बेरोजगारी चरम पर, फरवरी की बेरोजगारी दर पिछले चार महीनों में सबसे ज्यादा

तेज बहादुर सिंह
ख़बर Published On :


बीते चार महीनों में बेरोजगारी अपने चरम पर है. हाल ही में आई सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी महीने में बेरोजगारी दर 7.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है. पिछले महीने जनवरी में यह 7.2 प्रतिशत थी. फरवरी के ये आंकड़े पिछले चार महीनों में सबसे ज्यादा है. इससे पहले अगस्त 2019 में यह आंकड़ा 8.2 प्रतिशत तक पहुंच गया था. 

फरवरी के शुरूआती तीन हफ्तों में से पहले हफ्ते में बेरोजगारी दर 8.5 प्रतिशत तक थी. वहीं दूसरे और तीसरे हफ्ते में यह 8 प्रतिशत  तक रही. हालांकि महीने के आखिरी हफ्ते में यह गिरकर 7.4 प्रतिशत पर पहुंच गई. यही कारण है कि फरवरी की औसत बेरोजगारी दर 7.8 प्रतिशत तक रही. वरना ये आंकडा और भी बढ़ सकता था. फरवरी में बेरोजगारों की संख्या में कुल 30 लाख की बढ़ोत्तरी हुई है. वहीं रोजगार के अवसरों में 55 लाख की गिरावट दर्ज की गई है. एक ओर सरकार अर्थव्यवस्था को सुस्ती से बाहर नहीं ला पा रही है. वहीं दूसरी ओर बेरोजगारी के ऐसे आंकड़े सरकार को दोबारा से कटघरे में खड़े कर देने वाले हैं. वर्ष 2019-20 में अप्रैल से फरवरी के बीच बेरोजगारी दर का आंकड़ा 7.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है जो बीते वर्ष 2018-19 में 6.3 प्रतिशत तक था.

इससे पहले भी बेरोजगारी को लेकर गंभीर आंकड़े लगातार सामने आते रहे हैं. पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले जनवरी 2019 में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएसएसओ) के आंकड़ो से पता चला कि बेरोजगारी पिछले 45 सालों में सबसे अधिक है. लेकिन सरकार इन आंकड़ों को मानने को तैयार नहीं थी. उस समय एनएसएसओ के कार्यकारी अध्यक्ष सहित दो सदस्यों ने जनवरी में इस्तीफा भी दे दिया था. उनका कहना था कि रिपोर्ट को आयोग की मंजूरी मिलने के बावजूद भी सरकार इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहती है. हालांकि दोबारा सरकार गठन के दो दिन बाद ही मई 2019  में श्रम मंत्रालय ने बेरोजगारी के यही आंकड़े जारी किए. इन आंकड़ों के मुताबिक भी देश में 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.1% रही थी जो पिछले 45 सालों में रिकॉर्ड सबसे ज्यादा रही. इससे पहले 1972-73 के साल में बेरोजगारी के ऐसे आंकड़े देखने का मिले थे.

सरकार क्यों नहीं दे पा रही है नौकरियां ?

देश की अर्थव्यवस्था आर्थिक सुस्ती के दौर से गुजर रही है. वित्तीय वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश की अर्थव्यवस्था 4.6 फीसदी तक रही है. यह पिछले छह सालों में अर्थव्यवस्था की सबसे धीमी गति है. इस दौरान जब लगभग सब ओर सरकार को घाटा हो रहा है, तब सरकार के लिए रोजगार को बढ़ा पाना बहुत मुश्किल काम लगता है. 

क्या कोरोना वायरस के कारण और बढ़ सकती है बेरोजगारी ?

हाल ही में कोरोना वायरस ने भारत में भी दस्तक दे दी है. चीन से शुरु हुआ यह वायरस अब तक दुनिया के 70 देशों को प्रभावित कर चुका है. चीन की अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है. यदि भारत में कोरोना वायरस का मामला बढ़ता है तो भारत की सुस्त अर्थव्यवस्था और भी ज्यादा कमजोर हो सकती है. जानकारों का मानना है कि इसका सीधा असर नौकरियों पर हो सकता है और मार्च के महीने में भी बेरोजगारी दर में बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है.   

कितनी नौकरियां देने का था सरकार का वादा ?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2014 में चुनाव के दौरान वादा किया था कि सरकार हर साल 2 करोड़ नए रोजगार देगी. लेकिन रोजगार के मामले अब तक सरकार का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है. रोजगार के मसले पर प्रधानमंत्री का कहना है कि सरकार ने लोगों को स्वरोजगार के लायक बनाया है. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत सरकार लोगों को खुद का रोजगार स्वयं शुरू करने के लिए तैयार कर रही है. लेकिन प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की हालत भी कुछ ठीक नहीं है. हाल ही में एक सवाल के लिखित जबाब में सरकार ने बताया था कि 11 नवंबर 2019 तक इस योजना के तहत कुल 69.03 लाख लोगों को ट्रेनिंग दी गई है. इनमें से कुल 22 प्रतिशत लगभग 15.4 लाख लोगों को ही नौकरियां मिल पाई हैं. इनमें से ज्यादातर का औसत वेतन 7800 रू. प्रतिमाह है जो कई राज्यों के न्यूनतम वेतन से भी कम है.    

रोजगार को लेकर गंभीर है सरकार ?

देश में नौकरियां तेजी से कम हो रही हैं. इसका सीधा संबंध अर्थव्यवस्था से है. लेकिन अर्थव्यवस्था को लेकर क्या सरकार गंभीर है ? सरकार की ओर से अर्थव्यवस्था को लेकर बड़े ही हल्के बयान आते रहे हैं. हाल ही में केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि फिल्में करोड़ो का कारोबार कर रही है तो अर्थव्यवस्था में सुस्ती कहां है. वहीं केन्द्रीय राज्यमंत्री सुरेश अंगड़ी ने अर्थव्यवस्था के बारे में कहा था कि ट्रेन और एयरपोर्ट तो फुल हैंलोगों की शादियां हो रही हैं. इससे साफ पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था अच्छी है. इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी कह चुकी है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में आने वाली सुस्ती का कारण ओला और ऊबर हैं.


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