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सुप्रीम कोर्ट ने ‘दिल्ली न्यूनतम वेतन’ मामले में ऐतिहासिक फैसला दिया

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14 अक्टूबर को  दिल्ली के 50 लाख मजदूरों के न्यूनतम वेतन की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई. जिसमें माननीय कोर्ट ने मजदूरों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला दिया. इस आर्डर का इन्तजार हम सभी को पिछले 2 वर्ष से था.जिसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तावित न्यूनतम वेतन का नोटिफिकेशन जारी करने का आदेश दिया हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को न्यूनतम वेतन सलाहकार कमेटी द्वारा जनवरी 2019 में तय किए गए न्यूनतम वेतन की नोटिफ़िकेशन के साथ आगे बढ़ने को कहा है. इस फ़ैसले से परमानेंट, फ़िक्स टर्म, ठेका, कैजुअल और दिहाड़ी के मज़दूरों को फ़ायदा होगा.

क्या हैं मामला

दिल्ली सरकार ने मार्च 2017 में दिल्ली के न्यूनतम वेतन में 37 फीसदी की बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन जारी किया था. जिसको कुछ मालिक संगठन के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने उस नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया. जिसके बाद एक बारे फिर से दिल्ली के मजदूरों का 37 फीसदी बढ़ा वेतन घटा दिया गया.

एक बारे फिर से मजदूरों के तरफ से दवाब बनता हैं और जिसके बाद दिल्ली सरकार हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

दिल्ली न्यूनतम वेतन के मामले की सुनवाई करते हुए पहली ही सुनवाई में ऐतिहासिक फैसला दिया. इस फैसले ने यह भी साफ़ कर दिया कि जब तक नए न्यूनतम वेतन की नोटिफ़िकेशन जारी नहीं की जाती है, तब तक 3 मार्च 2017 का नोटिफ़िकेशन मान्य रहेगा.

3 मार्च 2017 को एक नोटिफ़िकेशन के जरिए दिल्ली सरकार ने राज्य में न्यूनतम वेतन में 37 फीसदी की बढ़ोतरी की थी.

अब कितना होगा न्यूनतम वेतन

जिसके बाद दिल्ली सरकार ने न्यूनतम वेतन सलाहकार समिति के सिफारिश के अनुसार अलग-अलग कैटेगरी का निम्न प्रकार से न्यूनतम वेतन तय किया.

• अकुशल श्रेणी के लिए 14842 रुपए प्रतिमाह,

• अर्ध कुशल श्रेणी के लिए 16341 रुपए प्रतिमाह

• कुशल श्रेणी के लिए 17991 रुपए प्रतिमाह

• उच्च कुशल या स्नातक या उससे अधिक के लिए 19572 रुपए प्रतिमाह

काफी मस्कत के बाद इस प्रस्ताव की रिपोर्ट दिल्ली सरकार के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई.

ऐसे तो लेबर विभाग द्वारा गठित न्यूनतम वेतन सलाहकार समिति ने 15 फरवरी 2019 को दिल्ली के मजदूरों का नया न्यूनतम वेतन भी तय कर लिया. मगर इसके बाद, लेबर विभाग को माननीय सुप्रीम कोर्ट में जमा करने के वजाय उदासीनता दिखाते हुए, तीन महीने तक उक्त फाइल को रोक कर रखा. जिसके बाद सुरजीत श्यामल के आरटीआई के तहत ध्यानाकर्षण के बाद विभाग ने 26 जुलाई 2019 को दिल्ली के नया न्यूनतम वेतन की फाइल सुप्रीम कोर्ट में अंतत (आरटीआइ जवाब) जमा करवाई गई.

इस दौरान लेबर विभाग ने 01 अप्रैल 2019 का मंहगाई भत्ते का नोटिफिकेशन नहीं जारी किया और उक्त आरटीआई के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में केस पेंडिंग का हवाला दिया. जो कि बिलकुल निराधार ही नहीं बल्कि मजदुर विरोधी था.

इसके साथ ही भले ही आरटीआई के दवाब में लेबर विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में फाइल जमा करवा दिया, मगर केस की सुनवाई में कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे, जिसके वजह से पिछले 6-8 महीने से केवल डेट पर डेट मिल रहा था.

जिसके बाद पिछले सप्ताह वर्कर वौइस् ने लोगों के सुझाव व् सहयोग से एक ई पेटिशन के माध्यम से जागरूकता अभियान की शुरुआत की. जिसमें देखते ही देखते हजारों लोगों ने हस्ताक्षर किए और हजारों लोगों ने शेयर किए. जिससे दिनों दिन हस्ताक्षर की संख्या बढ़ने लगी और एक तरह से सोशल मीडिया के अन्य माध्यम से हमने यह बात सरकार तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

आप लोगों के सहयोग, समर्थन और दुआ से आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और मालिक पक्ष के लाख विरोध के बाद माननीय कोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तावित न्यूनतम वेतन का नोटिफिकेशन जारी करने के आदेश जारी किया. यह एक तरह से देखें तो हम 50 लाख मजदूरों की जीत हैं.


प्रेस विज्ञप्ति : सुरजीत श्यामल, संपादक, वर्कर वौइस् द्वारा जारी 

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