7 साल की बच्ची से दुष्कर्म मामले में फाँसी, हाईकोर्ट ने कहा- कोई और सज़ा मंज़ूर नहीं

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बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या के मामले में निचली अदालत से मिली फांसी पर मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने मुहर लगाई है। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा को उचित मानकर कहा कि यह दुर्लभ से दुर्लभतम मामला है। फांसी से कम कोई भी सजा नाकाफी होगी, उससे न्याय नहीं होगा।

सात साल की एक बच्ची से दुष्कर्म और फिर अपराध छिपाने के लिए उसकी निर्मम हत्या करने वाले अपराधी को फांसी की मुहर लगाने के बाद हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा अपराधी ने जैसी निर्दयता बच्ची पर दिखा कर हत्या की, और जिस मानसिक वेदना से बच्ची के अभिभावक गुजरे, उसके लिए कोई और सजा मंजूर नहीं हो सकती।

ताकि कोई पहचान न सके…

अपराधी समीवेल उर्फ राजा ने जून 2020 में एक दलित परिवार की 7 साल की बच्ची को पुडुकोट्टई के एम्बल गांव से अगवा किया था। जिसके बाद सुनसान क्षेत्र में ले जाकर दुष्कर्म किया। इस डर से कि बच्ची उसे पुलिस के सामने पहचान लेगी, उसने बच्ची का सिर पेड़ के तने पर पटक दिया। उसका चेहरा व गला काट कर शव एक सूखे तालाब में फेंका। शव को सूखे पत्तों व झाड़ियों से ढका। गिरफ्तारी होने के बाद निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई, जिसे उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है।


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