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UP : हाइ कोर्ट की फटकार पड़ते ही सूचना आयोग ने चौबीस घंटे में गठित कर दी विशाखा समिति

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लखनऊ। महिला उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए एक आंतरिक परिवाद समिति बनाए जाने को लेकर दसियों साल से टालमटोल करने वाला उत्तर प्रदेश का राज्य सूचना आयोग सूबे के हाइ कोर्ट की जोरदार फटकार पड़ते ही राइट टाइम हो गया है और आयोग ने कुछ घंटों में ही विशाखा समिति का गठन करते हुए सम्बंधित आदेश को 24 घंटों में ही कोर्ट के सामने पेश भी कर दिया है.

सूचना आयोग में महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए लम्बे समय से प्रयत्नशील देश की नामचीन समाजसेविका और आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा द्वारा अधिवक्ता शीतला प्रसाद त्रिपाठी और सौरभ कुमार श्रीवास्तव के मार्फत हाइ कोर्ट की लखनऊ बेंच में दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस देवेन्द्र कुमार अरोड़ा और जस्टिस आलोक माथुर की बेंच ने बीती 29 मई को आयोग द्वारा महिला अधिकारों के प्रति उदासीन रवैया रखने की बात सामने आने पर सख्त रुख अख्तियार किया था और यूपी के सूचना आयोग और मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी को जमकर लताड़ लगाई थी.

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आयोग को 24 घंटे का समय देते हुए सुप्रीम कोर्ट के द्वारा विशाखा मामले में दिए गए निर्देशों और महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013 की धारा 4 के अनुपालन में आयोग में आंतरिक परिवाद समिति गठित करने के सम्बन्ध में की गई कार्यवाही पर जबाब मांगा था और मामले को सुनवाई के लिए अगले दिन फिर से सूचीबद्ध कर दिया था.

बीती 30 मई की सुनवाई में आयोग के अधिवक्ता शिखर आनंद ने बताया कि हाइ कोर्ट के आदेश पर आयोग में उसी दिन विशाखा समिति का गठन हो गया है और सम्बंधित आदेश न्यायालय के समक्ष पेश किया जिसे न्यायालय ने रिकॉर्ड में ले लिया.

वादी के अधिवक्ताओं त्रिपाठी और श्रीवास्तव ने बताया कि याचिका में सूचना आयोग की सुनवाइयों की ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग कराने और आयोग में खुली सुनवाई की व्यवस्था लागू कराने की दो अन्य याचनाएं भी की गईं थीं जिनके सम्बन्ध में पक्ष-विपक्ष की बहस सुनने के बाद जस्टिस देवेन्द्र कुमार अरोड़ा और जस्टिस आलोक माथुर की बेंच ने सरकार, आयोग और मुख्य सूचना आयुक्त से जबाब मांग लिया है और जबाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है.

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