“ब्लीडिंग जारी थी, पेट में बच्चा मर रहा था, पर इलाज न हुआ क्योंकि मैं मुस्लिम हूँ!”

आदर्श तिवारी
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अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ देश भर में इस संकट काल में बनाए गए माहौल का असर ये है कि झारखंड में एक महिला के आरोपों से देश फिर से शर्मसार हो गया है। झारखंड की एक महिला ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम होने की वजह से झारखंड के एक सरकारी अस्पताल में न केवल उसका इलाज करने से मना किया गया, बल्कि उसके साथ मारपीट भी की गई। 16 अप्रैल तक, 4 माह की गर्भवती रही रिज़वाना खातून का आरोप है कि जमशेदपुर के सरकारी अस्पताल में उसके साथ मारपीट की गयी और साथ ही उसके इलाज में लापरवाही बरती गयी जिसकी वजह से उसके पेट में पल रहे बच्चे की मृत्यु हो गयी। अपने साथ हुई इस घटना के बाद रिज़वाना खातून ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखकर अपने साथ हुई अमानवीय घटना के बारे में बताया। सीएम ने इसके बाद कार्रवाई के आदेश दिए हैं, जबकि रिज़वाना का गर्भस्थ शिशु अब दुनिया में नहीं है।

पीड़ित महिला के भाई ने मीडिया विजिल से फ़ोन पर की बातचीत

इस घटना के बारे में मीडिया विजिल की ओर से आदर्श तिवारी ने फ़ोन पर रिज़वाना खातून के भाई मुनीर रज़ा से बात की, तो उन्होंने इसकी सिलसिलेवार तरीके से पूरी जानकारी दी। मुनीर ने कहा, “16 अप्रैल 2020 को 1 बजे दोपहर में मेरी बहन को ब्लीडिंग होने लगी, जिसके बाद मैं, मेरी माँ, मेरी बहन रिज़वाना खातून उनके पति और मेरी एक और बहन जमशेदपुर के सरकारी अस्पताल एमजीएम में इलाज कराने गए। वहां पहुँचने पर भी रिज़वाना को ब्लीडिंग हो रही थी। रिज़वाना जहाँ खड़ी थीं उस फर्श पर भी ब्लीडिंग की वजह से खून फ़ैल चूका था। यह देखकर वहां की एक महिला जो नर्स या डॉक्टर थीं, उन्होंने मेरी बहन के धर्म को लेकर अभद्र टिपण्णी की साथ ही भद्दी गलियाँ भी दीं और कहने लगीं कि फ़र्श पर फ़ैले ब्लड को साफ़ करो। तुम लोगों की वजह से कोरोना संक्रमण फ़ैल रहा है।”

जो मुनीर आगे कहते हैं, वहा ख़ौफ़नाक है। वे बताते हैं,

“मेरी बहन दर्द से कराह रही थी और काँप रही थी, इसलिए उसने खून साफ़ करने में देर की तो उस महिला ने मेरी बहन को चप्पल निकाल कर मारना शुरू कर दिया। हम सबने इस बात का विरोध किया और इलाज की बात कही तब जाकर कहीं बहन को लेबर रूम लें ले जाया गया  वहां ले जाकर भी मेरी बहन का इलाज नहीं किया गया बल्कि लगातार उसको मुस्लिम होने की बात कहकर प्रताड़ित किया जाता रहा। इलाज न होता देखकर, हम अपनी बहन को ‘टी खान’ नाम के एक दूसरे अस्पताल में ले गए। जहाँ चिकित्सक द्वारा जाँच किये जाने के बाद मेरी बहन के बच्चे की मृत्यु की जानकारी दी गयी। उसके बाद जल्द से जल्द ज़रूरी उपचार किया गया और मेरी बहन को बचाया जा सका।”

मुनीर और रिज़वाना का कहना है, “एमजीएम अस्पताल के द्वारा की गयी लापरवाही और अमानवीय व्यवहार ने हमें आश्चर्य में डाल दिया कि किसी अस्पताल में डॉक्टर और नर्स द्वारा अपने मरीज के साथ कैसे इस तरह का व्यवहार किया जा सकता है?”

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घटना के जाँच के आदेश दिए

झारखंड के मुख्यमंत्री का ट्वीट

रिज़वाना खातून के साथ हुई घटना की जानकारी और पत्र सोशल मीडिया के माध्यम झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पंहुचा। जिसके बाद हेमंत सोरेन ने स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और संबंधित डीसी पूर्वी सिंहभूम को टैग करते हुए मामले का संज्ञान लेने को कहा, साथ ही दोषियों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही। जिसके बात डीसी डीसी पूर्वी सिंहभूम रविशंकर शुक्ला ने ट्वीट करके बताया कि जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया जा चुका है। समिति से जांच प्रतिवेदन प्राप्त होते ही अविलंब नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

डीसी पूर्वी सिंहभूम का ट्वीट

फ़ोन पर हुई बात में मुनीर ने ये भी बताया कि मुख्यमंत्री तक बात जाने के बाद संबंधित थाना प्रभारी के साथ एमजीएम के अधिकारियों ने घर आकर हमारा बयान लिया है और आगे की कार्रवाई के लिए सूचित करने को कहा है।

समाचार चैनल्स और सोशल मीडिया ने छीन ली है हमारी मनुष्यता

 

जिस तरह से अधिकतर टीवी मीडिया ने कोरोना महामारी के इस नाज़ुक समय में तबलीगी ज़मात को लेकर पत्रकारिता की है। ये घटनाएँ उनकी पत्रकारिता का ही परिणाम है। बड़े-बड़े स्टूडियो में बैठकर, तबलीगी ज़मात को हर मुस्लिम से जोड़कर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ एक ख़ास क़िस्म का कार्यक्रम चलाया गया। अपनी ज़हरीली हेडलाइंस और सांप्रदायिक बहसों से अधिकतर टीवी मीडिया ने लोगों के मन में ये बात डालने की कोशिश की है कि कोरोना वायरस मुस्लिमों की वजह से फ़ैल रहा है। जिसके बाद देश भर से ऐसे कई मामले सामने आये हैं जहाँ मुस्लिम होने की वजह से अस्पतालों में इलाज नहीं किया गया। तो कहीं किसी सब्ज़ी या फ़ल बेचने वाले को उसके धर्म की वजह से मारा गया। दिन भर हिंदू-मुस्लिम करने वाले लोग मानवता और संवेदना भूल जाते हैं। साथ ही तस्वीरों में देख सकते हैं कि कई चैनलों और मशहूर टीवी एंकरों के सोशल मीडिया हैंडल से फ़ेक ख़बरें भी फ़ैलाने का काम किया गया। जिसका खंडन पुलिस द्वारा किया जाता रहा है। खाड़ी देशों ने हमारे इस बर्ताव के ख़िलाफ़ अब खुल कर विरोध करना शुरु कर दिया है, प्रधानमंत्री ट्वीट कर रहे हैं कि धर्म-जाति-रंग-वर्ग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। लेकिन जॉम्बी बन चुके समाज ने सुनना, समझना और महसूस करना छोड़ दिया है।


 

 


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