वैज्ञानिक फ़ोरम ने कोरोना के ख़तरनाक वैरियेंट के बारे में चेताया था पर मोदी रैली करते रहे!


रॉयटर्स के मुताबिक मार्च की शुरुआत में नए वेरिएंट को लेकर इंडियन सार्स-कोव-2 जेनेटिक्स कंसोर्टियम या INSACOG ने चेतावनी जारी की थी। नाम न बताने की शर्त पर एक वैज्ञानिक ने कहा कि यह चेतावनी उस शीर्ष अधिकारी तक पहुँचायी गयी थी जो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं। 


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भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने संक्रमण का विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। बीते 24 घंटे में (30 अप्रैल को रात 11 बजे तक) भारत में 4,08,323 लोग कोरोना से संक्रमित हुए। इतनी बड़ी तादाद में दुनिया के किसी देश में एक दिन में लोग संक्रमित नहीं हुए। यह तादादा तब है जब बड़े पैमाने पर टेस्टिंग न होने की शिकायते हैं और लक्षण मिलते ही लोग कोरोना मानकर घर पर ही एकांतवास में इलाज कर रहे हैं।

पूरी दुनिया में भारत की स्थिति को लेकर चिंता है और भारतीय वेरियेंट को लेकर ख़तरा महसूस किया जा रहा है। इसी के साथ भारत की मोदी सरकार की लापरवाहियों और अक्षमता की भी चर्चा दुनिया भर के मीडिया में है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक ख़बर दी है कि सरकार की ओर से बनायी गयी वैज्ञानिकों के एक फ़ोरम ने मार्च की शुरूआत में ही प्रधानमंत्री कार्यालय तक नये और ज़्यादा संक्रामक कोरोना वेरियेंट के फैलने की चेतावनी दे दी थी। इसके बावजूद चुनावी रैलियाँ और कुंभ स्नान जैसे भीड़भाड़ वाले आयोजन होते रहे।

रायटर्स के मुताबिक फ़ोरम में शामिल पाँच में से चार वैज्ञानिकों ने उससे बात की। उन्होंने साफ़ कहा कि चेतावनी देने के बावजूद सरकार ने संक्रमण का फैलाव रोकने के लिए ज़रूरी क़दम नहीं उठाये। प्रधानमंत्री ख़ुद बड़ी-बड़ी रैलियाँ करते रहे जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग या मास्क लगाने जैसी बुनियादी चीजें भी नदारद थीं।

रॉयटर्स के मुताबिक मार्च की शुरुआत में नए वेरिएंट को लेकर इंडियन सार्स-कोव-2 जेनेटिक्स कंसोर्टियम या INSACOG ने चेतावनी जारी की थी। नाम न बताने की शर्त पर एक वैज्ञानिक ने कहा कि यह चेतावनी उस शीर्ष अधिकारी तक पहुँचायी गयी थी जो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं।

एक वैज्ञानिक और उत्तरी भारत में एक रिसर्च सेंटर के निदेशक ने पहचान नहीं ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया कि ये चेतावनी उस एक शीर्ष अधिकारी तक पहुंचाई गई थी जो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं.

रॉयटर्स ये पुष्टि नहीं कर सका कि क्या INSACOG की फाइंडिंग ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचाई गई थी. रॉयटर्स के मुताबिक उसने प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क करके जानने की कोशिश की थी कि यह चेतावनी ख़ुद प्रधानमंत्री तक पहुँची या नहीं, लेकिन वहाँ से कोई जवाब नहीं मिला।

सरकार ने वैज्ञानिक सलाहकारों का यह फ़ोरम बीते साल दिसंबर में गठित किया था जिसे कोरोना वायरस पर शोध करना था। फोरम ने राष्ट्रीय स्तर की दस प्रयोगशालाओं को इस काम में जोड़ा था। फोरम के सदस्य और जीव विज्ञान संस्थान के निदेशक अजय परिदा ने रॉयटर्स को बताया,INSACOG के रिसर्चरों ने फ़रवरी में ही B.1.617 का पता लगा लिया था, जिसे वायरस का भारतीय वेरिएंट कहा जा रहा है। फोरम की फाइंडिंग को स्वास्थ्य मंत्रालय के नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के साथ साझा की गयी थी और संक्रमण के फैलाव को लेकर चेतावनी दी गयी थी।

वैसे, कोरोना को लेकर मोदी सरकरा का ये रवैया नया नहीं है। बीते साल फ़रवरी में ही कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कोरोना को लेकर चेताया था, लेकिन 13 मार्च को स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन ने संसद में उनका मज़ाक़ उड़ाते हुए किसी भी ख़तरे से इंकार किया था। यह अलग बात है कि दस दिन बाद ही देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया था। इस संबंध में सोशल मीडिया काफ़ी चर्चा होती रही है।

 

 


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