विधानसभा चुनाव- प्रियंका का प्रचंड प्रचार: एक नज़र

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2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का प्रचार अभियान ख़ासा चर्चा में रहा। प्रियंका गांधी की कड़ी मेहनत, उनके ऊर्जा एवं सकारात्मकता से भरे अभियानों ने देश एवं उत्तरप्रदेश के लोगों का ध्यान आकर्षित किया। जहां एक तरफ़ उनके नारों ने जनता के दिलों में जगह बनाई, वहीं दूसरी तरफ़ कड़ी मेहनत करती प्रियंका गांधी की भारी बारिश में कैम्पेन, खेतों में महिलाओं के साथ कैम्पेन की तस्वीरें लोगों के बीच चर्चा का केंद्र रहीं। यही नहीं, जनता के बीच एवं सोशल मीडिया पर प्रियंका गांधी के भाषण खूब वायरल हुए और उन्होंने अपने भाषणों से प्रधानमंत्री मोदी तक को चित किया व उन्हें उनका बयान बदलने पर मजबूर किया।

ताबड़तोड़ रैलियों और रोड शो में प्रियंका की मेहनत आई नज़र, पंजाब, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में भी सम्भाला मोर्चा:

2022 के पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में प्रियंका गांधी ने अपने प्रभार वाले क्षेत्र उत्तरप्रदेश समेत गोवा, उत्तराखंड, पंजाब में भी अच्छी-ख़ासी रैलियाँ कीं। प्रियंका गांधी ने पाँचों राज्यों को मिलाकर कुल 167 रैलियाँ, जनसभाएँ व नुक्कड़ सभाओं को सम्बोधित किया। 42 रोड शो एवं डोर टू डोर कैम्पेन के ज़रिए प्रियंका गांधी ने चुनाव अभियान के दौरान जनता से सम्पर्क साधा। इसके अलावा प्रियंका गांधी ने वर्चूअल रैली के ज़रिए उत्तराखंड, मणिपुर एवं उत्तरप्रदेश की विधानसभाओं को सम्बोधित किया। प्रियंका गांधी ने उत्तरप्रदेश के लिए 2, उत्तराखंड के लिए 1 एवं मणिपुर के लिए 1 वर्चूअल रैली सम्बोधित की और कुल 340 विधानसभाओं में सम्पर्क साधा।

उत्तरप्रदेश के अलावा उत्तराखंड, गोवा, पंजाब में प्रियंका गांधी की रैलियों एवं रोड शो की ख़ासी माँग थी। ख़ासकर महिला वोटरों को समझाने के लिए प्रियंका गांधी की आकर्षक शैली का कांग्रेस पार्टी ने भरपूर इस्तेमाल किया। यही वजह थी कि गोवा एवं पंजाब में प्रियंका गांधी ने घोषणापत्र की महिलाओं से जुड़ी घोषणाओं का एलान किया और उत्तराखंड में तो प्रियंका गांधी ने पूरा का पूरा घोषणापत्र ही रिलीज़ किया।

प्रियंका गांधी जी का चुनाव प्रचार

रोड शो-42
जनसभा/रैली/नुक्कड़ सभा-167
वर्चूअल रैली -3 (340 विधासभाओं के वोटरों को सम्बोधन)

*पंजाब के 3 दौरे, उत्तराखंड और गोवा के 2 दौरे और मणिपुर के लिए एक वर्चूअल रैली भी शामिल है

प्रियंका के सकारात्मक एवं रचनात्मक अभियानों ने लोगों का दिल जीता:

इन चुनावों में प्रियंका गांधी ने अपने चुनाव अभियानों के ज़रिए जनता के दिल में जगह बनाई। प्रियंका गांधी का पूरा चुनाव अभियान जनता के मुद्दों पर केंद्रित रहा और चुनाव प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी का ज़ोर इस बात पर रहा कि लोकतंत्र में ताक़त जनता के हाथ में होती है। इसलिए जनता के मुद्दों से इतर हटकर जो भी बात हो रही है वो सिर्फ़ और सिर्फ़ भटकाव है।

लड़की हूँ लड़ सकती हूँ: महिला सशक्तिकरण की गूंज: प्रियंका गांधी के उत्तरप्रदेश में 40% टिकट महिलाओं को देने के एलान ने सबको चौंका दिया। इस फ़ैसले पर लग रहे तमाम क़यासों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका गांधी ने साफ़ किया कि इस अभियान के ज़रिए उन्होंने राजनीति में आधी आबादी का हक़ सुनिश्चित करने के लिए एक शुरुआत की है। प्रियंका गांधी ने न केवल 40% टिकट महिलाओं को देने का वादा पूरा किया, बल्कि अपनी लिस्ट में ऐसी महिलाओं को मौक़ा दिया, जिन पर सत्ता के बल के ज़रिए अत्याचार किया गया था। उन्नाव रेप पीड़िता की माँ, शाहजहाँपुर में मुख्यमंत्री की सभा में अपनी हक़ की आवाज़ उठाने की वजह से प्रताड़ित की गई आशा बहन को प्रियंका गांधी ने टिकट देकर राजनीति की एक नई मिसाल खड़ी की।

प्रियंका गांधी का पूरा ज़ोर महिलाओं के सशक्तिकरण पर रहा, जिसमें उन्होंने महिलाओं को उनके पैरों पर खड़ा होने, उनके लिए रोज़गार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की बात को पुरज़ोर तरीक़े से उठाया। प्रियंका गांधी ने महिलाओं के लिए एक अलग से घोषणापत्र ‘शक्ति विधान’ निकालकर इन चुनावों में महिलाओं के मुद्दों को चुनावों के केंद्र में लाकर खड़ा किया।

गर्मी, चर्बी के बीच भर्ती की बात:

यूपी चुनावों में जहां सत्तापक्ष और विपक्ष का एक दल गर्मी और चर्बी निकालने की बात कर रहा था, वहीं प्रियंका गांधी ने इस पूरी चर्चा को भर्ती निकालने की तरफ़ मोड़ा। बेरोज़गारी उत्तरप्रदेश जैसे बड़े राज्य एवं सबसे ज़्यादा युवा जनसंख्या वाले राज्य की एक बड़ी समस्या है। प्रियंका गांधी ने उत्तरप्रदेश के युवाओं से लगातार संवाद किया और उनकी समस्याओं को उठाया। चुनाव के समय प्रियंका गांधी ने भर्ती क्रांति की बात करके युवाओं की आशा को एक ठोस रूप व रंग दिया। प्रियंका गांधी युवाओं के लिए अलग से एक भर्ती विधान लेकर आईं और उन्होंने साफ़ किया कि वे रोज़गार देने के खोखले वादे नहीं कर रही हैं बल्कि वो ये भी बता रही हैं कि रोज़गार आएँगे कहाँ से। प्रियंका गांधी के भाषणों के ज़रिए लगातार 12 लाख सरकारी पद ख़ाली होने एवं भर्तियों में गड़बड़ी की बात उठाई और जनता के सामने पदों को भरने व भर्तियों में गड़बड़ी को दूर करने का खाका भी रखा।

मुद्दों पर हो चुनाव:

प्रियंका गांधी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान आरोप-प्रत्यारोप की लीक से हटकर अपने चुनाव प्रचार को जनता के मुद्दों पर केंद्रित रखा। उन्होंने अपने हर भाषण में जनता के सामने कहा कि चुनाव धर्म और जाति पर नहीं, बल्कि आपके मुद्दों पर होना चाहिए। प्रियंका गांधी ने जनता के सामने इस बात पर ज़ोर दिया कि नेता धर्म और जाति की बात इसलिए करते हैं क्योंकि वो अपनी जवाबदेही से बचना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आप उन्हें ये मौक़ा मत दीजिए। आप नेताओं की जज़्बात उभार कर वोट लेने की आदत को चुनौती दीजिए।

सभी दलों को करना पड़ा कॉपी:

प्रियंका गांधी के रचनात्मक चुनाव अभियान को भाजपा व सपा जैसे दलों के लिए नकारना मुश्किल हो गया। महिलाओं के मुद्दों को केंद्र में लाकर प्रियंका गांधी ने सभी दलों को मजबूर किया कि चुनावों में महिलाओं की बात हो। इसलिए भाजपा, सपा व अन्य दलों ने महिलाओं के मुद्दे पर बात करनी शुरू की।

भाजपा ने तो प्रियंका गांधी द्वारा लाए गए शक्ति विधान की कई घोषणाएँ भी कॉपी की। वहीं प्रियंका गांधी द्वारा लगातार रोज़गार का मुद्दा उठाने के बाद सपा नेता अखिलेश यादव ने “हम भर्ती निकालेंगे” व “12 लाख ख़ाली पद भरेंगे” जैसे बयानों को अपने भाषणों का हिस्सा बनाया।

लोकतंत्र में ताक़त जनता के हाथ में होती है- प्रधानमंत्री को बदलना पड़ा अपना बयान:

चुनाव प्रचार अभियान के दौरान प्रियंका गांधी लगातार अपने भाषणों में कहती नज़र आईं कि लोकतंत्र में ताक़त जनता के हाथों में होती है। उन्होंने जनता से अपने वोट की ताक़त पहचानने और मुद्दों पर वोट देने का आह्वाहन किया। जब प्रधानमंत्री ने छुट्टा जानवर की समस्या पर अपने एक भाषण में कहा कि उन्हें पता ही नहीं था कि उत्तरप्रदेश में ये समस्या है तो प्रियंका गांधी ने उन्हें आड़े हाथों लिया और कहा कि आपने इन नेताओं को, ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को ये हिम्मत दी है कि 5 साल बाद आकर आपके बीच कहते हैं कि उन्हें आपकी समस्याओं के बारे में पता ही नहीं था।

प्रियंका गांधी के भाषणों का एक और अंश इन चुनावों में चर्चा का विषय बना। जब प्रधानमंत्री मोदी ने एक जनसभा में एक बूढ़ी अम्मा के विडीओ का ज़िक्र करते हुए कहा कि वो बूढ़ी अम्मा कह रही थीं कि मैंने मोदी का नमक खाया है, तब प्रियंका गांधी ने इस पर ज़ोरदार हमला बोला। प्रियंका गांधी ने जनता के बीच कहा कि आपने इनको इतनी हिम्मत दे दी है कि वो आपके बीच आकर कहते हैं कि बुजुर्गों ने मोदी का नमक खाया है। नमक नेता आपका खाते हैं। लोकतंत्र में ताक़त जनता की होती है।

प्रियंका गांधी के इस तीखे हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी को अपना बयान बदलना पड़ा। चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में प्रधानमंत्री मोदी ने एक जनसभा में कहा माताओं-बहनों आपने मेरा नमक नहीं, मैंने आपका नमक खाया है।

सोशल मीडिया पर वायरल प्रियंका गांधी:

जहां एकतरफ प्रियंका गांधी ने अपने सकारात्मक चुनाव अभियान से जनता की वाह-वाही लूटी, वहीं दूसरी तरफ़ प्रियंका गांधी इस दौरान सोशल मीडिया पर भी वायरल रहीं। शुरुआती दौर में प्रियंका गांधी का लड़की हूँ लड़ सकती हूँ अभियान का गीत वायरल हुआ तो बाद में उसी धुन पर लड़की हूँ लड़ सकती हूँ मैराथन में भागती हुई हज़ारों लड़कियों की तस्वीर वायरल हुई। लोगों ने सोशल मीडिया पर कहा कि बिना कोई सरकारी मशीनरी के, बिना बसों को लगाए इतनी भारी संख्या में लड़कियों की भागीदारी उन्होंने पहली दफ़ा देखी है।

प्रियंका गांधी की चुनाव अभियान के दौरान दृढ़ता, सहजता और विनम्रता की तस्वीरें भी खूब वायरल हुईं। जहां बारिश में भीगते हुए ट्रैक्टर पर बैठकर प्रचार करने की प्रियंका गांधी की तस्वीर को करोड़ों लोगों ने देखा, वहीं खेतों में जाकर मटर तोड़ती महिलाओं से संवाद की प्रियंका गांधी की सहज शैली को सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों ने सराहा। चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश यादव व जयंत चौधरी से आमना-सामना होने पर, प्रियंका गांधी के विनम्रता भरे अन्दाज़ में अभिवादन को करोड़ों लोगों ने लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत तस्वीर बताया। गर्मी, चर्बी नहीं भर्ती की बात को केंद्र में रखते हुए प्रियंका गांधी के युवाओं से संवाद को सोशल मीडिया पर युवाओं ने बहुत पसंद किया।

यही नहीं सोशल मीडिया पर प्रियंका गांधी का आक्रामक अन्दाज़ भी चर्चा का विषय रहा। उनका नेताओं को धर्म जाति पर वोट माँगने की हिम्मत देने वाला आक्रामक भाषण देशभर में करोड़ों लोगों तक पहुँचा।

प्रधानमंत्री के नमक वाले बयान और छुट्टा जानवरों की समस्या की जानकारी न होने वाले बयान पर प्रियंका गांधी की तीखी प्रतिक्रिया को भी लोगों ने खूब सराहा।

अलीगढ़ में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच बेधड़क प्रियंका गांधी की अपना भर्ती विधान बाँटते और हरदोई में योगी आदित्यनाथ की रैली से लौट रहे लोगों की प्रियंका गांधी से चुनाव प्रचार सामग्री लेते व प्रियंका गांधी की उनसे हाथ मिलाने एवं सेल्फ़ी देने की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल रहीं।

प्रियंका गांधी की सहजता और संवेदना से भरी शैली सभी को भायी:

चुनाव प्रचार के दौरान न केवल प्रियंका गांधी ने अपने भाषणों व मेहनत भरे चुनाव प्रचार से लोगों के दिलों में जगह बनाई बल्कि सहजता और संवेदना से भरी उनकी शैली ने भी लोगों का दिल जीता। फ़िरोज़ाबाद में अपने चुनाव प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी चूड़ी की ढलाई का काम करने वाली एक महिला के घर पहुँची और उनसे बात-चीत की। प्रियंका गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान ही ग़ाज़ियाबाद में एक दुकानदार से बातचीत की, कानपुर में एक रेप पीड़िता की माँ को गले लगाकर उनकी बात सुनी और लड़ाई में साथ देने का भरोसा दिलाया। अलीगढ़ में वे ब्यूटी पार्लर में घुसकर ब्यूटी पार्लर चलाने वाली महिला से सहजता भरा संवाद करते दिखीं तो महाराजगंज में भर्ती की समस्या लेकर आए नवयुवक को दूर से बुलाकर उसकी समस्या को संवेदना के सुनते भी दिखाई पड़ीं।

वाराणसी में प्रियंका गांधी ने कबीर मठ को अपना ठिकाना बनाया और गंगा माँ का आशीर्वाद लेकर गंगापुत्र निषादों की समस्याएँ पूरी संवेदना के साथ सुनीं। अपने कबीर चौरा मठ प्रवास के दौरान प्रियंका गांधी ने पंडित किशन महाराज, सितारा देवी जी एवं बूंदी महाराज जैसी वाराणसी के कला जगत की हस्तियों के घर जाकर उनकी गद्दी पर शीश नवाकर अपनी विनम्रता व सहजता का परिचय दिया।

लोगों ने कहा बोरिंग नहीं, प्रियंका गांधी ने रॉकिंग अभियान चलाया:

प्रियंका गांधी के चुनाव अभियान पर लोगों के बीच से एक प्रतिक्रिया जिसने सबका ध्यान खींचा वह यही थी कि प्रियंका गांधी ने बोरिंग नहीं रोचक अभियान चलाया। लोगों ने उनके अभियान की क्रीएटिविटी को खूब सराहा। साथ ही साथ रोचक अन्दाज़ में लोगों से मिलने, विरोधियों के बीच भी सहजता से अपनी बात रखने और भाषणों के दौरान रोचक अन्दाज़ में जनता की बात सुनने की प्रियंका गांधी की शैली लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी।