केंद्र ने लोकसभा में कहा- आंदोलन में शहीद हुए किसानों की मौत का कोई डेटा नहीं, इसलिए नहीं मिलेगा मुआवज़ा!

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पीछले एक साल से तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों में से करीब 700 किसानों की मौत हो गई। किसान संगठन इस बात पर अड़े है कि शहीद हुए किसानों के परिजनों को मुआवजा दिया जाए, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इस मांग पर पूर्ण विराम लगा दिया है। दरअसल, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को लोकसभा में कुछ सांसदों द्वारा ‘कृषि कानूनों के आंदोलन’ पर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि उनके पास किसान आंदोलन में मरने वाले किसानों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए मुआवजा देने का कोई सवाल ही नहीं है।

सांसदों ने पूछा था यह सवाल..

सांसदों ने लोकसभा में सरकार से सवाल किया था कि आंदोलन में मरने वाले मृतक किसानों के परिजनों को वित्तीय सहायता दिए जाने का कोई प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है या नहीं? जिस पर सरकार की ओर से यह जवाब आया कि इस मामले में सरकार के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है इसलिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का सवाल नहीं उठता है।

किसान और विपक्ष यह है की मांग..

तीन कृषि कानूनों का विरोध करते हुए देश में पिछले साल से अब तक करीब 700 किसानों की मौत हो गई। आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा का लंबे समय से यह दावा रहा है और अब इन किसानों के परिजनों को मुआवजा दिए जाने की मांग भी उठ रही है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। यहां तक ​​कि कांग्रेस नेताओं ने भी स्थगन प्रस्ताव भेजकर इस मुद्दे पर चर्चा करने को कहा था। आपको बता दें, तीन कृषि कानून सरकार ने आधिकारिक रूप से निरस्त कर दिया है। हालांकि अब भी किसान वापस जाने को तैयार नहीं है उनकी मांग है कि एक साल से अधिक समय से चल रहे आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ मामलों को वापस लिया जाए और इस दौरान शहीद हुए किसानों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए।


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