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बनारसः डंडे बरसाने और ज्ञापन लेने की दोहरी रणनीति ने कैसे ले ली एक मासूम की जान

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शुक्रवार को बनारस के बजरडीहा में हुए पुलिस के हमले और उसके बाद मची भगदड़ में मारे गए 11 साल के बच्चे सग़ीर की दिल दहलाने वाली घटना के बावजूद अगले दिन शनिवार को भी पुलिस क्षेत्र के घरों में दबिश देती रही और इलाके में आतंक का माहौल तारी रहा।

यह सब इसके बावजूद हुआ  कि शहर के मुफ्ती और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने जिलाधिकारी के साथ बैठक कर के उन्हें बाकायदे राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा था जिसमेें उन्होंने विनम्रतापूर्वक नागरिकता संशाेधन कानून का यह कहते हुए विरोध किया कि इस देश की आज़ादी में उनके पूर्वजों का खून शामिल है और वे द्विराष्ट्र की विचारधारा के विरोधी रहे हैं।

जिलाधिकारी के साथ बनारस के मुस्लिम धर्मगुरु ज्ञापन देते हुए

बनारस के मुफ्ती मौलाना बातिन, हारुन रशीद और अन्य मुस्लिम धर्मुगुरुओं ने शुक्रवार की त्रासद घटना के बाद जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा के साथ बैेठक कर के राष्ट्रपति कोविंद के नाम एक पत्र उन्हें सौंपा।

इस दौरान मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ जिलाधिकारी की वार्ता काफी सौहार्दपूर्ण माहौल में चली और उम्मीद की जा रही थी कि 21 दिसंबर को बजरडीहा में पुलिस ने जो एक्शन लिया, उसको दुहराया नहीं जाएगा। इस बीच अस्पताल में घायलों से जाकर भी मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मुलाकात की थी। इसके बावजूद अगले दिन भी बजरडीहा में पुलिस घरों में घुस कर दबिश देती रही।

स्थानीय अखबारों में बजरडीहा से शुक्रवार की छपी तस्वीरें दिखाती हैं कि कैसे वहां मारे गए सगीर और ज़ख्मी हुए अन्य लोगों को ठेलों पर लाद कर अस्पताल ले जाया गया। इलाके की गली में बिखरी चप्पलें ताकीद करती हैं कि हमला और उसके बाद भगदड़ कितनी भयावह रही होगी।

मीडियाविजिल को शुक्रवार की घटना के संबंध में कुछ वीडियो प्राप्त हुए हैं। इन वीडिययो में साफ़ देखा जा सकता है कि किस तरह शांतिपूर्ण माहौल में डंडे बरसाए गए और भगदड़ की स्थिति कायम की गयी।

 

स्क्रॉल डॉट इन में शाेएब दानियाल की छपी ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि बजरडीहा में कुछ युवक और बच्चे दिन में एनआरसी और कैब के खिलाफ नारे लगा रहे थे। माहौल शांतिपूर्ण था। अचानक दिन की नमाज़ के बाद पौने चार बजे के आसपास पुलिस की तैनाती बढ़ गयी और अनावश्यक रूप से पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। मीडियाविजिल के पास  मौजूद वीडियो इसकी ताकीद करता है।

 

सग़ीर अहमद नाम का लड़का इसी भगदड़ का शिकार हो गया। वह प्रदर्शन का हिस्सा नहीं था, लेकिन लाठीचार्ज के बाद भगदड़ की चपेट में आ गया। इसी तरह कुछ और युवक भी बुरी तरह घायल हुए।

 

ये तमाम वीडियो और तस्वीरें शुक्रवार 21 दिसंबर के हैं। अगले दिन 22 दिसंबर को डीएम ने मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ बैठक की और राष्ट्रपति के नाम उनका लिखा ज्ञापन स्वीकार किया। विडम्बना यह है कि जिस वक्त यह बैठक हो रही थी उस वक्त भी बजरडीहा के घरों में पुलिस का आतंक तारी था। शनिवार दिन का यह वीडियो इसकी ताकीद करता हैः

19 दिसंबर के बाद समूचे प्रदेश में हिंसा देखी गयी है और बीस से ज्यादा लोगों की मौत के आंकड़े सामने आए हैं, लेकिन समय बीतने के साथ अब धीरे धीरे तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं जिनमें पता चल रहा है कि हमले किसकी ओर से पहले किए गए। इन्हीं वीडियो और तस्वीरों सहित मीडिया की रपटों को साक्ष्य बनाकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में याचिकाएं दायर की गयी हैं।

फिलहाल की ताज़ा स्थिति यह है कि सोमवार को बनारस के जिन 56 लोगों के खिलाफ नामजद एफआइआर की गयी थी उनकी ज़मानत को सीजेएम की अदालत ने खारिज कर दिया है। इसी तरह राजधधानी लखनऊ में भी जमानत अर्जी खारिज की गयी है।

राज्य भर में प्रदर्शनकारियों की संपत्ति को राजसात करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।

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