Home राजनीति माले का राष्ट्रव्यापी अनशन : अमीरों की तरह ग़रीबों को घर क्यों...

माले का राष्ट्रव्यापी अनशन : अमीरों की तरह ग़रीबों को घर क्यों नहीं पहुँचाती सरकार?

भाकपा माले नेता धीरेन्द्र झा ने कहा कि हम एक ओर देख रहे हैं कि सरकार अमीरों और ताकतवर लोगों को घर पहुंचाने के लिए सारे उपाय कर रही है, वहीं दूसरी ओर मजदूरों को मरने-खपने के लिए छोड़ दिया गया है. उनपर लाठियां चल रही हैं और उन्हें जेल तक में डाला जा रहा है. ज्यादा मजदूर बिहार के ही हैं, लेकिन बिहार सरकार को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है.

SHARE

देश के विभिन्न हिस्सों में अब तक फंसे हुए प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी की मांग को लेकर ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एक्टू), अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा व भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने आज से दो दिवसीया भूख हड़ताल शुरू की. राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत आज पूरे देश में कोरोना से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन करते हुए भूख हड़ताल का कार्यक्रम आरम्भ हो गया है.

बिहार भाकपा-माले के तीनों वर्तमान विधायक महबूब आलम, सुदामा प्रसाद और सत्यदेव राम भी दो दिवसीय अनशन पर बैठे हैं. प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी, 3 महीने का मुफ्त राशन व 10 हजार रु लॉक डाउन भत्ता, पुलिस जुल्म पर रोक, सभी मुकदमों को खात्म करने, वेतन कटौती व नौकरी से हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने  सहित कई अन्य मांगों पर ये भूख हड़ताल की जा रही है.

भाकपा माले नेता धीरेन्द्र झा ने कहा कि हम एक ओर देख रहे हैं कि सरकार अमीरों और ताकतवर लोगों को घर पहुंचाने के लिए सारे उपाय कर रही है, वहीं दूसरी ओर मजदूरों को मरने-खपने के लिए छोड़ दिया गया है. उनपर लाठियां चल रही हैं और उन्हें जेल तक में डाला जा रहा है. ज्यादा मजदूर बिहार के ही हैं, लेकिन बिहार सरकार को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है.

धीरेंद्र झा ने कहा कि मजदूर घर लौटना चाहते हैं, इसलिए हमारी मांग है कि सरकार उनको घर पहुंचाने की गारंटी करे. विगत दिनों काशी से दक्षिण भारत के तीर्थयात्रियों को 25 बसों व 4 क्रूजर से सुरक्षाकर्मियों के साथ अमीरों को घर भेजा गया था, लेकिन प्रवासी मजदूरों को उनके रहमोकरम पर छोड़ दिया है. यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है?

माले नेता धीरेन्द्र झा खेग्रामस कार्यालय में उपवास पर बैठे. शशि यादव के अलावा टेम्पो यूनियन के नेता मुर्तजा अली, मनरेगा सभा के सचिव दिलीप सिंह और आइसा नेता आकाश कश्यप भी मौजूद रहे.

बिहार राज्य कार्यालय में भाकपा माले सचिव कुणाल ने कहा कि हमारी पार्टी प्रवासी मजदूरों और गरीबों के साथ हो रहे अन्याय पर रोक लगाने की मांग करती है. माले राज्य सचिव कुणाल भाकपा (माले) राज्य कार्यालय में रसोईया नेता सरोज चौबे, एक्टू नेता रणविजय कुमार, (माले) पटना नगर कमिटी सदस्य अशोक कुमार, पन्नालाल सिंह, निर्माण मजदूर यूनियन नेता उपेंद्र प्रसाद, उमेश शर्मा, अर्जुन यादव के साथ उपवास पर शामिल हुए.

श्रीकाकुलम, कन्याकुमारी में भी लोग प्रवासी मजदूरों की मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल पर रहे. राज्यस्थान के उदयपुर और दार्जलिंग में भी लोगों ने भूख हड़ताल की.

पश्चिम बंगाल में जूट मिल के कर्मचारियों ने मिल के गेट के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने की सरकार से मांग की. जुट मिल कर्मचारियों ने मजदूरों को राशन और लॉकडाउन भक्ता देने की भी मांग की.

एक्टू नेता रणविजय कुमार ने बताया कि सरकार सभी प्रवासी मजदूरों के लिए तीन महीने का राशन और 10 हजार रुपया तत्काल प्रदान करने की गारंटी करे. मुम्बई, सूरत, कोटा आदि जगहों पर हजारों बिहार व यूपी के प्रवासी मजदूर फंसे हुए हैं. उनकी हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है. उनके परिवार के सामने भी कई समस्याएं उठ खड़ी हुई हैं. लेकिन न तो इसके प्रति केंद्र सरकार चिंतित है और न ही राज्य की सरकार. हम बिहार सरकार से मांग करते हैं कि सभी प्रवासी मजदूरों के लौटने की अविलंब व्यवस्था करे. दो तरह की नीतियां नहीं चलने वाली है.

बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ गोप गुट ने भी पटना में भूख हड़ताल व धरने का कार्यक्रम आईटीआई दीघा घाट में शुरू किया है. महासंघ के नेताओं ने प्रवासी असंगठित मजदूरों के आश्रय स्थलों पर राशन, भोजन, स्वच्छता की व्यवस्था करने, प्रवासी मजदूरों के हितार्थ कार्ययोजना घोषित करने एवं प्रवासी मजदूरों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच करा कर सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करने की मांग की.

बिहार की राजधानी पटना में अन्य जगहों पर भी लोग उपवास कर रहे हैं. भोला पासवान शास्त्री भवन, आशियाना पटना में ऐक्टू नेता जितेंद्र कुमार, भाकपा माले व निर्माण मजदूर यूनियन नेता धर्मेंद्र व अन्य लोग भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं. पटना जिला के दुल्हिन बाजार और नौबतपुर, मसौढ़ी व पालीगंज में भी लोग भूख हड़ताल पर बैठे हैं. सभी जगहों पर कार्यालयों में उपवास चल रहा है.

भोजपुर, सिवान, बक्सर, मुज्जफरपुर, जहानाबाद, भागलपुर, अरवल, रोहतास आदि जिलों में भी उपवास आरम्भ हो गया है. भोजपुर मेंभाकपा माले विधायक सुदामा प्रसाद के अलावा जिला सचिव जवाहर लाल सिंह भी उपवास कर रहे हैं. सिवान में नईमुद्दीन अंसारी उपवास पर हैं.

दरभंगा में भाकपा(माले) जिला कार्यालय में खेग्रामस जिला अध्यक्ष जंगी यादव व किसान महासभा के जिला अध्यक्ष शिवन यादव ने अनशन आरम्भ किया. देवेंद्र कुमार और गजेंद्र शर्मा भी अनशन पर बैठे हैं. भाकपा (माले) बहादुरपुर प्रखंड कार्यालय पर भाकपा (माले) के जिला कमिटी सदस्य सह खेग्रामस के बहादुरपुर प्रखंड अध्यक्ष गणेश महतो और खेग्रामस जिला उपाध्यक्ष मो जमालुद्दीन बैठे हैं. भूख हड़ताल के समर्थन में भाकपा(माले ) राज्य कमिटी सदस्य अभिषेक कुमार, एक्टू के जिला प्रभारी उमेश प्रसाद साह, भाकपा (माले) जिला स्थायी समिति सदस्य अवधेश सिंह, प्रखंड कमिटी सदस्य मो रोजिद आदि भी मौजूद थे.

सुपौल जिले के सदर प्रखंड के चैनसिंह पट्टी पंचायत में भाकपा-माले नेता व ऐक्टू के जिला सचिव अरविंद कुमार शर्मा, चंदा कुमारी, आलोक कुमार एवं पिपरा खुर्द पंचायत में ऐक्टू नेता उपेंद्र सादा, लीला देवी; किसनपुर प्रखंड के मलार पंचायत में ऐक्टू नेता रामचंद्र शर्मा, परमिला देवी तथा मेहासिमर पंचायत में ऐक्टू नेता जय कृष्ण यादव, सुरेश यादव आदि नेताओं ने दो दिवसीय भूख हड़ताल की शुरुआत कर दी है.

अरवल में भाकपा-माले प्रखंड कलेर के साथ बेलसार चौकी पर उपवास कर रहे हैं. करपी में खेग्रामस नेता उपेंद्र पासवान के नेतृत्व में उपवास आरम्भ हुआ. जिला कार्यालय पर जिला सचिव महानन्द भी उपवास कर रहे हैं.

पश्चिम चंपारण के बैरिया में माले नेता सुनील कुमार राव, मुखिया महासंघ के अध्यक्ष व मुखिया नवीन कुमार, इनौस नेता सुरेंद्र चौधरी , निर्माण मजदूरों के नेता जोखू चौधरी , मनरेगा मजदूरों के नेता ठाकुर साह, आइसा के प्रियदर्शी अपने अपने घरों में उपवास कर रहे हैं.

समस्तीपुर में प्रवासी मजदूरों की सकुशल वापसी एवं राशन-राशि देने की मांग को लेकर लोग भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. समस्तीपुर के विवेक-विहार मुहल्ले में माले जिला कमिटी सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह, ऐपवा जिला अध्यक्ष बंदना सिंह, ऐपवा सह माले नेत्री नीलम देवी उपवास पर बैठे हुए हैं.

सहरसा में अखिल भारतीय भूख हड़ताल पर भाकपा माले जिला सचिव ललन यादव, खेग्रामस राष्ट्रीय पार्षद विक्की राम, इंसाफ मंच के नईंम आलम, निर्माण मजदूर यूनियन जिलाध्यक्ष विजेंद्र यादव,संतोष राम व अन्य साथी बैठे हुए हैं.

अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के राष्ट्रीय पार्षद व बक्सर जिला के ब्रह्मपुर के पार्टी प्रखंड सचिव अयोध्या सिंह के साथ पार्टी जिला कमिटी सदस्य बिरबहादुर पासवान पार्टी सदस्य छोटे लाल पासवान भुख हड़ताल में भाग लिया.

भोरे में दो दिवसीय अनशन पर बैठे भाकपा माले नेता सह बनकटा जगदारी पंचायत के पैक्स अध्यक्ष राघव प्रसाद उर्फ बड़ा बाबू,भगत सिंह युवा बिग्रेड प्रखंड अध्यक्ष अर्जुन सिंह,डोमनपुर पंचायत के बर्तमान मुखिया कमलेश प्रसाद,खेत मजदूर खेमस के जिला सचिव सुभाष पटेल, इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय परिषद व जिलाध्यक्ष जितेन्द्र पासवान उपवास कर रहे है.

 


 

1 COMMENT

  1. इसलिए हुजूर
    कि , भारत में 30 सालों से हमारी सरकारी वामपंथी पार्टियों ने मजदूरों की लड़ाई लड़नी बंद कर दी है । जिस दिल्ली में कभी संशोधनवादी पार्टी सीपीएम के 40 सांसद हुआ करते थे उसी दिल्ली की हालत यह है कि लाखों मजदूरों में से मात्र 30 हजार भवन निर्माण मजदूर ही आज पंजीकृत हैं । कौन जिम्मेदार है ?!!
    तीस सालों से ये एक-दो दिन की अनुष्ठानिक हड़ताल करती हैं । उसमें भी बिना व्यापक रुप से पर्चे,पोस्टर बांटे यह कार्य किया जाता है ।हर बार दस बीस करोड़ के भाग लेने का कतई हवाई आंकड़ा दिया जाता है। और फिर तुर्रा यह कि हर हड़ताल के बाद उसे ऐतिहासिक और सफल रही !!सफल रही !!! के नारों के साथ समापन किया जाता है ! तो प्यारे पोलित पतित कामरेड लोगो । अगर हड़ताल इतनी ही सफल रहती हैं तो रेलवे कैसे निजी हो रही है ? तेल कंपनी कैसे बेचा जा रहा है ?बैंक कैसे बेचे जा रहे हैं ? क्यों श्रम कानूनों का नंगा उल्लंघन हो रहा है ?

    कभी नंबर दो रही और हाल तक 40 सांसद वाली सीपीएम का पूरे देश में सूपड़ा साफ हो गया है ?
    दसियों लाख मजदूरों वाले दिल्ली में 2014 में तीनों कम्युनिस्ट पार्टियों को मिलाकर भी 10 हजार वोट नहीं पड ( देखें पुरानी समयांतर पत्रिका) । कोई एक भी 1000 की संख्या के पार नहीं जा पाए । बल्कि 500 भी बहुत ही कम । जबकि दिल्ली में लाखों ठेका मजदूर भरा पड़ा है । उस पर ताना भी यह मजदूरों , भूमिहीन किसानों को मारते हैं कि उन्होंने हमें प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री नहीं बनाया ?!! वाह !! उल्टा चोर कोतवाल को डांटे !!

    बत्तीस साल पहले NGO को गरियाने वाले करात आज उन्हीं NGO वादियों से गलबहियां कर रहे हैं । नीचे पढें ।

    cpim’s earlier stand

    https://www.rupe-india.org/35/wsfmumbai.html
    —–उमेश चंदोला

LEAVE A REPLY

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.