पहला पन्ना: बेटी को पराया धन बताने वाली भाजपा की बखिया उधड़ी, पर ख़बर?


द टेलीग्राफ में आज भी पहले पन्ने पर आधा विज्ञापन है फिर भी पहले पन्ने की पांच खबरों में सिर्फ एक ऐसी खबर है जो बाकी चार में पहले पन्ने पर है और वह है, 250 में टीका लगेगा। आज अखबार की लीड है, “अगर डीएनए में होगा, तो दिख जाएगा।” फ्लैग शीर्षक है, “बेटी होने का क्या मतलब है?” इसके साथ अखबार ने बताया है कि आज के समय में भी एक केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता ने एक मीम फेसबुक और ट्वीटर पर शेयर किया है जो इस मुख्य विचार पर आधारित है कि बेटी पराया धन होती है। इसके साथ उस मीम की तस्वीर भी है। तस्वीर में अमित शाह की तस्वीर के साथ कहा गया है, बेटी पराया धन होती है। इस बार विदा कर देंगे। ऊपर ममता बनर्जी की फोटो के साथ लिखा है, मैं बंगाल की बेटी हूं।


संजय कुमार सिंह संजय कुमार सिंह
काॅलम Published On :


आज का दिन निर्विवाद लीड का नहीं है। लेकिन एक खबर है जो ‘द टेलीग्राफ’ को छोड़कर दिल्ली के चारो अखबारों में पहले पन्ने पर है। कांग्रेस में मतभेद बढ़ा – बेशक राजनीतिक रूप से बड़ी खबर है और इसका पहले पन्ने पर होना महत्वपूर्ण नहीं है। नहीं होने को आप महत्वपूर्ण कह सकते हैं। इस खबर के साथ हिन्दू ने पहले पन्ने पर ही एक खबर छापी है, “राजस्थान उपचुनाव : गहलौत, पायलट ने एकजुट मोर्चा खोला।” मुझे लगता है कि यह खबर कांग्रेस का भविष्य बताती है। आप इसे पार्टी की भविष्य की रणनीति या फिर गहलौत और पायलट के खुलकर आमने-सामने होने के बाद की स्थिति कह सकते हैं। हर तरह से यह कांग्रेस की अंदर की महत्वपूर्ण और ताजी सूचना है और जम्मू सम्मेलन अगर पार्टी से संबंधित एक खबर है तो यह दूसरी खबर है और दोनों को जाने-समझे बिना कांग्रेस की मौजूदा स्थिति के बारे में आप जो राय बनाएंगे वह पूरी या सही नहीं होगी। लेकिन एक खबर पहले पन्ने पर चार कॉलम और दूसरी अंदर के पन्ने पर कहीं (छोटी या बड़ी) रहे तो छूट सकती है। पत्रकारिता के नियमों और समझ की अपनी जानकारी को छोड़कर मैं यह कह सकता हूं कि ‘द हिन्दू’ में यह इसीलिए एक साथ है।

हिन्दुस्तान टाइम्स में ‘ग्रुप 23’ की खबर पहले पन्ने पर (अधपन्ने के बाद) लीड के साथ टॉप पर दो कॉलम में है। शीर्षक है, “पार्टी कमजोर हो रही है, कांग्रेस के ‘पत्र लेखकों’ ने कहा।” इसके साथ बड़े अक्षरों में एक इंट्रो है जो कपिल सिब्बल के हवाले से इस प्रकार है, “सच्चाई यह है कि कांग्रेस कमजोर हो रही है इसलिए हम यहां इकट्ठे हुए हैं ताकि मिलकर इसे मजबूत बना सकें।” अखबार ने इसके साथ प्रमुखता से यह सूचना दी है कि अंदर राहुल गांधी के बयान से संबंधित खबर है और बयान का प्रमुख अंश भी दिया है जो हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, हमलोगों ने पिछले छह वर्षों में संस्थाओं पर व्यवस्थित हमले देखे हैं …. मुझे आपको यह बताते हुए दुख हो रहा है कि भारत में लोकतंत्र खत्म हो चुका है।”

अखबार ने देश में लोकतंत्र खत्म होने के आरोप को पहले पन्ने पर नहीं छापा है पर एक वंशवादी और सवा सौ साल से भी ज्यादा पुरानी पार्टी के तथाकथित आंतरिक कलह को प्रमुखता दी है जबकि कलह का कारण ऐसी सोच या बयान को प्राथमिकता देना भी हो सकता है। और इसे आंतरिक लोकतंत्र भी कहा या बताया जा सकता है। बेशक, यह संपादकीय स्वतंत्रता या विवेक का मामला है। बाकी अखबारों में तो सूचना भी नहीं है। खबर है कि नहीं, मैंने अभी नहीं देखा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में भी यह खबर लीड के साथ टॉप पर है और शीर्षक है, “कांग्रेस हर दिन कमजोर हो रही है : ‘जी-23′”। इस खबर के साथ इंट्रो है, “पार्टी ने कहा, बेहतर हो राज्यों में चुनाव प्रचार करें”। इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर दो कॉलम की फोटो के साथ चार कॉलम में है हालांकि, शीर्षक दो कॉलम में तीन लाइन में है। शीर्षक है, “23 के समूह ने विरोध बढ़ाया, कांग्रेस ने जवाब दिया : जाइए, चुनाव प्रचार कीजिए।” यह दिलचस्प है कि आज फिर इन दोनों अखबारों के शीर्षक लगभग एक जैसे हैं। आज सिर्फ डिसप्ले अलग है और आज एक्सप्रेस का यह डिसप्ले (चार कॉलम में खबर दो कॉलम में शीर्षक) असामान्य तो है ही।

इंडियन एक्सप्रेस में आज पहले पन्ने पर जरा भी विज्ञापन नहीं है। पर एक फोटो है जो मेरे किसी अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है। हिन्दुस्तान टाइम्स के अधपन्ने को मिलाकर यहां एक पन्ने से ज्यादा जगह है फिर भी यह तस्वीर यहां पहले पन्ने पर नहीं है। फ्लावर पावर (फूलों की ताकत) शीर्षक से प्रकाशित इस फोटो का कैप्शन है, योगी आदित्यनाथ की सरकार ने शनिवार को माघ पूर्णिमा के मौके पर प्रयागराज में संगम पर इकट्ठा हुए श्रद्धालुओं के ऊपर फूल बरसाने की व्यवस्था की। एक लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष राज्य में एक धर्म के लोगों पर फूल बरसाना आलोचना या चर्चा का मुद्दा तो हो सकता है, खबर नहीं। खासकर, तब जब पहली बार न हो। पहले पन्ने पर इसे फ्लावर पावर कहना निश्चित रूप से ‘जर्नलिज्म ऑफ करेज’ और संपादकीय विवेक का मामला है।

आज पहले पन्ने की एक और प्रमुख खबर है, ढाई सौ रुपए में लगेगी वैक्सीन। इंडियन एक्सप्रेस ने अन्य सूचनाओं और खबरों के साथ इस मुख्य खबर का शीर्षक छह कॉलम में दो लाइन में लगाया है। द हिन्दू में यह सिंगल कॉलम की खबर है। शीर्षक है, अस्पताल प्रति खुराक 250 रुपए तक ले सकते हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने जिस खबर को लीड बनाया है लगभग वही सूचनाएं हिन्दू ने अंदर के पन्ने पर होने की जानकारी दी है। द हिन्दू में लीड है, कोविड-19 में उभार : मंत्रिमंडल सचिव ने स्थिति की समीक्षा की। आप देखिए कि हिन्दी के आपके अखबारों में ये खबरें हैं या नहीं और कैसे हैं।

अखबार ने इस खबर के साथ व्हीलचेयर पर ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ इंतजार करती एक महिला मरीज की तस्वीर छापी है जिसकी उम्र ज्यादा नहीं लग रही है और कैप्शन में बताया है कि महिला कोविड-19 जांच का इंतजार कर रही है। दिल्ली में कोविड जांच के लिए अभी भी ऐसे मरीजों को ऐसे इंजतार करना पड़ता है यह निश्चित रूप से खबर है और चौंकाने वाली जानकारी। पर हाल फिलहाल में पहले पन्ने की किसी खबर से ऐसा आभास नहीं हुआ था। किसी अन्य अखबार ने पहले पन्ने पर ऐसी जानकारी नहीं दी है।

द टेलीग्राफ में आज भी पहले पन्ने पर आधा विज्ञापन है फिर भी पहले पन्ने की पांच खबरों में सिर्फ एक ऐसी खबर है जो बाकी चार में पहले पन्ने पर है और वह है, 250 में टीका लगेगा। आज अखबार की लीड है, “अगर डीएनए में होगा, तो दिख जाएगा।” फ्लैग शीर्षक है, “बेटी होने का क्या मतलब है?” इसके साथ अखबार ने बताया है कि आज के समय में भी एक केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता ने एक मीम फेसबुक और ट्वीटर पर शेयर किया है जो इस मुख्य विचार पर आधारित है कि बेटी पराया धन होती है। इसके साथ उस मीम की तस्वीर भी है। तस्वीर में अमित शाह की तस्वीर के साथ कहा गया है, बेटी पराया धन होती है। इस बार विदा कर देंगे। ऊपर ममता बनर्जी की फोटो के साथ लिखा है, मैं बंगाल की बेटी हूं।

कहने की जरूरत नहीं है कि भाजपा बंगाल चुनाव जीतने के लिए तमाम हथकंडे अपना रही है और ये या ऐसे मीम भी होंगे। लेकिन यह खबर क्यों नहीं है? अखबार ने बताया है कि जवाब में तृणमूल कांग्रेस ने नारा दिया है, बंगाल अपनी बेटी को ही पसंद करता है किसी और को नहीं। अखबार ने लिखा है कि विवाद बढ़ा तो बाबुल सुप्रियो ने इसे हटा दिया। बाद में बाबुल ने द टेलीग्राफ से कहा कि उनकी दो बेटियां हैं। अखबार ने इस विवाद पर और भी जानकारी दी है। बेशक, यह बंगाल का मामला है (भाजपा का नहीं भी हो तो) और जरूरी नहीं है कि सभी अखबारों में पहले पन्ने पर हो ही। पर क्या यह खबर नहीं है? आपके अखबार में है?

द टेलीग्राफ की दूसरी बड़ी खबर है, “भारतीय मीडिया से आवाज निकली! पर यह नोदीप के खिलाफ है।” अखबार ने नोदीप के आरोप कल भी छापे थे। उसकी प्रेस कांफ्रेंस की खबर आज पहले पन्ने पर है जो किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नहीं दिखी। इस शीर्षक के साथ अखबार ने बताया है कि नोदीप से कल एक पत्रकार ने कहा, इसका मतलब है कि आप वसूली स्वीकार करती हैं। नोदीप बता रही थीं कि कैसे यूनियन ने एक औद्योगिक इकाई के कुछ मजदूरों को बाकी मजदूरी वसूलने में सहायता की थी। अखबार ने इसे आज अपने पहले पन्ने के कॉलम, ‘कोट’ में शामिल किया है।

 

ऊपर मैंने लिखा है कि आज हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले और उससे पहले के अधपन्ने पर किसी अखबार के एक पन्ने से ज्यादा खबरें हैं और इन्हें फोटो से नहीं भरा गया है। पाठकों की जानकारी के लिए मैं कुछ खबरों के शीर्षक लिखकर यह बताना चाहता हूं कि खबरें तो छप ही रही हैं, कुछ मीडिया संस्थानों से झुकने के लिए कहा गया होगा तो वे रेंगने लगे हैं। पहली (अधपन्ने पर) प्रमुख खबर का शीर्षक है, “एक महीने में पेट्रोल 4.87 रुपए और डीजल 4.99 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ।”

कहने की जरूरत नहीं है कि पेट्रोल की कीमत में वृद्धि समर्थकों पर सरकार के भरोसे का प्रतीक और पैमाना भी है। पेट्रोल की कीमत में वृद्धि की जानकारी देने से लोगों को समर्थकों पर सरकार के भरोसे का अंदाजा मिलता रहेगा। पहले पन्ने पर दूसरी प्रमुख खबर है, मीडिया संस्थानों के (वेब) साइट आईटी ऐक्ट की धारा 69 (ए) के तहत आने ही वाले हैं। मुझे लगता है कि ये खबरें निश्चित रूप से पहले पन्ने की हैं वैसे ही जैसे कोविड के मामले बढ़ने की लेकिन अखबार 250 में टीके की खबर को प्रमुखता दे रहे हैं।

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध अनुवादक हैं।

 

 


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