सरकार ने आंदोलन को हिंसक बनाने की साज़िश रची, संसद मार्च स्थगित- संयुक्त किसान मोर्चा

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मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने प्रेस कॉऩ्फेंस कर कहा है कि पिछले 7 महीनों से चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने की साजिश अब जनता के सामने उजागर हो चुकी है। कुछ व्यक्तियों और संगठनों (मुख्य तौर पर दीप सिधु और सतनाम सिंह पन्नू की अगुवाई में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी) के सहारे, सरकार ने इस आंदोलन को हिंसक बनाया। हम फिर से स्पष्ट करते हैं कि लाल किले और दिल्ली के अन्य हिस्सों में हुई हिंसक कार्रवाइयों से हमारा कोई संबंध नहीं है। हम उन गतिविधियों की कड़ी निंदा करते है।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ के नेताओं ने कहा कि जो कुछ जनता द्वारा देखा गया, वह पूरी तरह से सुनियोजित था।  किसानों की परेड मुख्य रूप से शांतिपूर्ण और मार्ग पर सहमत होने पर हुई थी। हम राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान की कड़ी निंदा करते हैं, लेकिन किसानों के आंदोलन को ‘हिंसक’ के रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता, क्योंकि हिंसा कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा की गई थी, जो हमारे साथ जुड़े नहीं हैं। सभी सीमाओं पर किसान कल तक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी-अपनी परेड पूरी करके अपने मूल स्थान पर पहुंच गए थे।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि हम प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की बर्बरता की कड़ी निंदा करते हैं। पुलिस और अन्य एजेंसियों का उपयोग करके इस आंदोलन को खत्म के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयास अब उजागर हो गए है। हम कल गिरफ्तार किए गए सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने की मांग करते हैं। हम पुलिस की परेड में ट्रैक्टर और अन्य वाहनों को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों की भी निंदा करते हैं।

हम उन लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं जिन्होंने राष्ट्रीय प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया है। किसान सबसे बड़े राष्ट्रवादी हैं और वे राष्ट्र की अच्छी छवि के रक्षक हैं।

इसके साथ ही गणतंत्र दिवस पर कुछ अफसोसजनक घटनाओं के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए, संयुक्त किसान मोर्चा’ ने एक फरवरी के लिए निर्धारित संसद मार्च को स्थगित करने का फैसला लिया है। इसके अलावा, 30 जनवरी को गांधीजी के शहादत दिवस पर, शांति और अहिंसा पर जोर देने के लिए, पूरे देश में एक दिन का उपवास रखा जाएगा।

संयुक्त किसान मोर्चा’ ने जनता से दीप सिद्धू जैसे तत्वों का सामाजिक बहिष्कार करने की अपील की है।

संयुक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि दिल्ली में ही नहीं, किसान संगठनों द्वारा प्रस्तावित किसान गणतंत्र परेड कई राज्यों में की गई थी। बिहार में, किसानों ने पटना सहित कई स्थानों पर गणतंत्र दिवस मनाया। मध्य प्रदेश में, किसानों ने पूरे उत्साह के साथ इस शानदार दिन को मनाया। 26 जनवरी को दिल्ली में एनएपीएम के कार्यकर्ता किसान परेड में शामिल हुए, जो 12 जनवरी से पुणे से पैदल चले थे। मुंबई के आजाद मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। बैंगलोर में, हजारों किसानों ने किसान परेड में भाग लिया और यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण था। किसान गणतंत्र परेड में तमिलनाडु, केरल, हैदराबाद, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के किसानों ने भाग लिया।

संयुक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि आने वाले दिनों में अन्य योजनाओं और गतिविधियों की घोषणा की जाएगी।

किसान नेताओं ने कहा कि हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा।  किसान आश्वस्त हैं और शांति से इस सरकार से अपनी असहमति दिखा रहे हैं। कल की परेड में दिल्ली के नागरिकों के प्यार को देखकर हम उनका हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।

 


‘संयुक्त किसान मोर्चा’ की ओर से डॉ दर्शन पाल द्वारा जारी


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