‘युवा किसान दिवस’ पर युवाओं का संकल्प- बुजुर्गों की पगड़ी को नीचा नहीं होने देंगे!

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मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ और एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर चल रहा किसान आंदोलन आज 94वें दिन भी जारी रहा। खेती सेक्टर और किसान आन्दोलन में युवाओं की भागीदारी के सम्मान में आज ‘युवा किसान दिवस’ मनाया गया। इस दिन ‘संयुक्त किसान मोर्चा’  के सभी मंचों पर मंच संचालन युवाओं द्वारा किया गया और सभी वक्ता भी युवा ही थे। आज के इस कार्यक्रम ने गोदी मीडिया के उस प्रोपेगेंडा को फेल किया है जिसमें बार बार यह कहा जा रहा था कि अब युवा ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ के नेताओँ के साथ नहीं हैं।

मंच की शुरुआत आज सुबह शहीद हुए 18 साल के नवजोत सिंह की श्रद्धांजलि देते हुए हुई। गणतंत्र दिवस पर पुलिस की गोली से शहीद हुए उत्तराखंड के (स्वर्गीय) नवरीत सिंह के दादा बाबा हरदीप सिंह ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि जीत का एकमात्र रास्ता निरंतर संघर्ष से है। मंच पर मौजूद युवाओं ने कसम खाई कि वे इस आंदोलन को सफल बनाएंगे और वे शहीदों के बलिदान को बेकार नहीं जाने देंगे।

इस दौरान युवाओं ने रोजगार का भी मुद्दा उठाया और पिछले दिनों से देश में चल रहे ऑनलाइन कैंपेन का भी समर्थन किया। बढ़ रही बेरोजगारी और शिक्षा के निजीकरण का मुद्दा भी युवाओं ने इस मंच पर रखा। युवाओं ने कहा कि अब हमें समझ में आ गया है कि सरकार युवाओं को खेती से निकालकर शहरों में सस्ते मजदूर के रूप में तैयार करना चाहती है जिसे वे कतई स्वीकार नहीं करेंगे।

युवाओं ने संस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। युवा गीतकार रोमी घमाना ने आन्दोलनजीवी गीत लॉच किया। युवाओं ने इस दौरान मोदी सरकार को न सिर्फ किसान विरोधी कहा बल्कि युवा विरोधी और विद्यार्थी विरोधी भी करार दिया।

‘संयुक्त किसान मोर्चो’ के आह्वान पर आज़ सुनहेड़ा जिराहेड़ा बॉर्डर पर किसान आंदोलन के तीन महीने पूरे होने पर युवाओं के योगदान को सम्मानपूर्वक ‘युवा किसान दिवस’ के रूप में मनाया गया।

मंच से युवाओं ने खूब जोश और जज्बे का परिचय दिया और अपने वक्तव्य में कहा कि अब ये लड़ाई किसान के सम्मान की लड़ाई है और हम अपने बुजुर्गों की पगड़ी को नीचा नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि अब ये आंदोलन हमारे वजूद बचाने का आंदोलन हो गया है इसलिए देश का युवक अपने पुरखों की जमीन और जमीर को बचाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर अपने बड़ों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि आज़ जो हम युवकों को सम्मान दिया गया है, जो उम्मीद हमसे लगाई गई है, और जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, अपनी जान पर खेलकर भी उस जिम्मेदारी को पूरा करेंगे।

इसके साथ ही ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के उस फ़ैसले का स्वागत किया है जिसमें मजदूर नेता नौदीप कौर को जमानत दी गई है, और वो जेल से रिहा हो गईं। किसान मोर्चा ने कहा कि किसान मजदूर एकता को सार्थक करते हुए नोदीप इस आन्दोलन की ताकत रहीं हैं। नोदीप के साथ ही किसान आन्दोलन को समर्थन कर रहे शिव कुमार को भी पुलिस ने हिरासत में लिया हुआ है। हाल ही आई मेडिकल रिपोर्ट से यह सिद्ध होता है कि शिव कुमार के साथ भारी पुलिस ज्यादती की गई है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और शिवकुमार की भी बिना शर्त रिहाई की मांग करते हैं।

आज ‘युवा किसान दिवस’ के मौके पर बिहार के मुज्जफरपुर जिले में बैठक हुई। जिसमें पूरे मुज्जफरपुर के किसान नेतृव और जय प्रकाश नारायण द्वारा स्थापित संघर्ष वाहिनी के बिहार के कई वरिष्ठ साथी मौजूद रहे। आज यह तय किया गया की आने वाले समय में बिहार को जागृत और एकजुट करके तीन- चार बड़ी पंचायतें कराई जाएंगी।

दक्षिण भारत से किसानों का जत्था आज सिंघु बॉर्डर पहुंचा। आज मंच पर बोलते हुए वक्ता ने कहा कि पूरे देश के किसान एक हैं। उन्होंने कहा कि यह झूठ नहीं चलेगा कि कुछ सीमित जगहों में ही यह विरोध हो रहा है। कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल व तेलंगाना से आये इन किसानो ने MSP के महत्व पर ज़ोर दिया और तीन कृषि कानूनों को किसानों के लिए डेथ वारंट करार दिया।

विभिन्न स्थानों पर महापंचायतों की प्रभावशाली दौर भी जारी है। उत्तर प्रदेश में संभल, तेलंगाना में निजामाबाद, राजस्थान में करौली और टोडा भीम में महापंचायत आयोजित की गई। आज यूपी के सम्पूर्णानगर और राजस्थान में पदमपुर और घड़साना (श्रीगंगानगर जिले) जैसी जगहों पर विशाल महापंचायत हुईं।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने हरियाणा के लोगों को सतर्क रहने और यह सुनिश्चित करने के लिए बधाई दी कि सिरसा में मंत्री कंवर पाल गुर्जर का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। इससे पहले (24 फरवरी) को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बंगले का घेराव किया।


“सयुंक्त किसान मोर्चा’ की ओर से डॉ दर्शन पाल द्वारा जारी


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