एड्स मरीज़ों पर बेअसर रहा कोरोना, चिकित्सक आश्चर्यचकित!

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कोरोना वायरस अपने नए-नए म्यूटेशन से वैज्ञानिको को दुविधा में डाल रहा है। भारत में अकेले इसके 13 म्यूटेशन सामने आ चुके हैं। लेकिन अब कोरोना अपना व्यवहार भी बदल रहा है। इस बार जो हैरान करने वाली बात सामने आई है उससे चिकित्सक आश्चर्य में हैं। असल में राम मनोहर लोहिया अस्पताल में चौंकाने वाला अध्ययन सामने आया है। इस अध्ययन के अनुसार,एड्स मरीज़ों में कोरोना संक्रमण का असर उतना नही हुआ जितना बाकी बीमायों से ग्रस्त लोगों पर हुआ। कोरोना संक्रमित होने के बावजूद इस तरह के रोगियों की मृत्यु दर बहुत ही कम सिर्फ 0.025% रही। वहीं दिल्ली में एड्स मरीज़ों की कुल मृत्य दर 1.74% है। कोविड-19 का यह व्यवहार चिकित्सकों के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है जिससे चिकित्सक भी बेहद हैरान हैं।

एड्स के मरीज़ों पर कोरोना बेअसर क्यों हुआ?

अब कोविड-19 के इस अजीब व्यवहार की अबूझ पहेली को लेकर अधिकांश डॉक्टरों का मानना ​​है कि इस पर विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है।  इसके बाद ही एड्स के मरीजों पर कोरोना बेअसर क्यों हुआ? इसका पता चलेगा। हालांकि, यह देखा गया है कि जो लोग पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं, उनमें कोरोना संक्रमण का खतरा अधिक होता है। संक्रमण से हुई मौतों में इस बात की पुष्टि भी हुई है की हृदय, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, जैसी बीमारी वाले मरीजों में कोरोना से मृत्युदर काफी अधिक रही है। पहले माना जा रहा था कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर देने वाली एड्स जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज को अगर कोरोना होता है तो वह मरीज़ों के लिए  बेहद घातक साबित हो सकता है।

एड्स के मरीज़ों में संक्रमण दर 50% के करीब..

आपको बता दें की एक और हैरान करने वाली बात यह है जब पूरी दिल्ली में कोरोना ने तबाही बचा रखी थी। तब पीक पर जाने के दौरान पूरी दिल्ली की संक्रमण दर 35% तक पहुंची थी। लेकिन जो एचआईवी मरीज़ थे उनमें यह  दर पीक पर जाने के बाद बहुत अधिक 50% के करीब पहुंच गई थी। यह बात अस्पताल की डेथ कमेटी की रिपोर्ट में पता चली कि एचआईवी का इलाज करा रहे करीब 8000 मरीजों में से 4500 मरीज कोरोना संक्रमित थे। वहीं दिल्ली की अभी तक की डेथ रेट औसतन 1.74% रही है। पीक पर यह एक दिन में 10% के करीब रही और इसके विपरीत, एड्स रोगियों में यह आंकड़ा केवल .025% था। यानी एड्स रोगियों की संक्रमण के पीक पर कोरोना से सिर्फ दो मौतें हुई हैं।

एड्स मरीज़ों में कोरोना के बेहद हल्के लक्षण..

एम्स ने पिछले साल एचआईवी मरीज़ों पर सीरो सर्वे किया था।  सर्वे में ऐसे 164 मरीज शामिल थे जो एचआईवी से पीड़ित थे।  इनमें से सिर्फ 14% में ही कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी पाई गई ।  उस समय दिल्ली में किए गए सीरो सर्वे में 25% लोगों में एंटीबॉडीज पाई गई थी, जिससे पता चलता है कि एड्स के मरीज आम लोगों की तुलना में कम संक्रमित थे। सर्वे में यह भी पाया गया कि एचआईवी मरीज़ों में कोरोना के बेहद हल्के लक्षण थे।  विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से एचआईवी रोगियों में मृत्यु दर का न बढ़ना आश्चर्य की बात है क्योंकि पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज को कोरोना से कोई प्रभाव न पड़ना शोध का विषय है।

एचआईवी क्या है?

एड्स स्वयं कोई बीमारी नही है एचआईवी वायरस की वजह से किसी इंसान में एड्स की बीमारी होती है। एड्स से पीड़ित मानव शरीर संक्रामक बीमारियों, जो कि जीवाणु और विषाणु आदि से होती हैं, के प्रति अपनी प्राकृतिक प्रतिरोधी शक्ति खो बैठता है क्योंकि एचआईवी रक्त में उपस्थित प्रतिरोधी पदार्थ लसीका-कोशो पर आक्रमण करता है। संक्रमण के शुरुआती कुछ सप्ताह में केवल बुखार, सिरदर्द, गले में खुजली, सूखा गला जैसे लक्षण दिख सकते हैं। बाद में दूसरे लक्षण दिख सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि धीरे-धीरे संक्रमण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमज़ोर कर देता है। इसके बाद लसीका ग्रंथियों में सूजन, शरीर का वजन घटना, बुखार, दस्त और खांसी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक एड्स की बीमारी की वजह से अब तक दुनिया भर में 3.2 करोड़ लोगों की जान जा चुकी है।


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