नेपाल में संसद बहाली के बाद देउबा से मिले प्रचंड, इस्तीफ़ा नहीं देंगे ओली

मीडिया विजिल मीडिया विजिल
ख़बर Published On :


नेपाल में संसद बहाली के फ़ैसले के बाद राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हो गयी हैं। बड़े पैमाने पर पीएम के.पी.शर्मा ओली के इस्तीफ़े की माँग शुरु हो गयी है। इसे पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल उर्फ प्रचंड खेमे की बड़ी जीत माना जा रहा है। इसी के साथ यह भी तय हो गया है कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी बड़े विभाजन की ओर है। इधर, पीएम ओली के प्रेस सलाहकार ने उनके इस्तीफ़े की संभावना से इंकार कर दिया है।

मंगलवार 23 फ़रवरी को नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने प्रतिनिधि सभा भंग करने के 20 दिसंबर के सरकार के फ़ैसले को पलट दिया और 13 दिन के अंदर संसद का सत्र बुलाने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि संविधान प्रधानमंत्री को यह अधिकार नहीं देता कि वह जब चाहे संसद भंग करने का फ़ैसला ले ले। यह संविधान की भावना के ख़िलाफ़ है।अदालत ने कहा कि संसद भंग करने की सिफारिश तभी की जा सकती है जब प्रधानमंत्री बहुमत का समर्थन खो दें और दूसरा प्रधानमंत्री न नियुक्त किया जा सके।

राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने ओली के फ़ैसले पर आँख मूँदकर मुहर लगा दी थी। ज़ाहिर है, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में ओली विरोधी खेमा इस फ़ैसले से काफ़ी ख़ुश है। अब नयी सरकार का गठन हो सकेगा लेकिन ओली समर्थक पार्टी छोड़ सकते हैं या पार्टी में विभाजन होगा, यह तय है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) और माओवादी पार्टी ने मिलकर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी का गठन किया था और पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी थी।

बहरहाल कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों धड़ो के लिए अकेले बहुमत साबित करना आसान नहीं है। स्थिति को भांपते हुए ओली विरोधी गुट के दहल और माधव कुमार नेपाल ने, नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा से बुधवार को मुलाक़ात की। कहा जा रहा है कि ज़रूरत पड़ने पर नेपाली कांग्रेस से सरकार बनाने के लिए सहयोग लिया जा सकता है। किसी खेमे के पास अकेले बहुमत न होने की वजह से नेपाली कांग्रेस का रोल अहम हो गया है।

इस बीच ओली और प्रचंड गुट नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के अपने समर्थकों की बैठक कर रहे हैं। ओली ने अपने धड़े के स्टैंडिंग कमेटी की बैठक बुलायी है वहीं दहल धड़े ने पार्लियामेंट्री पार्टी की बैठक बुलायी।

इधर, ख़बर है कि के.पी.शर्मा ओली तमाम आलोचना के बावजूद इस्तीफ़ा न देने पर अड़े हुए हैं। उनके प्रेस सलहाकार सूर्य थापा के मुताबिक वे संसद का सामना करेंगे।   


मीडिया विजिल जनता के दम पर चलने वाली वेबसाइट है। आज़ाद पत्रकारिता दमदार हो सके, इसलिए दिल खोलकर मदद कीजिए। अपनी पसंद की राशि पर क्लिक करके मीडिया विजिल ट्रस्ट के अकाउंट में सीधे आर्थिक मदद भेजें।

मीडिया विजिल से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।