सुप्रीम कोर्ट ने लगायी विनोद दुआ की गिरफ़्तारी पर रोक, पर एफआईआर रद्द नहीं

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प्रख्यात पत्रकार विनोद दुआ की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने 6 जुलाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि 24 घंटे की पूर्व सूचना के साथ पुलिस उनके घर जाकर पूछताछ कर सकती है, लेकिन गिरफ्तार नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया है।

विनोद दुआ की याचिका पर रविवार को हुई विशेष सुनवाई में जस्टिस यू.यू.ललित और जस्टिस मोहन ए.शांतगौदर की पीठ ने शिमला पुलिस की ओर से धारा 160 के तहत विनोद दुआ को दिये गये नोटिस पर रोक लगाने से इंकार कर दिया लेकिन गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।  विनोद दुआ के खिलाफ पहले यूट्यूब पर 11 मार्च को प्रसारित विनोद दुआ शो के एपीसोड पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए बीजेपी प्रवक्ता नवीन कुमार ने दिल्ली में एफआईआर दर्ज करायी थी। लेकिन दुआ को निचली अदालत के साथ-साथ हाईकोर्ट से भी राहत मिल गयी। लेकिन हिमाचल में भी उनके खिलाफ आनन-फानन में एक एफआईआर दर्ज हुई और पुलिस ने 24 घंटे के अंदर शिमला के एक थाने में हाजिर होने का नोटिस दे दिया। इसके लिए शिमला पुलिस विनोद दुआ के दिल्ली स्थित घर पहुँची थी।

विनोद दुआ के इस शो में दिल्ली दंगो को लेकर पुलिस और सरकार पर सवाल उठाये गये थे। विनोद दुआ हमेशा से नर्म लहजे में सख्त सवाल पूछने के लिए जाने जाते हैं। कांग्रेस जमाने में भी वह सवाल  पूछते थे और दूरदर्शन पर आने वाला उनका कार्यक्रम जनवाणी तो तमाम मंत्रियों के लिए परेशानी का सबब भी बनता था। बाद में उनका लोकप्रिय कार्यक्रम परख भी ऐसा ही  साबित हुआ। लेकिन यह पहली बार है कि सवाल पूछने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और उसमें राजद्रोह जैसी सख्त धाराएं भी हैं। एडिटर्स गिल्ड ने भी इसे उत्पी़ड़न बताया है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनके वकील विकास सिंह ने कहा यह सरासर उत्पीड़न है और यदि दुआ ने देशद्रोह किया है तो सिर्फ दो चैनल ही काम कर सकते हैं। विनोद दुआ पर यह एफआईआर बीजेपी नेता अजय श्याम ने दर्ज करायी है। अजय श्याम के मुताबिक विनोद दुआ के शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मौत और आंतंकी हमलों का इस्तेमाल वोट बैंक की राजनीति के लिए करने का आरोप लगागाय गया है। ‘विनोद दुआ फेक न्यूज फैलाकर सरकार औॅर प्रधानमंत्री के खिलाफ हिंसा भड़काई’-एफआईआर कहती है।

 

 


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