पहला पन्ना: सरकार झूठे तर्क दे और अख़बारों को कुछ याद न आये!

संजय कुमार सिंह संजय कुमार सिंह
काॅलम Published On :


आज आम सहमति वाली लीड का दिन नहीं है और दिल्ली में लॉकडाउन 17 मई तक बढ़ने की खबर दिल्ली के अखबारों में लीड हो सकती थी पर इंडियन एक्सप्रेस की लीड सबसे अलग है। शीर्ष अदालत में शपथपत्र- फ्लैग शीर्षक वाली इस खबर के जरिए इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है, टीकाकरण की नीति पर पुनर्विचार के लिए कहने पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, हम पर भरोसा कीजिए, अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इस खबर में बताया गया है कि सरकार ने अलग वर्गों के लिए अलग मूल्य निर्धारण का बचाव करते हुए उसे उचित और न्यायसंगत बताया है। दिलचस्प यह है कि इंडियन एक्सप्रेस ने आज ही अपनी इस मुख्य खबर के साथ छपी एक अन्य खबर में बताया है कि एक मई से लागू केंद्र सरकार के नए नियमों के कारण अब टीकों की आपूर्ति में बाधा आ रही है। इससे पहले कल बताया गया था कि टीके निर्यात कर दिए गए। ऐसी खबरें अमूमन आजकल अखबारों में नहीं होती हैं।

हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में छपी एक खबर का शीर्षक है, टीके की कीमत समान रखने की सुप्रीम कोर्ट की सलाह को केंद्र सरकार ने नहीं माना। इसमें बताया गया है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि महामारी के समय ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की बहुत कम गुंजाइश होती है। अलग कीमत रखने के मामले को ऐसे देखिए कि हमारे देश में कानून है कि कोई भी उत्पाद एमआरपी से अधिक पर नहीं बेचा जा सकता है। इसलिए ब्रांडेड शीतल पेय और पानी की बोतलें भी बड़े महंगे रेस्त्रां में या तो उन्हीं बोतलों में नहीं बिकती हैं या उसी कीमत पर बिकती है। पानी के कुछ ब्रांड पटरी पर नहीं मिलते हैं। क्योंकि एक ही उत्पाद की दो कीमत कैसे रखी जाए। पर सरकार कह रही है कि महामारी के समय न्यायिक हस्तक्षेप की बहुत कम गुंजाइश होती है। हालांकि, इसे अदालत को देखना है। मेरी चिन्ता यह है कि अखबारों में यह सब क्यों नहीं छप रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस में कल (इतवार, 9 मई 2021) को खबर थी, कोविड रेसपांस, ऑक्सीजन ऑडिट और सप्लाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने टास्क फोर्स बनाई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन की आपूर्ति के मामले में अवमानना नोटिस जारी की थी। केंद्र सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। यह अखबार की कल की लीड का फ्लैग शीर्षक था। उपशीर्षक था, केंद्र ने ऑक्सीजन पर पैनल का सुझाव दिया, सभी मामलों को कवर करने की सुप्रीम कोर्ट की मांग से सहमति जताई और ऑक्सीजन ऑडिट के खिलाफ दिल्ली सरकार की अपील खारिज हो गई। अखबार ने कल इसके साथ एक और खबर छापी थी, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर्स, आईसीयू : सरकार ने डाटा निकाले (और पता चला) मांग में भारी वृद्धि हुई है।

इसके अलावा टीकों के निर्यात से संबंधित एक खबर वैक्सीन मैत्री-फ्लैग शीर्षक के तहत थी और मैंने कल इसका जिक्र किया था। इस खबर से साफ है कि देश की जरूरतें पूरी होने से पहले देश में बने टीके निर्यात कर दिए गए और उन देशों को किए गए जहां कोविड-19 का प्रभाव भारत से कम है और भारत में अब टीकों की कमी पड़ गई है। यही नहीं भारत में सरकार ने भिन्न वर्गों के लिए टीके की अलग कीमत स्वीकार की है जो एमआरपी कानून के आलोक में मजाक है और नागरिकों के एक वर्ग को टीका महंगा मिलेगा जबकि महामारी की इस स्थिति में टीके लगाने का काम सरकार को ही करना चाहिए। अगर सरकार नहीं कर सकती है तो पीएम केयर्स जैसे कोष का उपयोग ऐसे काम के लिए किया जा सकता है। पर सरकार के अपने तर्क है और वे कम दिलचस्प नहीं हैं। पर अखबार उनकी व्याख्या नहीं कर रहे हैं और यह बताने की तकलीफ नहीं उठा रहे हैं कि जिस सरकार को जनहितैषी होना चाहिए वह कैसे कारोबारियों के समर्थन में कुतर्क कर रही है।

 

टीके पर टैक्स संबंधी झूठ

बात इतनी ही नहीं है, टीके पर टैक्स का मामला भी है। कायदे से जब टीका सरकार को लगवाना चाहिए और वह नहीं लगवा रही है तो आम नागरिकों को कम से कम इसपर टैक्स में छूट मिलनी चाहिए। पर वह भी नहीं है और वित्त मंत्री ने बताया है कि यह संभव नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर सिंगल कॉलम में है जबकि वित्तमंत्री गलत बयानी कर रही हैं उसकी कोई चर्चा नहीं है। मुझे याद है, जीएसटी लागू हुआ था तो सैनिटेरी नैपकिन पर टैक्स लगाने का मुद्दा उठा था। इसे महिलाओं के लिए जरूरी माना जाता है और उन दिनों इसे सस्ते में उपलब्ध कराने की जरूरत आदि से संबंधित एक फिल्म आई थी। इस कारण यह एक गंभीर आयटम था। अधिकारियों के ध्यान में लाए जाने पर तब भी यही कहा गया था कि यह संभव नहीं है। पर बाद में इसे टैक्स फ्री कर दिया गया। ना तब किसी ने पूछा और ना अब टाइम्स ऑफ इंडिया (या किसी अन्य अखबार को) याद है कि ऐसा हो चुका है। यह अलग बात है कि यही जीएसटी व्यवस्था का नुकसान है जो उस समय बताया गया था पर ध्यान नहीं दिया गया और जबरन थोप दिया गया।

 

उत्तरप्रदेश में सब ठीक

उत्तरप्रदेश में सब ठीक के जवाब में इंडियन एक्सप्रेस ने जो श्रृंखला शुरू की है उसके तहत आज कासगंज का विवरण है। इसमें बताया गया है कि कोविड के बढ़ते मामलों के बावजूद किसी भी राजनीतिक दल की जमीन पर उपस्थिति नहीं है। इसके साथ ही सिंगल कॉलम में एक खबर है, गंगवार ने बरेली में कोविड (के मरीजों) की देखभाल की खराब सुविधा का मुद्दा उठाया। संतोष गंगवार भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री हैं और अपने क्षेत्र में सुविधाएं कम होने का मामला उठाया है तो यह निश्चित रूप से बड़ी खबर है। खास कर उत्तरप्रदेश में सब ठीक है के दावे के बाद। लेकिन यह खबर प्रमुखता से दिखी नहीं। उत्तर प्रदेश में सुविधाओं की कमी और नागरिकों की परेशानियों से संबंधित भाजपा नेताओं के वीडियो इधर-उधर दिखते रहे हैं पर उसकी खबर किसी अखबार में शायद पहली बार दिखी है। दि हिन्दू में यह तीन कॉलम में दो लाइन के शीर्षक के साथ है। दूसरे अखबारों में यह खबर नहीं है या इतनी प्रमुखता से नहीं है। उत्तर प्रदेश की एक और खबर जो अखबारों में प्रमुखता से नहीं है वह है, अस्पतालों में ऑक्सीजन का अत्यधिक उपयोग हो रहा है। मुख्यमंत्री ने खपत ‘संतुलित’ करने के लिए कार्रवाई का आदेश दिया है। (द हिन्दू)। इसी में खबर है, उत्तर प्रदेश में कोविड-19 पर प्रतिक्रिया से गंगवार नाखुश उपशीर्षक है, श्रम मंत्री ने मुख्य़मंत्री से कहा, मरीज (अस्पतालों में) दाखिले के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

 

असम में शपथग्रहण

असम में आज भाजपा की सरकार बनेगी और हिमन्त बिस्व शर्मा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। द टेलीग्राफ में इसका शीर्षक है, मास्क को गैर जरूरी बताकर मशहूर हुए सरमा ने मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा किया। इस खबर के अनुसार भाजपा को इस निर्णय पर पहुंचने में सात दिन लगे। और उसने सुनिश्चित किया कि सत्ता का स्थानांतरण सहज हो और इसके लिए सोनोवाल से ही उनके उत्तराधिकारी के नाम का प्रस्ताव करवाया गया है। इसमें कुछ नया नहीं है। पहले भी यह सब होता रहा है। पहले खूब छपता भी था अब बहुत कम छपता है। पेश हैं कुछ अन्य शीर्षक

1. द हिन्दू
हिमन्त आज असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। उपशीर्षक है, सोनोवाल ने भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके नाम का प्रस्ताव किया।
2. इंडियन एक्सप्रेस
उत्तरपूर्व में भाजपा को आगे बढ़ने की शक्ति देने वाले हिमन्त सरमा असम के मुख्यमंत्री होंगे। अखबार ने एक्सप्रेस एक्सप्लेन्ड में उनके मुख्यमंत्री बनने का मतलब बताया है।
3.हिन्दुस्तान टाइम्स
सरमा असम के अगले मुख्यमंत्री का पदभार संभालेंगे।
4. भाजपा ने असम के मुख्यमंत्री के रूप में सोनोवाल को छोड़कर उत्तरपूर्व के अपने संकटमोचक हिमन्त को असम का मुख्यमंत्री चुना।
पहले पन्ने की खबरें जो नहीं हैं

आज कोलकाता के द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर प्रकाशित निम्नलिखित खबरें दिल्ली के अखबारों में पहले पन्ने पर हो सकती थीं, होनी चाहिए थी जो नहीं हैं। हिन्दी अखबारों का हाल पाठक खुद तय करें।

1. छोटे और मध्यम उपक्रमों पर कोविड की दूसरी लहर का शुरुआती प्रभाव – अप्रैल में 34 लाख नौकरियां गईं
2. फेसबुक ने केरल के सबसे जाने-माने कवियों में से एक और साहित्य अकादेमी के पूर्व सचिव के सचिदानंदन का अकाउंट थोड़ी देर के लिए बंद किया क्योंकि उन्होंने राज्य में भाजपा की हार का मजाक उड़ाने वाले पोस्ट किए थे। सचिदानंदन दिल्ली में रहते हैं।
3. सीएए विरोधी आंदोलन में भूमिका के लिए गिरफ्तार, पिंजड़ा तोड़ की नताशा तकरीबन एक साल से जेल में है और कल उसके पिता महावीर नरवाल (71) का निधन हो गया। नताशा को जमानत पर रिहा करने के लिए कल ही ट्वीटर पर एक अभियान चलाया जाने वाला था और इसके लिए शाम सात से रात नौ बजे तक का समय तय था। पर शाम 6 बजे ही उनका निधन हो गया।

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध अनुवादक हैं।


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