किसान गणतंत्र परेड के बाद 100 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर चिंताजनक- संयुक्त किसान मोर्चा

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‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने गणतंत्र दिवस की परेड के बाद सौ से अधिक व्यक्तियों के लापता होने की सूचना के बारे में गहरी चिंता जताई है। अब ऐसे लापता व्यक्तियों के बारे में जानकारी संकलित करने की कोशिश की जा रही है, जिसके बाद अधिकारियों के साथ औपचारिक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाबत एक कमेटी का गठन किया गया है जिसमे प्रेम सिंह भंगू, राजिंदर सिंह दीप सिंह वाला, अवतार सिंह, किरणजीत सिंह सेखों व बलजीत सिंह शामिल है। लापता व्यक्ति के बारे में कोई भी जानकारी 8198022033 नंबर पर साझा की जा सकती है। ‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि लापता व्यक्ति का पूरा नाम, पूरा पता, फोन नंबर और घर का कोई अन्य संपर्क और कब से गायब है, साझा किया जाएं।

‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने मनदीप पुनिया और अन्य पत्रकारों की गिरफ्तारी की निंदा की है। मोर्चे ने कहा कि झूठे और मनगढ़ंत आरोपों की आड़ में अपनी वास्तविक साजिश को दबाने और किसानों में डर पैदा करने के प्रयासों को किसानों ने अपनी बढ़ती ताकत से जवाब दिया है।

‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने विभिन्न विरोध स्थलों की इंटरनेट सेवाओं को बंद करने के लिए सरकार निंदा की है। मोर्चे ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि वास्तविक तथ्य किसानों और सामान्य जनता तक पहुँचें, न ही उनका शांतिपूर्ण आचरण दुनिया तक पहुँचे। सरकार किसानों के चारों ओर अपना झूठ फैलाना चाहती है। यह विभिन्न धरना स्थलों पर किसान यूनियनों के समन्वित कार्य से भी डरती है और उनके बीच संचार साधनों में कटौती करने की कोशिश कर रही है। सरकार का यह कृत्य अलोकतांत्रिक और अवैध है।

मोर्चा के नेताओ ने सिंधु बॉर्डर व अन्य धरना स्थलों तक पहुंचने से आम लोगों और मीडिया कर्मियों को रोकने के लिए लंबी दूरी से विरोध स्थलों की घेराबंदी पर सवाल उठाया है। भोजन और पानी जैसी बुनियादी आपूर्ति को भी बाधित किया जा रहा है। नेताओं ने कहा कि हम सरकार के इन सभी हमलों की निंदा करते है।

‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि पुलिस और सरकार द्वारा हिंसा के कई प्रयासों के बावजूद, किसान अभी भी तीन कृषि कानूनों और एमएसपी पर बहस कर रहे हैं। हम सभी जागरूक नागरिकों को स्पष्ट करना चाहते हैं कि दिल्ली मोर्चा सुरक्षित और शांतिपूर्ण है।

‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि बड़े ही खेद के साथ महाराष्ट्र के एक और प्रदर्शनकारी की मौत की दुखद खबर को साझा कर रहे है, जिन्होंने शाहजहाँपुर संघर्ष में भाग लिया। शायरा पवार सिर्फ 21 साल की थीं। उनके बलिदान को याद रखा जाएगा और व्यर्थ नहीं जाएगा।

‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ के नेताओं ने बताया कि कल घोषित किए गए सद्भावना दिवस को देश भर में और मध्य प्रदेश में रीवा, मंदसौर, इंदौर, ग्वालियर, झाबुआ और अन्य स्थानों पर व्यापक रूप से समर्थन मिला। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शोधार्थियों ने भी किसानों के समर्थन में एक दिन का उपवास रखा।

राजस्थान और हरियाणा से बड़ी संख्या में किसान शाहजहाँपुर मोर्चे पर पहुँच रहे हैं। मोर्चा दिन पर दिन मजबूत होता जा रहा है। प्रदर्शनकारी किसानों के नए समूह सिंघू बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर भी पहुंच गए हैं, जबकि गाजीपुर विरोध स्थल भी प्रतिदिन मजबूत हो रहा है।

शाहजहाँपुर-खेड़ा बॉर्डर पर आंदोलन 51वें दिन जारी 

सरकार के आंदोलन तोड़ने के कई प्रयासों के बावजूद शाहजहांपुर-खेड़ाबॉर्डर पर आंदोलन जारी है। हाईवे पर जमे किसानों ने जनता से अपील की है कि अगर खेती किसान और रोजगार को बचाना है तो किसानों की इस लड़ाई में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें। किसानों ने कहा कि मोदी सरकार ने कहा गया था कि 2022 तक किसानों की आय दुगनी करेंगे लेकिन आय दुगनी करने की जगह किसानों को काले कानून दे दिए।

लोगों को संबोधित करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि किसानों के पिछले दो महीने के आंदोलन के दौरान सरकार के पास कोई तर्क नहीं था। कोई नैतिक आधार नहीं था। बस वह इस फिराक में थी कि उसे कहीं से 90 सेकेंड का वीडियो मिल जाए जिससे इस आंदोलन को बदनाम कर सके। 26 जनवरी को सरकार ने सोचा कि मजा आ गया। अब इनको मसल देंगे। लेकिन आज शाहजहांपुर बॉर्डर पर किसानों ने फिर से हुंकार भरा कि तीनों किसान विरोधी कानूनों वापस कराए बिना अपमानित हो कर नहीं लौटेंगे। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण दुबारा नहीं आयेगा, उन्होंने आंदोलनकारी किसानों को बधाई देते हुए कहा कि सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद किसान शाहजहांपुर मोर्चों पर पर जमे हुये हैं।

किसानों नेताओं ने कहा कि अगर देश में खेती, रोजगार, व्यापार को बचाना है तो सबसे पहले इन काले कृषि कानूनों को रद्द करवाना होगा, नहीं तो जैसे ही खेती पर संकट आएगा वैसे ही बेरोजगारी तेजी से बढ़ानी शुरू हो जाएगी। इसलिए इस जनांदोलन में बढ़ा चढ़ कर भाग लें।

सभा बलवीर छिल्लर, योगेंद्र यादव, राजा राम निल, रंजीत राजू, अमला राम, राम कृष्ण महलावत, कमलेश विशनोई, पृथ्वी पाल सिंह संधू, जीतराम छिल्लर, सतीश यादव और अजय अहलावत ने संबोधित किया। आमसभा का संचालन डॉ. संजय “माधव” ने किया।


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