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तमिलनाडु में प्रदूषणकारी वेदांता के ख़िलाफ़ प्रदर्शन उग्र हुआ, पुलिस फ़ायरिंग में 9 की मौत

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मीडिया विजिल डेस्क

 

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में आज स्टरलाइट कॉपर कारख़ाना बंद करने की माँग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस फ़ायरिंग से नौ लोगों की मौत हो गई और तमाम लोग घायल हो गए। इस कारख़ाने के ख़िलाफ़ क़रीब सौ दिनों से आंदोलन चल रहा था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस कारख़ाने से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों की वजह से आस-पास रहने वाले लाखों लोग प्रभावित हैं।

आंदोलनकारियों ने आज तूतीकोरिन बंद का आह्वान किया था और कलेक्ट्रेट पर रैली करने जा रहे थे। प्रशासन ने ऐहतियातन धारा 144 लगा दी थी। जानकारी के मुताबिक कारखाने की ओर बढ़ रही भीड़ को भगाने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले छेड़े। जवाब में प्रदर्शनकारियों कलेक्ट्रेट और स्टरलाइट कर्मचारियों के आवासी परिसर में आग लगा दी और कई गाड़ियाँ तोड़ दीं।

फ़िल्म स्टार कमल हासन की पार्टी मक्कल नीधी मय्यम ने बयान जारी करके घटना के लिए तमिलनाडु सरकार को दोषी ठहराया है। बयान में कहा गया है कि जनता अपराधी नहीं है। वह पहले कारख़ाने की वजह से मर रही थी और अब सरकार  के रवेये की वजह से मर रही है। सरकार ने स्टरलाइट कारखाने के खिलाफ़ चल रहे आंदोलन को बहुत हल्के में लिया था।

वहीं, मुख्यमंत्री ई.पलनीस्वामी ने कहा है कि करीब 20 हज़ार लोग कारखाने को घेरने जा रहे थे। उन्होंने पुलिस की और कलेक्ट्रेट में खड़ी आम लोगों की गाड़ियों में आग लगाई और कलेक्ट्रेट पर पथराव भी किया जिसके बाद पुलिस को फ़ायरिंग के लिए मजबूर होना पड़ा।

वैसे, यह मामला अचानक संगीन नहीं हुआ है। तमिलनाडु के तूतीकोरिन में अंतरराष्ट्रीय खनन कंपनी वेदांता लिमिटेड की स्टरलाइट कॉपर की स्थापना 1996 में हुई थी। इस कारख़ाने में तांबा ढालने का काम होता है। इस प्लांट में सालाना करीब चार लाख टन तांबा ढाला जाता है।

 

 

वेदांता इसे दुनिया का सबसे बड़ा तांबा ढलाई कारखाना बनाना चाहती है। लेकिन इसके आसपास रहने वाले कस्बों और गाँवों की करीब 5 लाख की आबादी के लिए यह कारखाना धीरे-धीरे विनाश बनता गया। आरोप है कि कारखाने से निकलने वाली सल्फ़रडाईआक्साइड और दूसरे प्रदूषकों ने पर्यावरण को बुरी तरह प्रभावित किया है। कोई घर ऐसा नहीं है जहाँ एक-दो व्यक्ति किसी बीमारी से परेशान न हों। साँस की तकलीफ़, चर्मरोग और कैंसर जैसी बीमारियाँ आम हो रही हैं। भूजल भी प्रदूषित हो गया है जिससे वे कुल्ला भी नहीं कर सकते। ग्रामीणों का साफ़ कहना है कि उनकी ज़िंदगी के लिए इसका बंद होना ज़रूरी है। लोगों की भारी तादाद इस आंदोलन में शामिल हो रही है।

इस जनवरी में जब लोगों को ख़बर लगी कि कारखाने की क्षमता को दोगुना करने की तैयारी हो रही है और सरकार इसका लाइसेंस का नवीनीकरण करने जा रही है तो ग्रामीणों ने इसे बंद करने की माँग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। पहले गाँव-गाँव जनजागरण हुआ और फिर 12 फ़रवरी को तूतीकोरिन में एक विशाल प्रदर्शन हुआ जिसमें करीब दो लाख लोग शामिल हुए थे। तब से यह आंदोलन लगातार जारी है। लोगों की भागीदारी को देखते हुए तमाम राजनीतिक दल भी समर्थन दे रहे हैं।