ब्राह्मणों तक सीमित नहीं है ब्राह्मणवाद, हालाॅंकि वह इसका जनक है-डॉ.आम्बेडकर

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आंबेडकर उत्सव-2020

‘आपको एक ऐसी राजनीतिक पार्टी की जरूरत है, जो वर्गहित और वर्गचेतना पर आधारित हो और ऐसी पार्टी कोई दूसरी नहीं, सिर्फ ‘इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी’ है, जिसमें आप अपने हितों को नुकसान पहुॅंचाए बिना शामिल हो सकते हैं’- यह बात डा. आंबेडकर ने, 12 और 13 फरवरी को मनमाड में आयोजित जी.आई.पी.रेलवे के दलित वर्ग सम्मेलन में अपने अध्यक्षीय भाषण में कही।

डा.आंबेडकर ने कहा कि एक अर्थ में यह पहला सम्मेलन नहीं है। पर दूसरे अर्थ में यह अपनी तरह का पहला सम्मेलन है। अब तक दलित वर्गों ने अपने सामाजिक कष्टों को दूर करने के लिए आन्दोलन किया है। उन्होंने अपनी आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिए कदम नहीं उठाया है। यह पहली बार है, जब वे अपने आर्थिक कष्टों पर बात करने के लिए इकटठे हुए हैं। पहले वे ‘परिया’ के रूप में सभा करते थे, पर आज वे कामगार के रूप में सभा कर रहे हैं।

मेरे विचार में इस देश में दो शत्रु हैं, जिनके साथ मजदूरों का रोज पाला पड़ता है। वे दो शत्रु हैं ब्राह्मणवाद और पूॅंजीवाद। हमारे आलोचक हम पर इसलिए आरोप लगाते हैं, क्योंकि वे ब्राह्मणवाद को एक शत्रु मानने में विफल हो गए हैं, जबकि मजदूरों को उसका रोज सामना करना पड़ता है। जब मैं यह कहता हूॅं कि ब्राह्मणवाद एक शत्रु है, तो मैं भ्रमित करना नहीं चाहता हूॅं। ब्राह्मणवाद से मेरा मतलब ब्राह्मण समुदाय के विशेषाधिकार और हितों से नहीं है, और न इस अर्थ में मैं इस शब्द का प्रयोग कर रहा हूॅं। ब्राह्मणवाद से मेरा अभिप्राय स्वतन्त्रता, समानता और बन्धुता के इन्कार से है। उस अर्थ में यह सभी वर्गों में मौजूद है, सिर्फ ब्राह्मणों तक सीमित नहीं है, हालाॅंकि वह इसका जनक है।

 

(दि टाइम्स ऑफ इंडिया, 14 फरवरी 1938 में छपी रिपोर्ट)


 


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