Home ओप-एड ब्लॉग गाज़ीपुर जेल से सत्याग्रहियों का देशवासियों के नाम खुला पत्र

गाज़ीपुर जेल से सत्याग्रहियों का देशवासियों के नाम खुला पत्र

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चौरीचौरा, गोरखपुर से राजघाट नई दिल्ली के लिए निकली ‘नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा’ 200 किलोमीटर की यात्रा करके 11 फरवरी को गाजीपुर पहुंची, जहां स्वागत करने के स्थान पर पुलिस ने सत्याग्रही पदयात्रियों को शांतिभंग की धाराओं में जेल भेज दिया था। बुधवार को जब इनकी ज़मानत की अर्जी स्थानीय एसडीएम के यहां लगायी गयी तो उसने बेल बॉल्ड भरने का जो आदेश दिया था. जेल में बंद 10 सत्याग्रहियों के खिलाफ़ एसडीएम (सदर) ग़ाज़ीपुर ने ज़मानत की शर्त रखी है कि प्रतिव्यक्ति 2.5 लाख के दो बेल बॉन्ड भरे जाएं और साथ ही हर बंदी के लिए गारंटर के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारी ज़मानत दें। इन सभी सत्याग्रहियों 13 फरवरी से जेल में भूख हड़ताल शुरू किया है. अब उन्होंने भारतवासियों के नाम एक खुला पत्र लिखा है: संपादक


प्रिय देशवासियों, 

आज जब यह पत्र आपको लिख रहे हैं तब हम 9 सत्याग्रही गाज़ीपुर जिला जेल के बैरक संख्या 10 व एक महिला साथी जो पेशे से पत्रकार हैं महिला बैरक में बंद हैं. यह बिना जाने की हमारा गुनाह क्या है और जिला प्रशासन हमें कब तक बंद रखेगा हम सभी सत्याग्रहियों ने अनशन पर जाने का फैसला किया है जहाँ हमने दिनांक 13 फरवरी से अन्न त्याग कर दिया है.

ज्ञात हो की हम सभी सत्याग्रही गांधी जी के प्रेम, सद्भावना, भाईचारा व सौहार्द के सन्देश को लेकर दिनांक 02 फरवरी को चौरी-चौरा (गोरखपुर) से राजघाट (दिल्ली) तक की “नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा” पर निकले थे जहाँ हम गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, मऊ होते हुए लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर गाज़ीपुर पहुंचे थे जहाँ हमें बिरनो थाना क्षेत्र के अंतर्गत सुल्तानपुर चौराहे के पास भारी पुलिस बल के साथ जिले के अधिकारियों की मौजूदगी में गिरफ्तार कर लिया गया.

देश में CAA-NRC आंदोलन के पक्ष-विपक्ष के बीच उत्तर प्रदेश में 23 लोगों की मौत समेत देशभर में सैकड़ों लोग घायल हुए. ऐसे में बतौर नागरिक हमारा कर्तव्य है कि हम उन 23 परिवारों समेत देश भर के सभी प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हों व देश व समाज में बढ़ रही आपसी नफरत, विभाजनकारी विचारधारा के प्रति उत्तर में गाँधी के अहिंसा, प्रेम, सौहार्द जैसे मूल्यों को समाज में स्थापित करने के साथ ही खुद के अंदर के डर व हिंसा को चुनौती देना है. हमारा साथ ही सरकार से यह सवाल भी है कि गाँधी के सन्देश को साथ लेकर चल रहे 10 निहत्थे युवाओं से किस प्रकार का खतरा है कि उन्हें यात्रा के बीच से उठाकर जेल में डाल दिया गया.

प्रियेश पांडेय
मनीष शर्मा
प्रदीपिका शारास्वत
मुरारी कुमार
अतुल यादव
रविंद्र कुमार रवि
शेष नारायण ओझा
अनंत शुक्ल
नीरज राय
राज अभिषेक सिंह


 

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