सीपी कमेंट्री: रिपब्लिक की ‘टीआरपी लूट’ के पीछे अर्गो का क्रिमिनल माइंड!

चन्‍द्रप्रकाश झा चन्‍द्रप्रकाश झा
काॅलम Published On :


आदमखोर बाघ मर जाता है  तो ऐरू गैरू नत्थू खैरू सभी मरे पड़े बाघ के पीछे खड़े होकर फोटो खिंचवाने लग जाते है. कमोबेश यही परिदृश्य अर्णव गोस्वामी (अर्गो) और उसके खबरिया टीवी चैनल रिपब्लिक के अंग्रेजी और हिंदी दोनों को लेकर पिछले 24 घंटे का है. हर टीवी चैनल पहले ही नंगा हो चुका अर्गो का कपड़ा फाड़ने में लगा है.

लेकिन गोदी मीडिया के दूसरे टीवी चैनल वालों और वालियाँ जरा अपने गिरेबां में भी झांक लें तो मेहरबानी होगी .

अर्गो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कथित समर्थन से, फोर्ब्स पत्रिका में छपी दुनिया के सबसे धनी मीडिया मठाधीशों की लिस्ट में शामिल इंदु जैन और उनके सुपुत्र समीर जैन और विनीत जैन की बेनेट कोलमैन कम्पनी का टाइम्स नाऊ न्यूज चैनल छोड़ खुद का चैनल खोलने का प्लान बनाया. समीर जैन अध्यात्म की शरण में चले गए हैं. इंदु जैन खुद कह चुकी हैं कि विनीत जैन के रात-बिरात घर लौटने का इंतजार करने वाला कोई नहीं है. विनीत जैन खुले आम कह चुके हैं कि उनका धंधा न्यूज का नहीं बल्कि विज्ञापन से कमाई का है .

बहरहाल , आर्गो के प्लान में हथियारों के सौदागर रहे और अभी भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सदस्य चंद्रशेखर ने अपने बेशुमार धन से खुल कर मदद की. कुछ धन आर्गो ने भी लगाया होगा.

आर्गो ने अपने चैनल का नाम ग्रीक दार्शनिक प्लेटो के ग्रंथ रिपब्लिक की नकल पर रख दिया. चैनल कुछ चल निकला. इसमें मोदी जी का यह बयान बहुत काम आया कि उन्हे राजकाज से तनिक भी फुरसत मिलती है तो वे सिर्फ आर्गो का शो देखते हैं.अपनी लच्छेदार अंग्रेजी पर अंग्रेज़ से भी ज्यादा घमंडी आर्गो ने जल्दी ही हिंदी चैनल भी खोल लिया. वह खुद हिंदी भी बोलने लगे.

आगे ये हुआ कि मोदी जी के ‘न्यू इंडिया’ के सुर में सुर मिलाने में सबसे आगे रह कर भी रिपब्लिक भारत हिंदी चैनल भी बुद्धू बक्सा वाले- वालियों की गला काट प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने लगा.

आर्गो शुरू से ही ‘क्रिमिनल माइंड’ है. इसके बारे में हम नेपाल नरेश बीरेंद्र, रानी ऐश्वर्या समेत शाही परिवार के 10 जनों की सामूहिक हत्या के तुरंत बाद 1 जून 2001 को काठमांडू से नई दिल्ली तक एक ही फ्लाइट में साथ आने के दौरान देखे दृश्य के हवाले से पहले ही फेसबुक पर एक पोस्ट में इंगित कर चुके हैं.

आर्गो ने अपने फासीवादी खिलौने की टीआरपी बढ़ाने के लिए ट्विटर आदि सोशल मीडिया पर हजारों फर्जी लोगों की लाईन लगा दी, जो अपराध है.

मुंबई पुलिस की क्राईम ब्रांच के कान अर्गो की हरकतों के कारण पहले से खड़े थे. उसने जांच कर आर्गो को अपने शिकंजे में कस लिया. उसके बैंक अकाउंट जब्त करने की नौबत आ गई बताई जाती है.

आर्गो को फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह की आत्महत्या के मामले में उसकी दोस्त रिया को फंसाने में बहुत मज़ा आया. क्योंकि उसके चैनल की टीआरपी आसमान छूने लगी. बिहार चुनाव के समय लोगों का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने की जो सियासत हुई वो अलग कमाई है उसकी.

रिया बॉम्बे हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद जमानत पर जेल से छूट गई. आर्गो का क्रिमिनल माइंड पूरे फॉर्म में आ गया. वह मुंबई पुलिस ही नहीं बॉम्बे हाईकोर्ट को भी कुछ उसी अंदाज में कहने की सोचने लगा जिस असभ्य अंदाज में उसने बुद्धू बक्सा पर कहा था :

उद्धव ठाकरे ( पॉज़ के बाद जी लगाकर) हम तुम्हारा इंटरव्यू करेंगे. वन टू वन. है हिम्मत ?

फिर जो खेल शुरू हुआ उसकी अभी एक बानगी भर दिखी है. मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है. संभव है आर्गो वहां से राहत हासिल कर अपनी छाती फुला कर कहे : भारत के 125 करोड़ लोग मेरे साथ हैं. कोई क्या उखाड़ लेगा , ये बात वह शायद कंगना राणावत की तरह न कहे . लेकिन उस पर साईकोटिक व्याधि ‘ इल्यूजन ऑफ ग्रंडियर सवार लगता है. वह इतना गिरा हुआ है कि खुद बचने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है.

जो आर्गो का हुआ वहीं हाल गोदी मीडिया के दूसरे मालिकों और उनके एंकर एंकारानी का भी आज नहीं तो कल हो सकता है. क्योंकि ये जो पब्लिक है सब जानती है.

 



सीपी नाम से चर्चित चंद्रप्रकाश झा,यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया के मुम्बई ब्यूरो के विशेष संवाददाता पद से रिटायर होने के बाद तीन बरस से अपने गांव में खेती-बाडी करने और स्कूल चलाने के साथ ही स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन भी कर रहे हैं. उन्होने भारत की आज़ादी , चुनाव ,  अर्थनीति , यूएनआई का इतिहास आदि विषय पर कई किताबे लिखी हैं.वह मीडिया विजिल के अलहदा चुनाव चर्चा के स्तम्भकार हैं. वह क्रांतिकारी कामरेड शिव वर्मा मीडिया पुरस्कार की संस्थापक कम्पनी पीपुल्स मिशन के अवैतनिक प्रबंध निदेशक भी हैं, जिसकी कोरोना- कोविड 19 पर अंग्रेजी–हिंदी में पांच किताबों का सेट शीघ्र प्रकाश्य है. मीडिया विजिल के लिये उनकी यदा-कदा सीपी कमेंट्री विभिन्न मुद्दो की उन बातो पर है जो गोदी मीडिया नहीं बताती है. उनका ‘चुनाव चर्चा’ कालम भी अलग से बरकरार रहेगा.

 



 


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