पढ़ोगे – लिखोगे बनोगे खराब

कपिल शर्मा कपिल शर्मा
काॅलम Published On :


दोस्तों, विश्वगुरु बनने के लिए आतुर, बस छलांग मार कर पदवी कब्जाने को तैयार महान भारतभूमि के स्कूलों की अभी नेशनल अचीवमेंट सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई। सुन कर जी का धक्का सा लगा। क्या कहें, कहां एक फकीर झोला उठाकर पूरी दुनिया में भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए धक्के खाता फिर रहा है, और कहां ये नालायक आज की पीढ़ी अपना छोटा सा कर्तव्य पूरा नहीं कर रही है। षड्यंत्र की हद देखिए, इसमें तीसरी कच्छा से लेकर आठवीं कच्छा तक के छात्र शामिल हैं, अब बताइए, इन्हें पाकिस्तान अरसाल किया जाए, या फिर यहीं इन पर देशद्रोह की धारा 124 ए का मुकद्मा चलाया जाए। सारे किए-कराए पर पानी फेर दिया।
स्कूल और बच्चा
कुछ सीखिए हमारे बी सी सी आई के अध्यक्ष से, कैसे शानदार फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते-बतियाते हैं, हमारे एंटायर पोलिटिकल साइंस के महाप्रभु जो इतने पढ़े-लिखे हैं कि टेलीप्राॅम्पटर तक उनकी बराबरी नहीं कर पाता, लिखते हैं, तो पेन हवा में उठा रहता है और रजिस्टर पर मन की बात लिख जाती है। और दूसरी तरफ ये बच्चे, इतना तो कर ही सकते थे कि थोड़ा प्रधानमंत्री का सम्मान करते हुए, लाज रख लेते। अब हम मुसीबत में हैं कि इसकी क्रोनोलाॅजी हमें कौन समझाएगा।
जन्मजात प्रतिभा के धनी
आज हमारे देश में जहां महान विभूतियां अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं, वहीं इन स्कूली बच्चों के बारे में सोच कर सिर शर्म से झुक जाता है। प्रतिभाओं के धनी हमारे देश में ज्ञानदेव आहूजा नामक एक ऐसे महान ज्ञानी हैं, जो जे एन यू जैसी जगहों से कंडोम के अलावा छोटी हड्डियां और बड़ी हड्डियां तक सही-सही गिन कर बता सकते हैं, आदरणीय जस्टिस एम सी शर्मा हैं, जिन्होने डार्विन की थ्योरी आफ इवोल्यूशन को चुनौती देते हुए ये रहस्य उजागर किया कि, ”मोर आजीवन ब्रह्मचारी होता है, और मोरनी उसके आंसू पीकर गर्भवती होती है।” ऐसी महान प्रतिभाओं के देश में स्कूली छात्रों के ज्ञान का ऐसा हड़ास…..शर्म की बात है, राष्ट्रीय शर्म की बात है। धर्म की हानि हो रही है मित्रों, मेरे ख्याल में इसीलिए इस देश में ज्ञान की भी हानि हो रही है। ये तो अच्छा हुआ कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाई जा रही है, जो इस दिशा  में जा रही है कि जल्दी ही इन नालायक, देशद्रोही बच्चों से, जो देश का नाम ऐसे डुबा रहे हैं, हमारा पीछा छूटेगा और सिर्फ उन्हीं बच्चों को पढ़ने की सुविधा मिलेगी जिनके मां – पिता बहुत पैसा दे सकें। मेरा मानना ये है कि ग़रीबों को शिक्षा जैसी बहुमूल्य चीजें नहीं मिलनी चाहिए, शिक्षा और ज्ञान, बड़े लोगों का आभूषण हैं। बुरा हो 1993 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का, बुरा हो इन कम्युनिस्टों का, जो हर ऐरे-गैरे, नत्थू खैरे को शिक्षा देने की बात करते हैं, शिक्षा का अधिकार उन्हीं का सूट करता है, जिनकी अंटी में उसे हासिल करने का नावा हो। 
अभी पंजाब और राजस्थान दो ऐसे राज्य हैं, जिन्हें इस सर्वे में औसत बताया गया है, बाकि सभी जगह, जिसमें दिल्ली भी शामिल है, सहजज्ञान में गिरावट ही दर्ज की गई है। दिल्ली वो जगह है दोस्तों जहां से शिक्षा की गंगा बस बहने ही वाली थी। इतना प्रचार दिल्ली के स्कूलों का हुआ, एजुकेशन सिस्टम का  हुआ कि लगने लगा था कि बस कुछ ही देर में आक्सफोर्ड और एम आई टी के बच्चे अपने स्कूल – काॅलेज छोड़ कर दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने के लिए आने वाले हैं। लेकिन इस सर्वे रिपोर्ट ने सब गुड़-गोबर कर दिया। हमारे देश के प्रधानसेवक शिक्षा को कितना महत्व देते हैं, कि उन्होने ”एग्जाम वरियर्स” के नाम से एक किताब लिख मारी, पूरी दुनिया में अकेला ऐसा प्रधानमंत्री जिसने पद पर रहते हुए किताब लिखी और प्रकाशित की हो, वो भी छात्रों के हितों को देखते हुए। ”और खबरदार किसी ने इस दावे को झुठलाने की कोशिश की, सच में एफ आई आर कर दी जाएगी”।
अड़ियल शिक्षकों की पिटाई
ये सही है कि हमारे देश में पिछले कुछ दिनों में ही 51000 से ज्यादा स्कूल बंद कर दिए गए हैं, हमारे ही देश में शिक्षकों को पुलिस सड़कों पर पीटती है, हजारों लाखों पद खाली पड़े हैं जिन पर भर्ती की कोई संभावना दूर-दूर तक नज़र नहीं आती, बल्कि ठेके पर पढ़ाने के लिए शिक्षकों  दिहाड़ी पर रखा जाता है, शिक्षकों की हर भर्ती में घोटाला हो जाता है, और तो और, परीक्षा तक में लीक, घोटाला आदि आम है। लेकिन छात्रों को इन बातों में नहीं पड़ना चाहिए, उन्हें अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। आजकल स्कूलों में मन की बात सुनना अनिवार्य कर दिया गया है, कहीं-कहीं गीता पाठ आदि भी अनिवार्य है। इन चीजों पर ध्यान देना चाहिए। आदर्श विद्यार्थी बनना चाहिए। पर हमारे यहां तो छात्रों को हिजाब पहनने में ज्यादा दिलचस्पी है, जिन्हें ये समझ नहीं आता कि हिजाब पहनने से ज्ञान दिमाग में घुसने में रुकावट होती है। क्या तो मिनिस्टर, क्या छुटभैये नेता, क्या बजरंग दल और बाकी हिंदु समाज, क्या ज्यूडिशरी, क्या मीडिया, सब एक सुर होकर ये समझाने लगे थे कि हिजाब से शिक्षा का नुक्सान होता है, लेकिन कोई समझने को तैयार हो तो समझे ना। इन्होने तो ठान रखी है कि ये देश का नाम डुबोकर मानेंगे। इन छात्रों को जिनका ये सर्वे किया गया है, कोई ऐसी सज़ा देनी चाहिए कि वो मिसाल बन सके, जैसे उन्हें यू ए पी ए में अंदर किया जा सकता है, फिर चलता रहे मुकद्मा, बेल तो मिलने से रही, बचा याद करेंगे।
हालांकि वर्तमान सरकार बहुत समझदार और हाज़िरजवाब है, लेकिन फिर भी मेरा एक सुझाव है। एक तो नई शिक्षा नीति के तहत जो कार्यक्रम चल रहा है, उसे और तेज़ी से लागू किया जाना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा स्कूलों को बंद कर देना चाहिए, और शिक्षा को पूरी तरह निजी हाथों में सौंप देना चाहिए। लेकिन इसके अलावा छात्रों को ज्ञान के असीमित परिमाण की मिसाल देने के लिए तमाम केन्द्रीय व राज्य के सांसदों, विधायकों, आदि का भी नेशनल अचीवमेंट सर्वे करवाना चाहिए, ताकि पूरी दुनिया को ये पता चल सके कि हमारे इस महान देश में कैसी-कैसी विभूतियां इन पदों को सुशोभित कर रही हैं, और साथ ही इन नालायक छात्रों को पता चल सके कि वे जिस देश का नाम डुबो रहे हैं, उनमें कैसी – कैसी महान प्रतिभाएं निवास करती हैं।
लिखने को बहुत कुछ है, जब दिल में दर्द होता है, तो ऐसे ही ख्याल मन में आते हैं, लेकिन आखिर कोई कितना लिख सकता है, थोड़े को ही बहुत समझें। ज्ञान असीमित होता है, और ज्ञानी प्रधानमंत्री होता है, जो नहीं होता, वो या तो ज्ञानी नहीं होता, या प्रधानमंत्री नहीं होता। ज्ञान की इस ”असीमितता” विद्वजनों को ध्यान होगा, हर बार नया शब्द दे रहा हूं। ग़ालिब ने कहा था…
क़ातिब ने लिख तो दी मगर ऐ दोस्त
पढ़ेगा कौन इसे, बहुत महंगी किताब है
बाकी आप समझदार हैं, क्योंकि पुरानी पीढ़ी के हैं, इसलिए आप से अपील की है, इस आज की पीढ़ी से अब कोई उम्मीद नहीं बची।