के अकाउंट में सीधे आर्थिक मदद भेजें।

Related



मीडिया विजिल से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।