सुप्रीम कोर्ट ने कृषि क़ानूनों पर केंद्र को लताड़ा, क़ानून पर अमल रोकने और कमेटी बनाने के दिये संकेत


अदालत ने कहा कि सरकार कृषि कानूनों को लागू करने से रोके अन्यथा उसे यह काम करना पड़ेगा। अदालत ने मसले के हल के लिए एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है जो दोनों पक्षों की बात करके अपनी सिराफिश दे। कोर्ट ने कमेटी के लिए पूर्व सीजेआई लोढ़ा का नाम भी सुझाया। चीफ़ जस्टिस एस.ए.बोबडे की अगुवाई में तीन सदस्यी बेच ने किसानों के आंदोलन से निपटने में सरकार के रवैये पर निराशा जतायी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जल्द फैसला सुना सकता है।   


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हालाँकि सुप्रीकोर्ट के तमाम फ़ैसलों और हालिया टिप्पणियों से आशंकित आंदोलनकारी किसान संगठनों ने कृषि का़नूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने से इंकार कर दिया है लेकिन सर्वोच्च अदालत ने आज इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगायी। अदालत ने कहा कि सरकार कृषि कानूनों को लागू करने से रोके अन्यथा उसे यह काम करना पड़ेगा। अदालत ने मसले के हल के लिए किसी पूर्व जस्टिस की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है जो दोनों पक्षों की बात करके अपनी सिराफिश दे। वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कोर्ट में कमेटी के लिए पूर्व सीजेआई  आर.एम.लोढ़ा का नाम भी सुझाया। चीफ़ जस्टिस एस.ए.बोबडे की अगुवाई में तीन सदस्यी बेच ने किसानों के आंदोलन से निपटने में सरकार के रवैये पर निराशा जतायी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जल्द फैसला सुना सकता है।   

कृषि कानूनों की वैधता को एक किसान संगठन और वकील एमएल शर्मा ने चुनौती दी है। याचिकाओं में कहा गया है कि केंद्र सरकार को कृषि से संबंधित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार नहीं है। इसी के साथ दिल्ली बार्डर पर आंदोलन से हो रही दिक्कतों का भी सवाल था। कोर्ट ने कहा कि किसान आंदोलन जारी रख सकते हैं लेकिन जगह के बारे में विचार करना पड़ेगा। अदालत ने कहा कि अगर कानून स्थगित हो जाये तो अच्छे महौल में बातचीत हो सकती है। वह चाहती है कि बच्चे, बुज़ुर्ग और महिलाएं घर लौटें।

कोर्ट ने फटकार लगाते हुए केन्द्र से कहा कि हमें नहीं पता कि सरकार समाधान का हिस्सा हैं या समस्या काकुछ लोग आत्महत्या तक कर चुके हैं पर सरकार कोई समाधान नहीं निकाल पायी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि कृषि कानूनों पर आप रोक लगाएंगे या हम लगाएँ। कोर्ट ने कहा कि हम अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ नहीं हैंआप बताएं कि सरकार कृषि कानून पर रोक लगाएगी या हम लगाएँ। केंद्र सरकार ने नए कृषि कानूनों पर रोक लगाने का विरोध किया। अटॉर्नी जनरल केके. वेणुगोपाल ने कोर्ट से कहा कि किसी कानून पर तब तक रोक नहीं लगाई जा सकती, जब तक वह मौलिक अधिकारों या संवैधानिक योजनाओं का उल्लंघन करें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कुछ गलत हुआ तो हममें से हर एक जिम्मेदार होगा। कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते सीजेआई ने कहा कि हम किसी का खून अपने हाथ पर नहीं लेना चाहते हैं। उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र से पूछा, ” क्या चल रहा है? राज्य आपके कानूनों के खिलाफ बगावत कर रहे हैं। हमारे समक्ष एक भी ऐसी याचिका दायर नहीं की गई, जिसमें कहा गया हो कि ये तीन कृषि कानून किसानों के लिए फायदेमंद हैं।


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