योजनाओं में मुफ़्त राशन लेने वालों ने ही सरकार को बेचा करोड़ों का अनाज, जांच के निर्देश

मीडिया विजिल मीडिया विजिल
ख़बर Published On :


गरीबों को सरकार कि तरफ से मुफ्त राशन की सुविधा दी जाती है लेकिन अब यह मामला सामने आया है की सरकार को ही अनाज लेने वाले लोगों ने तकरीबन करोड़ रुपये से ज्यादा का खाद्यान्न बेचा है। आधार कार्ड के जरिए इस बात का खुलासा हुआ है कि मुफ्त राशन लेने वाले 66 हजार राशन कार्ड धारकों ने सरकार को ही दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का अनाज बेचा है। इस मामले के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। सभी जिलाधिकारियों को इसकी गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं, और 15 दिन में पूरी रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।

कृषि भूमि दिखाकर बेचें अनाज..

जांच में सामने आया है कि राशन कार्ड धारक ने सरकारी खरीद केंद्रों पर जाकर कम से कम तीन लाख रुपये से अधिक कीमत का गेहूं और धान बेचा है। जांच में यह पाया गया है कि 66 हजार राशन कार्ड धारक ऐसे हैं जिन्होंने क्रय केंद्रों पर रबी व खरीफ में तीन लाख रुपये से अधिक का गेहूं व धान अपने पास कृषि भूमि दिखाकर बेचा है।

ऐसे पता चला मामला..

इस पूरी मामले की गड़बड़ी को आधार कार्ड के जरिए पकड़ा गया है। विभाग ने सरकारी खरीद केंद्रों पर धान और गेहूं बेचने वाले किसानों के राशन कार्डों पर दर्ज आधार नंबर का मिलान सॉफ्टवेयर के जरिए किया है। इस जांच में 66 हजार ऐसे आधार नंबर मिले, जिनके राशन कार्ड बने हैं और उन्होंने तीन लाख रुपये से ज्यादा का अनाज बेचा है। सिर्फ यही नहीं बल्कि ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें आठ से दस लाख रुपये के अनाज बेचे गए हैं।

1 लाख से अधिक मूल्य का राशन बेचने वाले मुफ्त राशन के पात्र कैसे?

आपको बता दें कि राज्य में तकरीबन 3 करोड़ 60 लाख राशन कार्ड धारक हैं। इनमें से कुल 14 करोड़ 87 लाख यूनिट पंजीकृत हैं, जिन्हें हर महीने प्रधानमंत्री गरीब अन्न कल्याण योजना के तहत मुफ्त राशन वितरित किया जा रहा है। नियम के अनुसार जिस परिवार की आय शहरी क्षेत्र में 3 लाख रुपये से अधिक और ग्रामीण क्षेत्र में 2 लाख रुपये से अधिक है, उसका यूनिट राशन कार्ड नहीं बनाया जा सकता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में एक लाख से अधिक मूल्य का खाद्यान्न बेचने वाले मुफ्त राशन के पात्र नहीं हैं।

इस जांच के बाद कई सवाल खड़े हो गए है। जैसे, अपात्रों को राशन कैसे बांटा गया? कहीं मुफ्त राशन लेने के बाद क्रय केंद्रों पर ही तो नही बेचा जाता है? कहीं राशन माफिया की सेटिंग से इस तरह का खेल तो नहीं हो रहा है? जिलाधिकारियों को भेजी गई जांच के मुख्य बिंदु भी यहीं है। अब जांच की रिपोर्ट आने के बाद इन पर कार्रवाई होगी।