सुशांत केस: गंदी रिपोर्टिंग पर आज तक, ज़ी न्यूज़, न्यूज़ 24, इंडिया टीवी को माफ़ी प्रसारण का आदेश


NBSA, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन द्वारा गठित संस्था है जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज करते हैं। यह संस्था चैनलों ने स्वनियमन के सिद्धांत के तहत बनायी है, पर अतीत में कई बार इसके फ़ैसलों को चैनलों ने ही तरजीह नहीं दी। देखना है कि इस बार वे क्या करते हैं।


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सुशांत राजपूत मामले में संवेदनहीन और फ़र्ज़ी रिपोर्टिंग करने वालों पर न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (NBSA) का चाबुक चला है। इस मामले में आज तक पर एक लाख रुपये जुर्माना लगा चुके NBSA ने आज तक, ज़ी न्यूज़, न्यूज़ 24 और इंडिया टीवी को माफ़ी माँगने के लिए दिन तारीख़ तय कर दी है जैसा कि उसने 6 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा था। ये सभीचैनल अपने पर्दे पर माफ़ीनामा प्रसारित करेंगे। इस मामल में सबसे ज़्यादा आलोचनाओं का शिकार रिपब्लिक टीवी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई क्योंकि वह NBSA का सदस्य नहीं है।

NBSA ने आजतक, ज़ी न्यूज़, न्यूज़ 24 और इंडिया टीवी को निर्देश दिया है कि वे असंवेदनशील रिपोर्टिंग और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को सनसनीखेज बनाने के लिए माफी मांगें:

1. नकली ट्वीट्स को दिवंगत अभिनेता का बताने और उन्हें उनके अंतिम ट्वीट के रूप में रिपोर्ट करने के लिए आज तक 27 अक्टूबर को रात 8 बजे माफी मांगें और एक लाख रुपए का जुर्माना भरे-

NBSA ने पाया है कि आज तक ने फर्जी ट्वीट्स पर गलत रिपोर्ट‌िंग की थी कि राजपूत ने तीन ट्वीट पोस्ट किए थे, जिन्हें बाद में उन्होंने 14 जून, 2020 को अपनी मौत से कुछ घंटे पहले डिलीट कर दिया था। हालांकि, बाद में चैनल ने ट्वीट को डिलीट कर दिया और लेख को हटा दिया।

इसको गंभीरता से लेते हुए अथॉरिटी ने कहा था, “ब्रॉडकास्टर को ट्वीट को टेलीकास्ट / अपलोड करने से पहले उच‌ित परिश्रम और सत्यापन करना चाहिए था, और न कि बाद में, उचित परिश्रम पत्रकारीय नैतिकता की आवश्यकता और मूल सिद्धांत है और बिना सत्यापन के ट्वीट्स को टेलीकास्ट करने में जनता के बीच गलत सूचना प्रसार करने की प्रवृत्ति ‌थी।”

2. ज़ी न्यूज़, इंडिया टीवी और न्यूज़ 24 ने दिवंगत अभिनेता की मृत्यु की असंवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए माफी मांगे-

ज़ी न्यूज़ को भी अभिनेता की मौत को सनसनीखेज बनाने के लिए 27 अक्टूबर को सार्वजनिक माफी मांगने को कहा गया है।

3. इंडिया टीवी ने दिवंगत अभिनेता का शव दिखाने के लिए 27 अक्टूबर को सार्वजनिक माफी मांगे-

अथॉरिटी ने पाया कि इंडिया टीवी को NBSA के दिशा-निर्देशों का इस हद तक “उल्लंघन” किया था कि उसने अपने प्रोग्राम में बार-बार शव के होंठों के रंग और अभिनेता की गर्दन पर पड़े निशान का वर्णन किया था। इसने कथित रूप से शव को एक कपड़े से ढंका दिखाया, जिसे अपार्टमेंट से बाहर ले जाया जा रहा था।

4. न्यूज 24 अभिनेता की मौत के असंवेदनशील और सनसनीखेज कवरेज के लिए 29 अक्टूबर को सार्वजनिक माफी मांगे-

अथॉरिटी ने पाया कि न्यूज 24 द्वारा चलाई गई टैगलाइन “आक्रामक ‌थी और मृतक की गरिमा को प्रभावित करती थी”, जिसमें यह कहा गया था कि सुशांत अपनी फिल्म छीछोरे में उनके द्वारा दिए गए आत्महत्या विरोधी संदेश को भूल गए।

5. अभिनेता की मृत्यु के कवरेज के आपत्तिजनक वीडियो को हटाने के निर्देश का एबीपी न्यूज अनुपाल करे-

6 अक्टूबर के अपने आदेश में, NBSA ने कहा था, “निस्संदेह, मीडिया को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का है। यह भी संदेह नहीं किया जा सकता है कि जब सुशांत सिंह राजपूत जैसे लोकप्र‌िय व्यक्तित्व आत्महत्या करते हैं, तो न केवल यह बड़ी खबर बनती है, बल्कि चर्चा का विषय भी बनती है, जो कि विभिन्न शिकायतों और परिकल्पनाओं के इर्द-गिर्द घूम सकती है। इसलिए, ऐसे कार्यक्रमों के प्रसारण को न तो हतोत्साहित किया जा सकता है और न ही आलोचना की जा सकती है। भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत न केवल सूचनाओं को व्यक्त करने, प्रकाशित करने और प्रचार करने का अधिकार शामिल है, बल्कि सूचना प्राप्त करने का अधिकार भी शामिल है। सूचना का प्रसार करके, मीडिया नागरिकों को उक्त अधिकार को उपलब्‍ध करने में मदद कर रही है।”

NBSA, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन द्वारा गठित संस्था है जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज करते हैं। यह संस्था चैनलों ने स्वनियमन के सिद्धांत के तहत बनायी है, पर अतीत में कई बार इसके फ़ैसलों को चैनलों ने ही तरजीह नहीं दी। देखना है कि इस बार वे क्या करते हैं।

लाइव लॉ के इनपुट के साथ।


 


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