रेल निजीकरण: बिहार के कई शहरों हुआ हिंसक विरोध प्रदर्शन, कई छात्र गिरफ्तार

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रेल निजीकरण के खिलाफ शुक्रवार, 25 अक्टूबर को बिहार के कई शहरों पटना, आरा, सासाराम, नवादा, औरंगाबाद, समस्तीपुर आदि में हज़ारों छात्रों-युवाओं ने उग्र प्रदर्शन किया. इस दौरान छात्रों ने तोड़-फोड़ भी की और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया। छात्रों ने कई घंटों के लिए रेलवे परिचालन को बाधित किया. इस विरोध प्रदर्शन के कारण करोड़ों का नुकसान हुआ है. पुलिस ने हंगामा कर रहे छात्रों पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज भी किया. प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि रेलवे का निजीकरण सरकारी नौकरियों की उनकी आशा को नष्ट कर देगा क्योंकि राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर यानि भारतीय रेलवे सरकारी नौकरियों का अब तक का सबसे बड़ा प्रदाता रहा है.

भारतीय रेलवे की ट्रेनों, स्टेशनों और उत्पादन इकाइयों के निजीकरण के केंद्र के कदम के खिलाफ सैकड़ों युवाओं, ज्यादातर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी के साथ बिहार के रोहतास जिले के सासाराम रेलवे स्टेशन पर रेलवे के निजीकरण के विरोध में आवाज उठाई. प्रदर्शनकारी युवकों ने चार घंटे से अधिक समय तक ट्रेनों को जबरन रोका.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि, हम अब और चुप नहीं बैठेंगे. हम रेलवे के निजीकरण के खिलाफ विरोध करेंगे, क्योंकि यह सरकारी नौकरी की हमारी आशा को नष्ट कर देगा. उन्होंने कहा, मोदी सरकार हजारों गरीबों की कीमत पर कुछ अमीर लोगों के हितों की सेवा करने के लिए रेलवे का निजीकरण करने पर तुली हुई है. भारतीय रेलवे युवाओं को सरकारी नौकरियों का सबसे बड़ा प्रदाता रहा है. यदि इसका निजीकरण किया जाता है, तो हमारे लिए कुछ भी नहीं छोड़ा जाएगा. हम मोदी सरकार को रेलवे के निजीकरण की अनुमति नहीं देंगे.

सासाराम रेलवे स्टेशन पर जुटे हजारों छात्रों की भीड़ इतनी उग्र हो गई कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, लाखों रुपये की रेलवे की संपति का नुकसान हुआ, 18 छात्रों को गिरफ्तार करके जेल में बंद करना पड़ा और बाकियों की तलाश के लिए एसआईटी छापेमारी कर रही है.

निजीकरण के ख़िलाफ़ रेल यूनियनों, राजनीतिक पार्टियों और छात्र संगठनों द्वारा पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

शुरू में जब इसको लेकर खबरें बनीं कि रेल मंत्रालय ने 50 रेलवे स्टेशनों और 150 ट्रेनों के निजीकरण के लिए एक कमेटी बनायी गई तब केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल को बयान जारी करके कहना पड़ा कि “सरकार रेलवे का निजीकरण नहीं करने जा रही है, बल्कि निवेश लाने के लक्ष्य से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर विचार कर रही है.”

लेकिन अब रेल मंत्री का यह बयान लोगों में सरकार के फैसले के प्रति विश्वास जगाने के लिए नाकाफी है.


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