नफ़रती न्यूज़ 18 का पत्रकार, उसी सांप्रदायिक उन्माद का शिकार बना..और सन्नाटा..

मयंक सक्सेना मयंक सक्सेना
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नोएडा एक्सटेंशन में रविवार की देर रात, जागरण के नाम पर बज रहे लाउडस्पीकर को बंद कराने गए न्यूज 18 के पत्रकार पर जानलेवा हमले के मामले में सामने आ रही जानकारियां, डराने वाली हैं। हालांकि मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू करने का आश्वासन दे दिया है पर मामले का जो विवरण आया है, वो सहमा देने वाला है।नोएडा के पुलिस कमिश्रर ने बाकायदा ट्वीट कर इस मामले में संज्ञान लिया है. उन्होंने कहा है कि लाउडस्पीकर विवाद में दोनों पक्षों से शिकायत मिली है और पुलिस जांच कर उचित कदम उठा रही है। पीड़ित पत्रकार की ओर से की गई शिकायत के अनुसार, न केवल उनकी लिंचिंग की कोशिश हुई, उनकी पत्नी से भी अभद्रता हुई और सबसे ज़्यादा ख़ौफ़नाक शिकायत ये है कि उनका 6 साल का बच्चा 45 मिनट तक, इसी उन्मादी भीड़ के पास रहा।

अब ज़रा मामले की भयावहता पढ़िए

शिकायत के अनुसार नोएडा एक्सटेंशन में ऑक्सफोर्ड स्‍क्वायर सुपर टेक इकोविलेज में रहने वाले न्यूज़ 18 के पत्रकार सौरभ शर्मा ने रात 11.30 बजे भी जगराते के लाउडस्पीकर के बंद न होने पर, पुलिस को कॉल कर के मदद मांगी। ज्ञात हो कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं। उनके पास एक पुलिसकर्मी का कॉल आया, जिसने उनको मौके पर पहुंचने को कहा और कहा कि पुलिस भी वहां पहुंच रही है। जब वहां पहुंची पुलिस ने लाउडस्पीकर बंद करने को कहा तो भीड़ और आयोजक, न केवल भड़क गए, जगराते के आयोजक ने सौरभ से कहा कि पुलिस ने उन्हें रात भर लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति दी है। सौरभ ने अनुमति पत्र दिखाने को कहा और बताया कि क़ानूनन ही ये नहीं किया जा सकता है, तो उन्हें राष्ट्रविरोधी और पाकिस्तानी कहा गया और जान से मारने की बात की गई।

न्यूज़ 18 की वेबसाइट के मुताबिक, आयोजक ने कहा, “ये पाकिस्तानी है और इसे यहीं पर खत्म कर देते हैं”। सौरभ के मुताबिक इस दौरान पीसीआर के दो पुलिस कर्मी मौजूद थे लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। सौरभ के अनुसार भीड़ किसी भी तरह से उनकी बात को सुनने के लिए तैयार नहीं थी और इस बीच उन पर हमला कर दिया गया। सौरभ को अपनी जान बचानी के लिए संघर्ष करते हुए भागना पड़ा।

जब पत्रकार की पत्नी और बच्चा फंस गए उन्मादी भीड़ के बीच

किसी तरह वहां से बच कर सौरभ अपने घर पहुंचे और शिकायत करने के लिए थाने गए। इस बीच, उनकी पत्नी ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर खतरा होने की बात कही तो कुछ पुलिसकर्मी मौके पर भेजे गए। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने सौरभ की पत्नी अंकिता शर्मा को वहां पर बुलाया। वहां पहुंचने पर भीड़ ने अंकिता के साथ भी अभद्रता की और उनको अपशब्द कहे। पुलिस के ऑक्सफोर्ड स्‍क्वॉयर के आरडब्‍ल्यूए अध्यक्ष के डी सिंह ने बीच बचाव कर लोगों को समझाने की कोशिश की और अंकिता को वहां से निकाला। लेकिन मामले की भयावहता, यहां ख़त्म नहीं होती है…भीड़ के इस वबाल के बीच अंकिता का हाथ उनके 6 साल के बच्चे से छूट गया और वह लोगों के बीच में रह गया। करीब 45 मिनट तक बच्चा अपनी मां के पास नहीं जा सका और आप बस अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इस बीच परिवार की मनोदशा क्या रही होगी। बस ख़ुद को इस जगह रख कर देखिए…

कितनी बेबस है पुलिस?

सौरभ की मानें तो उन्होंने तहरीर वारदात के तुरंत बाद देर रात 12 बजे बिसरख थाने में दे दी थी लेकिन इसके बावजूद सोमवार को पुलिस मामला दर्ज करने को टालती रही। सोमवार शाम करीब 3 बजे बिसरख थाने से पुलिसकर्मी सोसायटी पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज को रिकॉर्ड किया। फिर उनको बताया गया कि वरिष्ठों से बातचीत कर मामला दर्ज किया जाएगा। सौरभ से कहा गया कि इस पर मंगलवार को ही कोई निर्णय होगा। सौरभ ने इस दौरान पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई कि उनकी पत्नी और 6 साल के बच्चे को जान का खतरा है और आरोपियों को पकड़ा जाए लेकिन सोमवार देर रात तक ऐसा नहीं हो सका।

(इसके ऊपर लिखी सारी जानकारी न्यूज़ 18 की वेबसाइट पर छपी ख़बर से ली गई है।)

पुलिस की बात तो सुनिए

अब इसके बाद नोएडा पुलिस के उच्च अधिकारियों का बयान आया है, नोएडा के पुलिस आयुक्त ने कहा है कि सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर लाउडस्पीकर की आवाज को धीमी करवाया गया। पुलिस की ओर से ये ट्वीट करते समय, ये भी नहीं सोचा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक लाउडस्पीकर रात 10 बजे के बाद, बज ही नहीं सकता। उसे धीमा कराने से पुलिस का आशय क्या है? पुलिस ने ये भी कह दिया है कि सीसीटीवी फुटेज में कुछ ख़ास मिला नहीं है। लेकिन इसके बाद भी न्यूज़ 18 की वेबसाइट पर ख़बर अपने पत्रकार के साथ खड़े होने से ज़्यादा ऐसे लिखी गई है, जैसे कि पुलिस ने बड़ा कमाल का कोई बयान दे दिया है। हालांकि पुलिस के बयान से लगता है कि अंततः अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ ही एफआईआर कर दी जाएगी।

पत्रकारों ने उठाई आवाज़, चिल्लाते एंकर खामोश हैं

न्यूज़ 18, अपने चीखते-चिल्लाते और होश खोते एंकर्स के लिए मशहूर है। संभवतः इसकी टीआरपी भी इससे आती हो लेकिन हैरानी की बात है कि अपने ही पत्रकार को लेकर, इन एंकर्स के लगातार चीखते, बौखलाते ट्विटर हैंडल्स पर सन्नाटा है। आवाज़, वो पत्रकार उठा रहे हैं, जिनको ऐसे ही चैनल्स के पत्रकार, तमाम मौकों पर नीचा दिखाने की कोशिश करते आए हैं। वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर इस बारे में लिखा है। रवीश लिखते हैं,

“क्या news18 उस सीसीटीवी फ़ुटेज को चला रहा है जिसमें उसके पत्रकार सौरभ शर्मा को धमकी दी गई? उनकी पत्नी के साथ अभद्रता हुई? क्या सौरभ शर्मा के साथी कुछ लिख बोल रहे हैं या चुप हो गए हैं? इस खबर की एक एक डिटेल को आप ध्यान से पढ़िए। समाज किस तरह खोखला होता जा रहा है। पुलिस की मौजूदगी में सौरभ शर्मा की पत्नी अंकिता शर्मा के साथ अभद्रता की गई है। पुलिस की मौजूदगी में यह सब हुआ है और लिखा है कि मौक़े पर खड़े दो पुलिसकर्मी ने कुछ नहीं किया।

उनका छह साल का बच्चा भीड़ के हाथों में चला गया था। जैसे रोज़ लाखों लोगों का दिल और दिमाग़ भीड़ की दहशत से घिरा रहता है उसी तरह वो बच्चा घिर गया। उस पर कितना भयानक असर पड़ा होगा। पत्नी का भरोसा कितना टूट गया होगा। समाज और पुलिस पर। पत्नी अंकिता ने बयान जारी किया है कि पुलिस के बाद भी रात भर लाउडस्पीकर बजता रहा और जगराता में शामिल कथित रूप से शराब के नशे में थे। कथित मैंने अपनी तरफ़ से जोड़ दिया है। हो सकता है वहाँ के जगराता शामिल लोगों न शराब न पी हो, चरनामृत पी हो?
सोशल मीडिया पर लिखा जा रहा है कि चैनल के ऐंकर भी चुप है। वो सारे लोग जो धर्म की आड़ लेकर दूसरों की चुप्पी को ललकारते हैं वो भी चुप हैं। पत्रकार नवीन कुमार ने एक तस्वीर ट्विट किया है,जिसमें कथित उत्पातियों का चेहरा है, उन सबके नाम भी होंगे मगर कार्रवाई नहीं हुई है। अफ़सोस कि पत्नी और बच्चे को यह सब झेलना पड़ा लेकिन यह तो न जाने कितने लोग झेल रहे हैं।
इस चैनल का रोल भी नफ़रत फैलाने में रहा है। मुझे सौरभ शर्मा के फ़ेसबुक पोस्ट और लाइक की जानकारी नहीं है न कभी कोई कार्यक्रम देखा है, मगर सौरभ और अंकिता को भी पाकिस्तानी कहा गया और जान से मारने की धमकी दी गई। क्या मुझे कोई बता सकता है कि नफ़रत को लेकर सौरभ शर्मा के क्या विचार रहे हैं? किस तरह के पोस्ट हुआ करते थे? क्या सौरभ शर्मा ने अपने साथियों के नफरती शो को याद किया होगा कि उसके नतीजे में खुद उनकी जान ख़तरे में पड़ सकती है? क्या सौरभ शर्मा यह सब सोच रहे होंगे? कि उनके साथी चुप हैं और रवीश कुमार पोस्ट लिख रहा है? यह मौक़ा कहने का नहीं है लेकिन इसी मौक़े पर कहने की ज़रूरत है। यह प्रोजेक्ट अल्पमत को डराने के नाम पर बहुमत के लड़कों को दंगाई बनाने का है जो पूरा हो चुका है। सौरभ शर्मा ने उसकी झलक देख ली। जिसे हम रोज़ हिंसा के अनगिनत वीडियो में देख रहे हैं।”
पत्रकार मिथिलेश धर ने भी इस पर ट्वीट किया है और इस पूरी घटना की जानकारी ट्विटर पर डाली है।

वरिष्ठ पत्रकार नवीन कुमार ने भी इस पर ट्वीट किया है और सौरभ को धमकाने वाले लोगों के चेहरे भी सार्वजनिक कर दिए हैं, वे ट्वीट करते हैं

लेकिन पुलिस को कोई चेहरा नहीं दिख रहा है। पुलिस उल्टे कोशिश में है कि पत्रकार को ही शराब पिए हुए बता दे। हालांकि अगर किसी ने अपने घर में शराब पी भी है, तो क्या इसलिए वो लाउडस्पीकर का विरोध नहीं कर सकता? क्या उसे विरोध करने पर पाकिस्तानी और देशद्रोही कहा जाएगा? क्या उसके मारने की कोशिश की जाएगी? क्या उसकी पत्नी और बच्चे की जान पर ख़तरा आएगा? पुलिस को बताना चाहिए कि क़ानून की कौन सी धारा ऐसा कहती है। नागरिकता का मूल पुलिस भूल गई है और सौरभ का अपना चिल्लाता हुआ चैनल….इस पर ख़ामोश है…जहां चुप रहना है, वहां शोर करना और जहां बोलना है, वहां सन्नाटा इस समाज का सबसे अहम गुण बनता जा रहा है।