चीन में छाया डेल्टा का प्रकोप, भारत में 2 नई वैक्सीन पर फ़ैसला जल्द

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कुछ दिनों से लगातार डेल्टा वेरिएंट के पूरे विश्व में फैलने की खबरें आ रही हैं। जिससे पता लगता है की दुनियाभर में कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब यह वैरिएंट दुनिया में कोरोना वायरस फैलाने वाले देश चीन तक भी पहुंच चुका है और वहां तेज़ी से फैल रहा है। चीन में ही  कोरोना वायरस का जन्म हुआ लाखों लोग मरे, चीन पूरी दुनिया को संक्रमित कर कुछ समय में ही इस वायरस से उभर गया था।

जब पूरी दुनिया अस्त – व्यस्त थी तब चीन में जीवन फिर से पटरी पर आ चुका था। तक़रीबन छह महीने से ज्यादा से चीन में कोविड-19 से एक भी मौत नही हुई है। मगर अब कोरोना का यह घातक डेल्टा वेरिएंट चीन में दोबारा प्रवेश कर चुका है और डेल्टा के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। सोमवार को चीन में डेल्टा वैरिएंट के 77 नए मरीज मिले हैं। इसके बाद चीन में अब तक कुल 308 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इनमे से डेल्टा वैरिएंट के छह मरीज गंभीर रूप से बीमार हैं, अगर इनमे से एक भी मौत हुई तो यह छह महिला बाद होने वाली पहली मौत होगी।

मॉस्को से चीन आया डेल्टा वेरिएंट..

चीन के सरकार समर्थित अख़बार ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक,मॉस्को से आई एक उड़ान के जरिए चीन में कोरोना के ताजा मामले की शुरुआत हुई है। जुलाई के मध्य में चीन के पूर्वी शहर नानजिंग स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मॉस्को से एक विमान उतरा था। विमान के  सात यात्री  कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित थे। इन्हीं यात्रियों से एयरपोर्ट के सफाई कर्मियों में कोरोना वायरस फैल गया और धीरे-धीरे अन्य शहरों में प्रवेश करना शुरू कर दिया। देश भर में 30 अधिकारियों, महापौरों और स्थानीय स्वास्थ्य निदेशकों से लेकर अस्पतालों और एयरपोर्ट के प्रमुखों को लंबे समय से चीन में कोरोन वायरस के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इन्हे लापरवाही और स्थानीय प्रकोपों के लिए दंडित भी किया गया है।

कोरोना वायरस के वैश्विक मामले 20 करोड़ के पार..

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, डेल्टा वैरिएंट अब तक 135 देशों में सामने आ चुका है। चीन के साथ साथ भारत में भी डेल्टा वैरिएंट के मामले बढ़ रहे हैं। हल ही में दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने एक बैठक में स्वास्थ्य विभाग के साथ यह जानकारी साझा कि है की जुलाई के महीने में दिल्ली सरकार द्वारा जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे गए करीब 83.3 % नमूनों में डेल्टा वैरिएंट पाया गया है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अगले हफ्ते तक कोरोना वायरस संक्रमण के कुल वैश्विक मामले 20 करोड़ के पार चले जाएंगे।

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बुजुर्गों में वायरस का अलग असर..

जिस तरह से यह वायरस अपना नया – नया स्वरूप बना रहा है। उसी तरह से हर उम्र के लोगों पर इसका अलग असर नजर आ रहा है। जर्नल ऑफ गेरोनोटोलॉजी में प्रकाशित रिपोर्ट में वैज्ञानिकों के मुताबिक,  बुजुर्ग मरीजों में कोरोना संक्रमण अब अलग रूप में दिख सकता है। प्रमुख शोधकर्ता और हेल्थ साइकोलॉजिस्ट एलिसन मारजिलियानो ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण बुजुर्गों में आम लक्षण बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ को छोड़ दूसरी तरह की स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ हो सकती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार अलग अलग उम्र के हिसाब से असामान्य लक्षण के मामले ज्यादा हैं।  65 से 74 वर्ष के 31% बुजुर्गों में थकान, कमजोरी और बिस्तर से उठने के साथ चलने- फिरने में दिक्कत महसूस होती है। 85 वर्ष से अधिक उम्र के 44% लोगों में मधुमेह और डिमेंशिया के मरीजों में ऐसे लक्षण अधिक दिखे हैं। शोध में ये भी साफ है कि आधे लोगों को बुखार, सांस लेने में तकलीफ के साथ खांसी की भी दिक्कत महसूस हुई है । वैज्ञानिक अध्ययन में शामिल 11% मरीजों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी तकलीफ, भ्रमित रहने, घबराहट, भूलने के साथ सुस्ती भी महसूस हुई।

भारत में दो नई वैक्सीन को मिल सकती है मंजूरी..

तीसरी लहर का खतरा भारत समेत विश्व भर में मंडराने लगा है वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे अध्ययन में नई – नई बातें सामने आ रही हैं। कोरोना के नए-नए स्वरूप और लक्षण सामने आ रहे हैं। ऐसे में बुजुर्गों और खासकर बच्चों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। डेल्टा स्वरूप, जिस तरह से दुनिया को कोरोना वायरस से रूबरू कराने वाले चीन में फैल रहा है। जिसने कोरोना पर काबू भी जल्दी कर लिया था। उसे देखते हुए भारत को भी नागरिकों की सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द टीकाकरण करना होगा।

अभी तक भारत में कोवैक्सीन, कोविशील्ड, स्पूतनिक के टीके लग रहे हैं और अब कोरोना टीकाकरण में जल्द ही दो और वैक्सीन शामिल हो सकती हैं। कल ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया विशेषज्ञ समिति की बैठक में तीन टीकों पर चर्चा होगी। इसमें सरकार दो नई वैक्सीन को इसी सप्ताह आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दे सकती है।

  • जायडस कैडिला कंपनी की डीएनए आधारित वैक्सीन है
  • वैक्सीन कोवावैक्स है जिसका उत्पादन पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईआईआई) कर रहा है।

बच्चों के लिए कोवावैक्स टीके के तीसरे चरण के बैच को सीडीएल से मंजूरी मिल गई है। अब 18 साल से कम आयु वर्ग के बच्चों पर तीसरे चरण के ट्रायल शुरू हो गया है। यह वैक्सीन अन्य वैरिएंट पर भी असरदार मानी जा रही है।


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