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जम्मू कश्मीर सरकार का कर्मचारियों को आदेश – रिलायंस इंश्योरेंस को सालाना 8770 देकर बीमा कराइए!

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संजय कुमार सिंह

 

राष्ट्रपति शासन वाले जम्मू व कश्मीर में राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए ग्रुप मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी लागू करने की ‘मंजूरी” दी है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्वायत्त संस्थाओं और विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों के लिए यह बीमा लेना आवश्यक है जबकि पेंशन पाने वाले और दूसरे कर्मचारियों के लिए यह योजना वैकल्पिक है।

एक अक्तूबर से लागू होने वाली इस योजना के लिए राज्य सरकार ने बाकायदा निजी कंपनी सर्वश्री रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से करार किया है और कर्मचारियों के लिए एक साल के बीमा का प्रीमियम है 8770 रुपए। यह प्रति कर्मचारी परिवार छह लाख रुपए के लिए होगा। इसका नवीकरण कराया जा सकता है।

आप जानते हैं कि सरकार बहुप्रचारित आयुष्मान योजना के लिए गरीबों का प्रति परिवार पांच लाख रुपए का बीमा करा रही है और यहां राज्य प्रति परिवार छह लाख रुपए की पॉलिसी लेने के लिए कह रही है जो परिवार के पांच आश्रितों के लिए है। वहां बीमा राशि कितनी है। यहां राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए यह राशि कई गुना ज्यादा है। पेंशन पाने वालों के लिए यह योजना भले वैकल्पिक है पर प्रीमियम राशि 22,229 रुपए है। यह सही है स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम उम्र के साथ बढ़ता है पर आयुष्मान योजना और इस सरकारी योजना की दरों में इतना अंतर क्यों है और सरकार जीवन बीमा निगम और दूसरी कई पुरानी संस्थाओं को छोड़कर निजी क्षेत्र की संस्था से करार क्यों कर रही है।

कांग्रेस नेता, लेखक पत्रकार सलमान निजामी @Salman Nizami ने एक ट्वीट में यह आरोप लगाया है और सरकारी पत्र की कॉपी भी पोस्ट की है। ट्वीटर पर अपने परिचय में उन्होंने लिखा है, गोड्से भक्तों के लिए वे राष्ट्र विरोधी हैं, खून से भारतीय, दिल से गांधीवादी और आत्मा से नेहरूवादी।

एक तरफ तो जम्मू और कश्मीर सरकार अपने कर्मचारियों को सरकारी बीमा कंपनियों को छोड़कर निजी बीमा कंपनी से पॉलिसी लेने के लिए मजबूर कर रही है दूसरी ओर, ऐसा भी नहीं है कि कंपनी बेदाग है। इंडियन एक्सप्रेस में 13 अक्तूबर 14 की एक खबर का शीर्षक है, सीबीआई ने रिलायंस इंश्योरेंस के खिलाफ जांच शुरू की। इकनोमिक टाइम्स की एक खबर बताती 12 अप्रैल 2015 की एक खबर के मुताबिक बीमित को सीधे भुगतान नहीं करने के मामले में बीमा नियामक आईआरडीएआई कंपनी पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगा चुका है।

ओनली विमल !! नहीं, नहीं अब रिलायंस!

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।